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434.97 लाख सोलर प्लांट पर खर्च फिर भी मंडी में अंधेरा : फोटो
सार
जीटी रोड स्थित नवीन मंडी में वर्ष 2017 में सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने किया था।बिजली कटौती की स्थिति में मंडी में व्यापारियों व किसानों को असुविधा से बचाने के लिए सोलर प्लांट की स्थापना की गई थी।वारंटी के पांच साल पूरे होने से पहले ही यह खराब हो गया।
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विस्तार
एटा। जीटी रोड स्थित नवीन मंडी में वर्ष 2017 में सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने किया था। 4.34 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए इस प्लांट में खराबी आ जाने से मंडी में अब बिजली गुल होते ही अंधेरा छा जाता है।
बिजली कटौती की स्थिति में मंडी में व्यापारियों व किसानों को असुविधा से बचाने के लिए सोलर प्लांट की स्थापना की गई थी। अलीगढ़ मंडल में 282 किलोवाट का यह सबसे बड़ा हाइब्रिड सोलर पॉवर प्लांट था। शुरूआती कुछ माह तो प्लांट ठीक चला, लेकिन बाद में धीरे- धीरे स्थिति खराब होती गई। वारंटी के पांच साल पूरे होने से पहले ही यह खराब हो गया। इसके बावजूद ठीक नहीं कराया गया।
बताया गया कि वर्ष 2019 में बैटरी बदलवाने को मंडी उपनिदेशक को पत्र भेजा गया, लेकिन बैटरी नहीं बदली गईं। मंडी प्रशासन ने कहा था कि कंप्यूटर न चल पाने के कारण ई-मंडी का कार्य प्रभावित होता है। वर्ष 2020 में मंडी उपनिदेशक को पत्र भेजकर बताया गया कि सोलर प्लांट का बैकअप सिर्फ 50 मिनट का है। जो पर्याप्त नहीं है। अगस्त 2022 में भेजी गई रिपोर्ट में प्लांट के पूरी तरह बंद होने की जानकारी दी गई। अंधेरा होने पर अप्रिय घटनाओं की आशंका भी जताई गई।
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बैटरी खराब, ग्रिड को भी आपूर्ति नहीं
मंडी में प्लांट के निर्माण के दौरान कहा गया कि इससे जो बिजली बनेगी उसे पॉवर ग्रिड को आपूर्ति दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। प्लांट में लगी 900 बैटरी खराब हो चुकी हैं। इनसे बैकअप नहीं मिल रहा।
मंडी में सोलर प्लांट बैकअप नहीं दे रहा है। इसके लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। वहां से निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अरुण यादव, मंडी सचिव
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बिजली कटौती की स्थिति में मंडी में व्यापारियों व किसानों को असुविधा से बचाने के लिए सोलर प्लांट की स्थापना की गई थी। अलीगढ़ मंडल में 282 किलोवाट का यह सबसे बड़ा हाइब्रिड सोलर पॉवर प्लांट था। शुरूआती कुछ माह तो प्लांट ठीक चला, लेकिन बाद में धीरे- धीरे स्थिति खराब होती गई। वारंटी के पांच साल पूरे होने से पहले ही यह खराब हो गया। इसके बावजूद ठीक नहीं कराया गया।
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बताया गया कि वर्ष 2019 में बैटरी बदलवाने को मंडी उपनिदेशक को पत्र भेजा गया, लेकिन बैटरी नहीं बदली गईं। मंडी प्रशासन ने कहा था कि कंप्यूटर न चल पाने के कारण ई-मंडी का कार्य प्रभावित होता है। वर्ष 2020 में मंडी उपनिदेशक को पत्र भेजकर बताया गया कि सोलर प्लांट का बैकअप सिर्फ 50 मिनट का है। जो पर्याप्त नहीं है। अगस्त 2022 में भेजी गई रिपोर्ट में प्लांट के पूरी तरह बंद होने की जानकारी दी गई। अंधेरा होने पर अप्रिय घटनाओं की आशंका भी जताई गई।
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बैटरी खराब, ग्रिड को भी आपूर्ति नहीं
मंडी में प्लांट के निर्माण के दौरान कहा गया कि इससे जो बिजली बनेगी उसे पॉवर ग्रिड को आपूर्ति दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। प्लांट में लगी 900 बैटरी खराब हो चुकी हैं। इनसे बैकअप नहीं मिल रहा।
मंडी में सोलर प्लांट बैकअप नहीं दे रहा है। इसके लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। वहां से निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अरुण यादव, मंडी सचिव