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Deoria News: जब धरा पर बढ़ा अत्याचार तब हुआ श्रीकृष्ण का अवतार
Wed, 08 Oct 2025 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 08 Oct 2025 12:08 AM IST
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एकौना गांव में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। एकौना गांव में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कथाव्यास डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि जब-जब इस पृथ्वी पर धर्म का ह्रास व अधर्म की बढ़ोत्तरी हुई और कंस आदि पापियों का प्रदुर्भाव हुआ तब तब प्रभु किसी न किसी रूप में अवतार लेकर पापियों का सर्वनाश कर पृथ्वी के बोझ को हल्का करके धर्म की स्थापना करते हैं।
उन्होंने कहा कि द्वापर युग के अंत में जब आसुरी शक्तियों का चारों तरफ बोलबाला हो गया तब पृथ्वी से यह सब सहा नहीं गया। वह देवों के साथ जाकर ब्रम्हा जी को अपना दुखडा सुनाया। ब्रम्हादि देवता क्षीरसागर के तट पर भगवान को पुकारने लगे। उसी समय आकाशवाणी हुई कि कुछ ही समय में देवकी और वसुदेव के यहां अवतार लेकर तुम्हारे सारे कष्टों का निवारण करुंगा। यह सुनकर सारे देवता भगवान की स्तुति करने लगे। यहां मथुरा में देवकी वसुदेव का विवाह हुआ। कंश ने सोने के रथ हजारों दास दासिया दिया जिस रथ पर देवकी वसुदेव बैठे थे उसी का संचालन स्वयं कंस कर रहा था।
उसी समय आकाशवाणी हुई कि रे कंस जिस देवकी को इतनी प्रेम से विदाई कर रहा उसी की आठवीं संतान तेरा वध करेगी। यह सुनकर कंस आग-बबूल हो गया और कहा न रहेगी देवकी न होगी आठवीं संतान। यह कहकर देवकी की चोटी पकड़कर मथुरा की सडकों पर घसीटते हुए मारना चाहा, तब वसुदेव ने कंस से कहा देवकी तो आपके मृत्यु का कारण नहीं है। मैं देवकी के सभी संतानों को आपके हवाले कर दूंगा, इस पर कंस मान गया। प्रथम बालक का जन्म हुआ। वसुदेव ने उसे कंस को दे दिया। कंस ने कहा मेरा काल आठवां है, उसे लाइएगा। इस पर नारद ने जाकर उल्टा-सीधा पढ़ा दिया। कंस ने एक-एक कर छह संतानों की हत्या कर दी। आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर सारे दुष्टों का संहार कर दिया। इस दौरान गंगाप्रसाद शुक्ल अमरनाथ शुक्ल अखिलेश नागेंद्र यादव प्रो ओमप्रकाश शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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रुद्रपुर। एकौना गांव में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कथाव्यास डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि जब-जब इस पृथ्वी पर धर्म का ह्रास व अधर्म की बढ़ोत्तरी हुई और कंस आदि पापियों का प्रदुर्भाव हुआ तब तब प्रभु किसी न किसी रूप में अवतार लेकर पापियों का सर्वनाश कर पृथ्वी के बोझ को हल्का करके धर्म की स्थापना करते हैं।
उन्होंने कहा कि द्वापर युग के अंत में जब आसुरी शक्तियों का चारों तरफ बोलबाला हो गया तब पृथ्वी से यह सब सहा नहीं गया। वह देवों के साथ जाकर ब्रम्हा जी को अपना दुखडा सुनाया। ब्रम्हादि देवता क्षीरसागर के तट पर भगवान को पुकारने लगे। उसी समय आकाशवाणी हुई कि कुछ ही समय में देवकी और वसुदेव के यहां अवतार लेकर तुम्हारे सारे कष्टों का निवारण करुंगा। यह सुनकर सारे देवता भगवान की स्तुति करने लगे। यहां मथुरा में देवकी वसुदेव का विवाह हुआ। कंश ने सोने के रथ हजारों दास दासिया दिया जिस रथ पर देवकी वसुदेव बैठे थे उसी का संचालन स्वयं कंस कर रहा था।
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उसी समय आकाशवाणी हुई कि रे कंस जिस देवकी को इतनी प्रेम से विदाई कर रहा उसी की आठवीं संतान तेरा वध करेगी। यह सुनकर कंस आग-बबूल हो गया और कहा न रहेगी देवकी न होगी आठवीं संतान। यह कहकर देवकी की चोटी पकड़कर मथुरा की सडकों पर घसीटते हुए मारना चाहा, तब वसुदेव ने कंस से कहा देवकी तो आपके मृत्यु का कारण नहीं है। मैं देवकी के सभी संतानों को आपके हवाले कर दूंगा, इस पर कंस मान गया। प्रथम बालक का जन्म हुआ। वसुदेव ने उसे कंस को दे दिया। कंस ने कहा मेरा काल आठवां है, उसे लाइएगा। इस पर नारद ने जाकर उल्टा-सीधा पढ़ा दिया। कंस ने एक-एक कर छह संतानों की हत्या कर दी। आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर सारे दुष्टों का संहार कर दिया। इस दौरान गंगाप्रसाद शुक्ल अमरनाथ शुक्ल अखिलेश नागेंद्र यादव प्रो ओमप्रकाश शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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