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मेडिकल कालेज में बर्बाद हो रहा पानी, ओपीडी में पीने को नहीं
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में पाइप फटने पानी हो रहा बर्बाद।
- फोटो : DEORIA
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मेडिकल कालेज में बर्बाद हो रहा पानी, ओपीडी में पीने को नहीं
देवरिया। एक तरफ सरकार बूंद-बूंद पानी बचाने का संदेश दे रही है, वहीं मेडिकल कॉलेज में बीस दिनों से पाइप लाइन फटने से पानी बर्बाद हो रहा है। ओपीडी में पेयजल की किल्लत है। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती गांवों के लोग इलाज कराने आते हैं। नए भवन में ओपीडी चल रही है। यहां मेडिसिन, मानसिक रोग, चेस्ट, दंत, नेत्र, नाक, कान, गला, चर्म रोग, सर्जरी, हड्डी रोग विभाग है। इन दिनों मरीजों की अस्पताल में भीड़ बढ़ गई। सभी विभागों में लंबी कतार लगी रहती है। लोगों को बारी आने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। उमस भरी गर्मी में प्यास लगने पर मरीजों तथा तीमारदारों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। कुछ लोगों का साथ लाए पानी से काम चल जाता है, लेकिन अधिकांश लोगों को पानी के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उन्हें पानी के लिए दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं कुछ लोग बाहर से पानी खरीद कर प्यास बुझाते हैं। कुछ लोग मजबूरी में परिसर में स्थित चापा नल का पानी पीते हैं। उधर चिकित्सक व कर्मचारियों को भी पानी खरीदना पड़ता है।
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अस्पताल आए रमेश, शकुंतला, वृद्धि प्रसाद आदि तीमारदारों का कहना है कि गर्मी लोग बेहाल हैं, इतने बड़े अस्पताल में पानी का इंतजाम नहीं है। इसके लिए वह जिम्मेदारों को कोस रहे थे।
उधर क्षय रोग क्लीनिक के बलगम जांच केंद्र में एनआरसी की तरफ से पानी की पाइप लाइन आई है। वह तकरीबन बीस दिन से जांच केंद्र के समीप फट गई है। चौबीस घंटे पानी की तेज बछौर निकलती, जिससे पानी बर्बाद हो रहा है। इधर से चिकित्सक, कर्मचारी, मरीज, तीमारदार सभी का आना जाना होता है, लेकिन जिम्मेदारों का इस तरफ ध्यान नहीं है और न ही पानी के बर्बादी की चिंता है।
तीन दिन में इतने आए मरीज
- अस्पताल में इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है। तीन दिन में 7190 लोगों ने इलाज कराया। मंगलवार को 2721, बुधवार को 2401, बृहस्पतिवार को 2068 मरीज अस्पताल पहुंचे थे।
एक मात्र वाटर कुलर, बीस दिन से खराब
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ओपीडी में मरीजों व तीमारदारों की सहूलियत के लिए मात्र एक वाटर कुलर लगा है। वह भी करीब बीस दिन से खराब पड़ा है। उमस भरी गर्मी में लोग प्यास बुझाने के लिए जाते हैं तो टोटी सूखी देख मायूस होकर लौटना पड़ता है। एक सप्ताह पहले प्राचार्य ने निरीक्षण के समय ठीक कराने का निर्देश दिया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है और लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल की ओपीडी में एक वाटर कुलर लगा है। उसमें गड़बड़ी आ गई है, जिसे ठीक करने का निर्देश दिया गया है। जल्द ही काम करने लगेगा। यहां आने वाले समय में कई स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। मरीजों व तीमारदारों के लिए इमरजेंसी के पास भी आरओ प्लांट लगा है। -डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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देवरिया। एक तरफ सरकार बूंद-बूंद पानी बचाने का संदेश दे रही है, वहीं मेडिकल कॉलेज में बीस दिनों से पाइप लाइन फटने से पानी बर्बाद हो रहा है। ओपीडी में पेयजल की किल्लत है। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती गांवों के लोग इलाज कराने आते हैं। नए भवन में ओपीडी चल रही है। यहां मेडिसिन, मानसिक रोग, चेस्ट, दंत, नेत्र, नाक, कान, गला, चर्म रोग, सर्जरी, हड्डी रोग विभाग है। इन दिनों मरीजों की अस्पताल में भीड़ बढ़ गई। सभी विभागों में लंबी कतार लगी रहती है। लोगों को बारी आने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। उमस भरी गर्मी में प्यास लगने पर मरीजों तथा तीमारदारों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। कुछ लोगों का साथ लाए पानी से काम चल जाता है, लेकिन अधिकांश लोगों को पानी के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उन्हें पानी के लिए दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं कुछ लोग बाहर से पानी खरीद कर प्यास बुझाते हैं। कुछ लोग मजबूरी में परिसर में स्थित चापा नल का पानी पीते हैं। उधर चिकित्सक व कर्मचारियों को भी पानी खरीदना पड़ता है।
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अस्पताल आए रमेश, शकुंतला, वृद्धि प्रसाद आदि तीमारदारों का कहना है कि गर्मी लोग बेहाल हैं, इतने बड़े अस्पताल में पानी का इंतजाम नहीं है। इसके लिए वह जिम्मेदारों को कोस रहे थे।
उधर क्षय रोग क्लीनिक के बलगम जांच केंद्र में एनआरसी की तरफ से पानी की पाइप लाइन आई है। वह तकरीबन बीस दिन से जांच केंद्र के समीप फट गई है। चौबीस घंटे पानी की तेज बछौर निकलती, जिससे पानी बर्बाद हो रहा है। इधर से चिकित्सक, कर्मचारी, मरीज, तीमारदार सभी का आना जाना होता है, लेकिन जिम्मेदारों का इस तरफ ध्यान नहीं है और न ही पानी के बर्बादी की चिंता है।
तीन दिन में इतने आए मरीज
- अस्पताल में इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है। तीन दिन में 7190 लोगों ने इलाज कराया। मंगलवार को 2721, बुधवार को 2401, बृहस्पतिवार को 2068 मरीज अस्पताल पहुंचे थे।
एक मात्र वाटर कुलर, बीस दिन से खराब
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ओपीडी में मरीजों व तीमारदारों की सहूलियत के लिए मात्र एक वाटर कुलर लगा है। वह भी करीब बीस दिन से खराब पड़ा है। उमस भरी गर्मी में लोग प्यास बुझाने के लिए जाते हैं तो टोटी सूखी देख मायूस होकर लौटना पड़ता है। एक सप्ताह पहले प्राचार्य ने निरीक्षण के समय ठीक कराने का निर्देश दिया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है और लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल की ओपीडी में एक वाटर कुलर लगा है। उसमें गड़बड़ी आ गई है, जिसे ठीक करने का निर्देश दिया गया है। जल्द ही काम करने लगेगा। यहां आने वाले समय में कई स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। मरीजों व तीमारदारों के लिए इमरजेंसी के पास भी आरओ प्लांट लगा है। -डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक