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Deoria News: अभी एक साल और झेलनी होगी जलभराव की मुसीबत
Tue, 28 Mar 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 28 Mar 2023 11:51 PM IST
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शहर में बनने वाले 8.8 किमी बड़े नाले का निर्माण अभी आधा भी नहीं हुआ है, लोगों का इंतजार और बढ़ा
सुस्त निर्माण और घटिया निर्माण सामग्री से तीन बार ढह चुका है नाला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर को जल भराव से निजात दिलाने के लिए करीबन 8.8 किलोमीटर का बड़े नाले का निर्माण किया जा रहा है। करीब 44 करोड़ की लागत से बनने वाला यह नाला हल्की बरसात में तीन बार गिर चुका है। जांच के पेंच में भी फंसता नजर आ रहा है। नाला निर्माण से शहरवासियों को काफी उम्मीद थी कि अगले साल तक शहर को जल भराव से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन इसकी सुस्त रफ्तार और घटिया निर्माण से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब इसके निर्माण के लिए लोगों का इंतजार करना पड़ेगा।
शहर के कुर्ना नाले के पास से स्टार्म वाटर ड्रेनेज परियोजना के तहत बड़े नाले का निर्माण किया जा रहा है। इस नाले से शहर के जल भराव की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी, पर निर्माण गति ऐसी है कि एक साल का समय नजदीक है, लेकिन महज दो किलोमीटर तक ही नाले का आधा-अधूरा निर्माण हो पाया है। जबकि बाकी बचे सात किलोमीटर नाला का निर्माण 2024 तक होना है। वहीं दूसरी तरफ नाला निर्माण को लेकर शासन स्तर से बैठी जांच के कारण लापरवाह अफसरों की कलई भी खुलने लगी है। कार्रवाई के दायरे में इंजीनियर आए हैं। इसके डिजाइन को लेकर सवाल खड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में डिजाइन में भी परिवर्तन हो सकता है। इससे एक बात साफ है कि बड़े नाले के लिए लोगों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। अब डेढ़ माह बाद बरसात भी शुरू हो जाएगा, इससे काम प्रभावित हो जाएगा।
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शहर के बड़े नाला निर्माण में अनियमितता, दो अधिशासी अभियंताओं सहित सात पर लटकी कार्रवाई की तलवार
देवरिया। बड़े नाला के निर्माण में जांच के दौरान अनियमितता की पुष्टि हुई है। गोरखपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता की टीम ने डिजाइन और मैटेरियल्स को गलत बताया है। इस मामले में जिलाधिकारी ने जल निगम के दो अधिशासी अभियंता व पांच अन्य के खिलाफ शासन में कार्रवाई के लिए लिखा है।
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शहर के खोराराम स्थित कुर्ना नाले से करीब 8.8 किलोमीटर का नाला निर्माण का कार्य अप्रैल 2022 में शुरू हुआ था। इस नाले से शहर को जल भराव से मुक्ति मिलने के लिए बनाया जा रहा है। शहर की करीब साढ़े चार लाख आबादी को जल भराव से मुक्ति दिलाने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट की घोषणा 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद आगमन पर किया था। हालत यह है कि नाले की दीवार बरसात के मौसम में अगस्त और सितंबर माह में करीब चार जगहों पर गिर गई। इससे नाला निर्माण पर सवाल खड़ा हो गया। जिस नाला को सीधे बनना था वह सांप की तरह टेढ़ा-मेढ़ा बना दिया गया। पूरे मामले की शिकायत शासन स्तर पर पहुंची तो एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार, गोरखपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को जांच करने का निर्देश दिया गया। टीम ने जनवरी माह में मौके का निरीक्षण कर डिजाइन और मैटेरियल आदि के बारे में जानकारी ली। मैटेरियल और डिजाइन की जांच के लिए लखनऊ भेजा गया। टीम ने जांच रिपोर्ट में अनियमितता होने की पुष्टि की है। इसमें पाया गया है कि डिजाइन सही नहीं है और कार्य में लापरवाही बरती गई है। मामले में लापरवाही बरतने पर जल निगम के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार और तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार, जल निगम के एक एई और चार अभियंताओं के खिलाफ एडीएम की टीम ने शासन में कार्रवाई के लिए भेजा है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में बड़ी अनियमितता बरती गई है, क्योंकि हल्की बरसात में ही दीवार गिर गई तो इससे सवाल खड़ा हो रहा है। शहर से हर रोज निकलने वाला हजारों लीटर गंदा पानी यह नाला कैसे शह पाएगा।
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जांच बैठी तो दूसरे छोर से शुरू कर दिया काम
देवरिया। बड़े नाले का निर्माण कुर्ना नाले से शुरू होकर रामनाथ देवरिया चौराहे तक, यहां से नाले को दो भाग में बांट दिया गया है। एक रुद्रपुर मोड़ से होते हुए पुलिस लाइन तक पहुंचेगा तो दूसरा वन विभाग कालोनी होते हुए कचहरी चौराहे पर सिविल लाइन के नाले को जोड़ेगा, ताकि शहर को जल भराव से मुक्ति मिल सके। इस नाले का निर्माण कुर्ना नाले पास से रामनाथ देवरिया मोड़ तक शुरू किया गया था, लेकिन जब बरसात के दिन में नाले की दीवार गिर गई तो जांच बैठा दी गई। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने दूसरे छोर पुलिस लाइन के पास से काम शुरू कर दिया। सबसे गंभीर बात तो यह है कि कार्रवाई के लिए टीम ने अपनी रिपोर्ट भेज दी। इसी बीच फिर से पहले की तरह काम शुरू कर दिया गया है। इससे जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है।
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नाले से शहरवासियों को ये होगा फायदा
देवरिया। शहर में बरसात के दिनों में करीब दस ऐसे मोहल्ले हैं, जहां कमर भर पानी लग जाता है। इतना ही नहीं कलेक्ट्रेट परिसर, एसपी ऑफिस सहित कई सरकारी विभागों में पानी घुटने भर लगता है। यह समस्या करीब दो दशक से अधिक समय से चली आ रही है। हर बरसात में राघव नगर, सिविल लाइन, पुलिस लाइंस, रामनाथ देवरिया, उमानगर, न्यू काॅलोनी, ट्यूबवेल काॅलोनी आदि जगहों सहित शहर के मुख्य मार्गों पर जलभराव की समस्या से लोग जूझते हैं।
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नाला निर्माण एकदम गलत तरीके से हो रहा है। खुदाई बेतरतीब होने से सड़क और मकान दोनों टूट रही है। जब बरसात का पानी नहीं रोक पा रहा है तो लाखों लीटर पानी कैसे रोकेगा।
दिनेश कुमार, व्यापारी खोराराम रोड
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नाला निर्माण से बड़ी आस जगी है। अगर सही तरीके से इसका निर्माण हो तो शहर को जलभराव से निजात मिल जाएगी, क्योंकि जल भराव की समस्या शहर की काफी पुरानी है। निर्माण कार्य की अफसरों को गहनता से निगरानी करनी चाहिए।- शक्ति गुप्ता, जिलाध्यक्ष जिला उद्योग व्यापार मंडल
एक नजर
8.8 किलोमीटर नाला- 44.33 करोड़ लागत- मार्च 2024 तक काम पूरा हो जाना है- अप्रैल 2022 से काम शुरू होकर अभी तक डेढ़ किलोमीटर का काम हो पाया है
कोट
नाला निर्माण में मैटेरियल्स और डिजाइन में खामियां मिली हैं। दो अधिशासी अभियंता समेत सात के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। कार्यदायी संस्था ने नाला निर्माण में लापरवाही बरती है। कार्य रोकने का निर्देश अगर शासन स्तर से आता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस समय जो निर्माण हो रहा है उसका देखरेख जल निगम की दूसरी टीम कर रही है।
नागेंद्र कुमार सिंह, डीएम वित्त एवं राजस्व
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फोटो
शहर के नालों पर स्लैब रखने में लापरवाही, हादसे का खतरा
देवरिया। शहर के फोरलेन के किनारे बने बड़े नाले का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन स्लैब रखने में घोर लापरवाही बरती गई है। इसके कारण हादसे का भय बना रह रहा है। जबकि फोरलेन निर्माण के समय अनुबंध हुआ था कि नाला पर स्लैब सड़क निर्माण कराने वाली फर्म ही रखेगी। पर लापरवाही यह है कि जैसे-तैसे स्लैब रखकर छोड़ दिया गया है। शहर के सिविल लाइंस पर बने नाला का स्लैब लोगों के जान का खतरा बना हुआ है। अभी डेढ़ साल पहले विकास भवन गेट पर एक बच्ची की गिर कर मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद भी लापरवाह अफसर सुधि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते कई बाद बाइक सवार भी नाले में गिर जाते हैं।
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सुस्त निर्माण और घटिया निर्माण सामग्री से तीन बार ढह चुका है नाला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर को जल भराव से निजात दिलाने के लिए करीबन 8.8 किलोमीटर का बड़े नाले का निर्माण किया जा रहा है। करीब 44 करोड़ की लागत से बनने वाला यह नाला हल्की बरसात में तीन बार गिर चुका है। जांच के पेंच में भी फंसता नजर आ रहा है। नाला निर्माण से शहरवासियों को काफी उम्मीद थी कि अगले साल तक शहर को जल भराव से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन इसकी सुस्त रफ्तार और घटिया निर्माण से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब इसके निर्माण के लिए लोगों का इंतजार करना पड़ेगा।
शहर के कुर्ना नाले के पास से स्टार्म वाटर ड्रेनेज परियोजना के तहत बड़े नाले का निर्माण किया जा रहा है। इस नाले से शहर के जल भराव की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी, पर निर्माण गति ऐसी है कि एक साल का समय नजदीक है, लेकिन महज दो किलोमीटर तक ही नाले का आधा-अधूरा निर्माण हो पाया है। जबकि बाकी बचे सात किलोमीटर नाला का निर्माण 2024 तक होना है। वहीं दूसरी तरफ नाला निर्माण को लेकर शासन स्तर से बैठी जांच के कारण लापरवाह अफसरों की कलई भी खुलने लगी है। कार्रवाई के दायरे में इंजीनियर आए हैं। इसके डिजाइन को लेकर सवाल खड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में डिजाइन में भी परिवर्तन हो सकता है। इससे एक बात साफ है कि बड़े नाले के लिए लोगों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। अब डेढ़ माह बाद बरसात भी शुरू हो जाएगा, इससे काम प्रभावित हो जाएगा।
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शहर के बड़े नाला निर्माण में अनियमितता, दो अधिशासी अभियंताओं सहित सात पर लटकी कार्रवाई की तलवार
देवरिया। बड़े नाला के निर्माण में जांच के दौरान अनियमितता की पुष्टि हुई है। गोरखपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता की टीम ने डिजाइन और मैटेरियल्स को गलत बताया है। इस मामले में जिलाधिकारी ने जल निगम के दो अधिशासी अभियंता व पांच अन्य के खिलाफ शासन में कार्रवाई के लिए लिखा है।
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शहर के खोराराम स्थित कुर्ना नाले से करीब 8.8 किलोमीटर का नाला निर्माण का कार्य अप्रैल 2022 में शुरू हुआ था। इस नाले से शहर को जल भराव से मुक्ति मिलने के लिए बनाया जा रहा है। शहर की करीब साढ़े चार लाख आबादी को जल भराव से मुक्ति दिलाने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट की घोषणा 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद आगमन पर किया था। हालत यह है कि नाले की दीवार बरसात के मौसम में अगस्त और सितंबर माह में करीब चार जगहों पर गिर गई। इससे नाला निर्माण पर सवाल खड़ा हो गया। जिस नाला को सीधे बनना था वह सांप की तरह टेढ़ा-मेढ़ा बना दिया गया। पूरे मामले की शिकायत शासन स्तर पर पहुंची तो एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार, गोरखपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को जांच करने का निर्देश दिया गया। टीम ने जनवरी माह में मौके का निरीक्षण कर डिजाइन और मैटेरियल आदि के बारे में जानकारी ली। मैटेरियल और डिजाइन की जांच के लिए लखनऊ भेजा गया। टीम ने जांच रिपोर्ट में अनियमितता होने की पुष्टि की है। इसमें पाया गया है कि डिजाइन सही नहीं है और कार्य में लापरवाही बरती गई है। मामले में लापरवाही बरतने पर जल निगम के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार और तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार, जल निगम के एक एई और चार अभियंताओं के खिलाफ एडीएम की टीम ने शासन में कार्रवाई के लिए भेजा है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में बड़ी अनियमितता बरती गई है, क्योंकि हल्की बरसात में ही दीवार गिर गई तो इससे सवाल खड़ा हो रहा है। शहर से हर रोज निकलने वाला हजारों लीटर गंदा पानी यह नाला कैसे शह पाएगा।
जांच बैठी तो दूसरे छोर से शुरू कर दिया काम
देवरिया। बड़े नाले का निर्माण कुर्ना नाले से शुरू होकर रामनाथ देवरिया चौराहे तक, यहां से नाले को दो भाग में बांट दिया गया है। एक रुद्रपुर मोड़ से होते हुए पुलिस लाइन तक पहुंचेगा तो दूसरा वन विभाग कालोनी होते हुए कचहरी चौराहे पर सिविल लाइन के नाले को जोड़ेगा, ताकि शहर को जल भराव से मुक्ति मिल सके। इस नाले का निर्माण कुर्ना नाले पास से रामनाथ देवरिया मोड़ तक शुरू किया गया था, लेकिन जब बरसात के दिन में नाले की दीवार गिर गई तो जांच बैठा दी गई। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने दूसरे छोर पुलिस लाइन के पास से काम शुरू कर दिया। सबसे गंभीर बात तो यह है कि कार्रवाई के लिए टीम ने अपनी रिपोर्ट भेज दी। इसी बीच फिर से पहले की तरह काम शुरू कर दिया गया है। इससे जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है।
नाले से शहरवासियों को ये होगा फायदा
देवरिया। शहर में बरसात के दिनों में करीब दस ऐसे मोहल्ले हैं, जहां कमर भर पानी लग जाता है। इतना ही नहीं कलेक्ट्रेट परिसर, एसपी ऑफिस सहित कई सरकारी विभागों में पानी घुटने भर लगता है। यह समस्या करीब दो दशक से अधिक समय से चली आ रही है। हर बरसात में राघव नगर, सिविल लाइन, पुलिस लाइंस, रामनाथ देवरिया, उमानगर, न्यू काॅलोनी, ट्यूबवेल काॅलोनी आदि जगहों सहित शहर के मुख्य मार्गों पर जलभराव की समस्या से लोग जूझते हैं।
नाला निर्माण एकदम गलत तरीके से हो रहा है। खुदाई बेतरतीब होने से सड़क और मकान दोनों टूट रही है। जब बरसात का पानी नहीं रोक पा रहा है तो लाखों लीटर पानी कैसे रोकेगा।
दिनेश कुमार, व्यापारी खोराराम रोड
नाला निर्माण से बड़ी आस जगी है। अगर सही तरीके से इसका निर्माण हो तो शहर को जलभराव से निजात मिल जाएगी, क्योंकि जल भराव की समस्या शहर की काफी पुरानी है। निर्माण कार्य की अफसरों को गहनता से निगरानी करनी चाहिए।- शक्ति गुप्ता, जिलाध्यक्ष जिला उद्योग व्यापार मंडल
एक नजर
8.8 किलोमीटर नाला- 44.33 करोड़ लागत- मार्च 2024 तक काम पूरा हो जाना है- अप्रैल 2022 से काम शुरू होकर अभी तक डेढ़ किलोमीटर का काम हो पाया है
कोट
नाला निर्माण में मैटेरियल्स और डिजाइन में खामियां मिली हैं। दो अधिशासी अभियंता समेत सात के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। कार्यदायी संस्था ने नाला निर्माण में लापरवाही बरती है। कार्य रोकने का निर्देश अगर शासन स्तर से आता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस समय जो निर्माण हो रहा है उसका देखरेख जल निगम की दूसरी टीम कर रही है।
नागेंद्र कुमार सिंह, डीएम वित्त एवं राजस्व
फोटो
शहर के नालों पर स्लैब रखने में लापरवाही, हादसे का खतरा
देवरिया। शहर के फोरलेन के किनारे बने बड़े नाले का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन स्लैब रखने में घोर लापरवाही बरती गई है। इसके कारण हादसे का भय बना रह रहा है। जबकि फोरलेन निर्माण के समय अनुबंध हुआ था कि नाला पर स्लैब सड़क निर्माण कराने वाली फर्म ही रखेगी। पर लापरवाही यह है कि जैसे-तैसे स्लैब रखकर छोड़ दिया गया है। शहर के सिविल लाइंस पर बने नाला का स्लैब लोगों के जान का खतरा बना हुआ है। अभी डेढ़ साल पहले विकास भवन गेट पर एक बच्ची की गिर कर मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद भी लापरवाह अफसर सुधि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते कई बाद बाइक सवार भी नाले में गिर जाते हैं।