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लाल निशान से ऊपर घाघरा की लहरें
देवरिया
Updated Thu, 21 Jul 2016 10:33 PM IST
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जमुआर नाले की पानी में डूबा किसानों का फसलें।
- फोटो : अमर उजाला
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सलेमपुर। घाघरा और छोटी गंडक नदी का लगातार जलस्तर बढ़ने से लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। स्वचलित फाटक से पानी का रिसाव हो रहा है। इससे घाघरा नदी की पानी से जमुआर नाला उफान पर आ गया है।
इससे 100 एकड़ से अधिक किसानों की फसल पानी में डूब गई हैं। इसके अलावा लार के रतनपुरा गांव के समीप बंधे से पानी का रिसाव हो रहा था, जिसे बंद कराया गया। घाघरा नदी खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर बह रही है। घाघरा नदी के किनारे बसे गांव देवसिया के समीप बाढ़ विभाग के तरफ से स्वचलित फाटक लगाया गया है।
नदी में पानी भरने पर वह बंद हो जाता है और जमुआर नाले में पानी बढ़ने पर खुल जाता है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण इस वर्ष फाटक के पास सफाई नहीं कराया गया। इसके चलते फाटक पूर्ण रूप से बंद नहीं हो पा रहा है।
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इसके चलते घाघरा नदी का पानी जमुआर नाले में जा रहा है। जमुआर नाला भरने से तेलियां कला, अकुबा, मईल, नरियाव, बलहा, पिपरा पाठक, पिपरा बांध समेत 24 किसानों की करीब 100 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई हैं। शिकायत पर पहुंचे बाढ़ विभाग के जेई स्वचलित फाटक को ठीक कराने का प्रयास किया। बावजूद इसके पूरी तरह फाटक बंद नहीं हुआ।
जेई की मानें तो स्वचलित फाटक से हल्का पानी का रिसाव होता है। इससे तटवर्ती गांव के लोगों में दहशत है। वहीं छोटी गंडक नदी के गढ़वा-परासी चकलाल बंधे का निरीक्षण जेई ने किया। रतनपुरा गांव के समीप हो रहे बंधे से रिसाव को ठीक कराया। तुर्तीपार स्थित केन्द्रीय जल आयोग के पैमाने के अनुसार घाघरा नदी खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इस बाबत बाढ़ विभाग के जेई पीपी आनंद ने बताया कि रतनपुरा गांव के समीप पानी का रिसाव हो रहा था। उसे ठीक कराया गया।
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इससे 100 एकड़ से अधिक किसानों की फसल पानी में डूब गई हैं। इसके अलावा लार के रतनपुरा गांव के समीप बंधे से पानी का रिसाव हो रहा था, जिसे बंद कराया गया। घाघरा नदी खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर बह रही है। घाघरा नदी के किनारे बसे गांव देवसिया के समीप बाढ़ विभाग के तरफ से स्वचलित फाटक लगाया गया है।
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नदी में पानी भरने पर वह बंद हो जाता है और जमुआर नाले में पानी बढ़ने पर खुल जाता है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण इस वर्ष फाटक के पास सफाई नहीं कराया गया। इसके चलते फाटक पूर्ण रूप से बंद नहीं हो पा रहा है।
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इसके चलते घाघरा नदी का पानी जमुआर नाले में जा रहा है। जमुआर नाला भरने से तेलियां कला, अकुबा, मईल, नरियाव, बलहा, पिपरा पाठक, पिपरा बांध समेत 24 किसानों की करीब 100 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई हैं। शिकायत पर पहुंचे बाढ़ विभाग के जेई स्वचलित फाटक को ठीक कराने का प्रयास किया। बावजूद इसके पूरी तरह फाटक बंद नहीं हुआ।
जेई की मानें तो स्वचलित फाटक से हल्का पानी का रिसाव होता है। इससे तटवर्ती गांव के लोगों में दहशत है। वहीं छोटी गंडक नदी के गढ़वा-परासी चकलाल बंधे का निरीक्षण जेई ने किया। रतनपुरा गांव के समीप हो रहे बंधे से रिसाव को ठीक कराया। तुर्तीपार स्थित केन्द्रीय जल आयोग के पैमाने के अनुसार घाघरा नदी खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इस बाबत बाढ़ विभाग के जेई पीपी आनंद ने बताया कि रतनपुरा गांव के समीप पानी का रिसाव हो रहा था। उसे ठीक कराया गया।