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Deoria News: उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पूरा किया छठ व्रत
Wed, 29 Oct 2025 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 29 Oct 2025 12:14 AM IST
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छठ घाट पर बारिश के समय छाता लेकर बैठी महिलाएं,
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। लोक आस्था का महापर्व छठ मंगलवार को पूर्ण हो गया। बारिश और बदली के बीच सूर्यदेव की प्रतीक्षा करतीं महिलाओं ने घड़ी में सूर्योदय के समय का मिलान कर अर्घ्य दिया। व्रती महिलाओं समेत परिवार का उल्लास छलक आया। शहर में 30 घाट बनाए गए थे।
व्रती महिलाएं आधी रात को स्नान कर पहले छठ मइया का ध्यान किया। फिर सज धजकर भोर में ही छठ घाट के लिए चल पड़ीं। पीछे-पीछे घर के युवक, युवतियां और परिजन दउरी में पूजन सामग्री लेकर चल पड़े। व्रती महिलाएं छठ मइया का गीत गाते आगे आगे चलती रहीं। साथ में गीत दोहराते हुए अन्य महिलाएं व युवतियां चलती रहीं थीं। भक्तिभाव से पूर्ण गीत से शहर में भक्ति की छटा बिखरती रही। पोखरे और नदी घाट पर पहुंचकर वेदी पर पूजन सामग्री सजा दिया। महिलाओं ने दीप जलाकर वेदी पर रख दिया। वेदी के चारों ओर व्रती महिलएंा और परिवार के लोग बैठ गए। व्रती महिलाओं ने विधि-विधान से छठ मइया की पूजा की। घर से लाई गई पूजन सामग्री को वेदी पर अर्पित कर प्रणाम किया।
सूर्योदय से ठीक पहले व्रती महिलाएं पोखरे के जल में उतर कर सूर्य देव के उदीयमान होने की प्रतीक्षा करने लगीं। उग-उग हो सूरुज देव अरघिया के भइल बेर... गाते हुए सूर्य के शीघ्र निकलने की कामना करने लगीं।
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इधर बारिश और बदली के चलते आसमान में सूर्य देव के दर्शन नहीं हो रहे थे। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद व्रती महिलाओं ने सूर्याेदय का समय 6:02 बजे को घड़ी में देखा।
समय हो जाने पर बाल की लट को हाथ में लेकर पोखरे में खड़ी हो गईं। पति, पुत्र या पुरोहित के हाथों गाय के कच्चे दूध और जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। इसके बाद छठ मइया की वेदी पर आकर बैठ गईं। पुन: छठ माता को प्रणाम कर घर की तरफ चल पड़ीं।
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देवरिया। लोक आस्था का महापर्व छठ मंगलवार को पूर्ण हो गया। बारिश और बदली के बीच सूर्यदेव की प्रतीक्षा करतीं महिलाओं ने घड़ी में सूर्योदय के समय का मिलान कर अर्घ्य दिया। व्रती महिलाओं समेत परिवार का उल्लास छलक आया। शहर में 30 घाट बनाए गए थे।
व्रती महिलाएं आधी रात को स्नान कर पहले छठ मइया का ध्यान किया। फिर सज धजकर भोर में ही छठ घाट के लिए चल पड़ीं। पीछे-पीछे घर के युवक, युवतियां और परिजन दउरी में पूजन सामग्री लेकर चल पड़े। व्रती महिलाएं छठ मइया का गीत गाते आगे आगे चलती रहीं। साथ में गीत दोहराते हुए अन्य महिलाएं व युवतियां चलती रहीं थीं। भक्तिभाव से पूर्ण गीत से शहर में भक्ति की छटा बिखरती रही। पोखरे और नदी घाट पर पहुंचकर वेदी पर पूजन सामग्री सजा दिया। महिलाओं ने दीप जलाकर वेदी पर रख दिया। वेदी के चारों ओर व्रती महिलएंा और परिवार के लोग बैठ गए। व्रती महिलाओं ने विधि-विधान से छठ मइया की पूजा की। घर से लाई गई पूजन सामग्री को वेदी पर अर्पित कर प्रणाम किया।
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सूर्योदय से ठीक पहले व्रती महिलाएं पोखरे के जल में उतर कर सूर्य देव के उदीयमान होने की प्रतीक्षा करने लगीं। उग-उग हो सूरुज देव अरघिया के भइल बेर... गाते हुए सूर्य के शीघ्र निकलने की कामना करने लगीं।
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इधर बारिश और बदली के चलते आसमान में सूर्य देव के दर्शन नहीं हो रहे थे। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद व्रती महिलाओं ने सूर्याेदय का समय 6:02 बजे को घड़ी में देखा।
समय हो जाने पर बाल की लट को हाथ में लेकर पोखरे में खड़ी हो गईं। पति, पुत्र या पुरोहित के हाथों गाय के कच्चे दूध और जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। इसके बाद छठ मइया की वेदी पर आकर बैठ गईं। पुन: छठ माता को प्रणाम कर घर की तरफ चल पड़ीं।