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Deoria News: सड़कों से सफेद पट्टी और ब्रेकरों के निशान गायब...हादसे का बढ़ा खतरा
Wed, 17 Dec 2025 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 17 Dec 2025 11:22 PM IST
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भागलपुर। सर्दी का मौसम शुरू होते ही सुबह-शाम घने कोहरे का असर दिखाई देने लगा है। ऐसे में क्षेत्र की सड़कों पर सुरक्षा इंतजामों की कमी राहगीरों के लिए खतरा बनती जा रही है। कई मार्गों पर सड़क की सफेद पट्टियां और ब्रेकरों के निशान पूरी तरह मिट चुके हैं, जिससे अंधे मोड़ों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
ब्लॉक क्षेत्र के सलेमपुर-भागलपुर मार्ग और मईल-भागलपुर मार्ग से सफेद पट्टियां व सांकेतिक संकेतक लगभग गायब हो चुके हैं। इन सड़कों पर झाड़ियों के कारण बने अंधे मोड़ों पर वाहन चालकों को आगे का रास्ता नजर नहीं आता, जिससे कोहरे के समय हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
चिंता की बात यह है कि केवल पुरानी ही नहीं, बल्कि नई बनी सड़कों पर भी सफेद पट्टी और संकेतक लगाने को लेकर विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है, जबकि सड़क सुरक्षा को लेकर डीएम की अध्यक्षता में हर माह बैठक होती है। इसके बावजूद शासन के दिशा-निर्देशों का जमीनी असर दिखाई नहीं दे रहा।
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भागलपुर से सलेमपुर जाने वाली सड़क पर कुंडौली से भागलपुर तक करीब आधा दर्जन अंधे मोड़ हैं। एक ओर झाड़ियों ने मोड़ों को और खतरनाक बना दिया है, तो दूसरी ओर संकेतक न होने से कोहरे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
वहीं भागलपुर-मईल मार्ग को बने करीब दो साल हो चुके हैं लेकिन आज तक न तो अंधे मोड़ों से झाड़ियां हटाई गईं और न ही आवश्यक संकेतक लगाए जा सके।
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ब्लॉक क्षेत्र के सलेमपुर-भागलपुर मार्ग और मईल-भागलपुर मार्ग से सफेद पट्टियां व सांकेतिक संकेतक लगभग गायब हो चुके हैं। इन सड़कों पर झाड़ियों के कारण बने अंधे मोड़ों पर वाहन चालकों को आगे का रास्ता नजर नहीं आता, जिससे कोहरे के समय हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
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चिंता की बात यह है कि केवल पुरानी ही नहीं, बल्कि नई बनी सड़कों पर भी सफेद पट्टी और संकेतक लगाने को लेकर विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है, जबकि सड़क सुरक्षा को लेकर डीएम की अध्यक्षता में हर माह बैठक होती है। इसके बावजूद शासन के दिशा-निर्देशों का जमीनी असर दिखाई नहीं दे रहा।
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भागलपुर से सलेमपुर जाने वाली सड़क पर कुंडौली से भागलपुर तक करीब आधा दर्जन अंधे मोड़ हैं। एक ओर झाड़ियों ने मोड़ों को और खतरनाक बना दिया है, तो दूसरी ओर संकेतक न होने से कोहरे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
वहीं भागलपुर-मईल मार्ग को बने करीब दो साल हो चुके हैं लेकिन आज तक न तो अंधे मोड़ों से झाड़ियां हटाई गईं और न ही आवश्यक संकेतक लगाए जा सके।