{"_id":"1e457bc50e61e7e8bbf1c2c98122efce","slug":"-hindi-news-255","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवार आज भी जाते हैं खुले में शौच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार आज भी जाते हैं खुले में शौच
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Wed, 18 Nov 2015 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व शौचालय दिवस गुरुवार को मनाया जा रहा है, लेकिन जिले में शौचालयों की स्थिति काफी खराब है। आज भी 134565 परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य कैसे पूरा होगा।
दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन लागू किया गया। इस मिशन के तहत वर्ष 2012 में शौचालयों की स्थिति को लेकर कराए गए सर्वे को आधार माना गया, जो परिवार शौचालय विहीन मिले उनको 2019 तक संतृप्त करने का निर्णय लिया गया। शौचालयों के निर्माण को लेकर सबसे पहले वर्ष 199 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान शुरू किया गया। इस अभियान को सफलता न मिलने पर वर्ष 2012 में निर्मल भारत अभियान नाम दिया गया। इन अभियानों पर प्रचार प्रसार पर लाखों खर्च हुए। करोड़ों रुपये शौचालयों के निर्माण के लिए आवंटित किए। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। अब स्वच्छ भारत अभियान के लागू हो जाने के बाद भी स्थिति में अंतर आता दिखाई नहीं दे रहा।
विज्ञापन
दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन लागू किया गया। इस मिशन के तहत वर्ष 2012 में शौचालयों की स्थिति को लेकर कराए गए सर्वे को आधार माना गया, जो परिवार शौचालय विहीन मिले उनको 2019 तक संतृप्त करने का निर्णय लिया गया। शौचालयों के निर्माण को लेकर सबसे पहले वर्ष 199 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान शुरू किया गया। इस अभियान को सफलता न मिलने पर वर्ष 2012 में निर्मल भारत अभियान नाम दिया गया। इन अभियानों पर प्रचार प्रसार पर लाखों खर्च हुए। करोड़ों रुपये शौचालयों के निर्माण के लिए आवंटित किए। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। अब स्वच्छ भारत अभियान के लागू हो जाने के बाद भी स्थिति में अंतर आता दिखाई नहीं दे रहा।
विज्ञापन