फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   Tricolor hoisted even after being shot on August 14

Deoria News: 14 अगस्त को गोली लगने के बाद भी फहराया तिरंगा

Tue, 13 Aug 2024 11:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Tue, 13 Aug 2024 11:29 PM IST
विज्ञापन
Tricolor hoisted even after being shot on August 14
बरहज मुख्य चौक ​​स्थित शहीद स्मारक   संवाद
-आजादी के दीवाने
विज्ञापन

-भीड़ के उग्र होने पर अंग्रेजों को हटना पड़ा था पीछे
सच्चिदानंद पांडेय
बरहज। 14 अगस्त को गोली लगने के बाद भी आजादी के दीवाने पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने नगर स्थित मुख्य चौराहे पर तिरंगा झंडा फहराया था। गोली लगने से उनके शहीद होने के बाद भीड़ उग्र हो गई तो अंग्रेजी सेना को पीछे हटना पड़ा। आजादी के दोनों दीवानों की शहादत चिरस्मरणीय है।
14 अगस्त 1942 को मुख्य चौक पर कुरह परसियां गांव निवासी पंडित विश्वनाथ मिश्र और बरौली के जगन्नाथ मल्ल के नेतृत्व में नगर सहित आसपास के गांवों के हजारों लोगों की भीड़ थी। अंग्रेजी सेना भी मोर्चा संभाले हुए थी। दोनों दीवाने तिरंगा लिए भीड़ के साथ चल रहे थे। अंग्रेजों ने विरोध किया। अंग्रेज ऑफिसर कैप्टन मूर ने दोनों नायकों को गोली मार दी, लेकिन इसके बाद भी उनके कदम नहीं रुके, दोनों आगे बढ़ते रहे। पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल ने तिरंगे को झुकने नहीं दिया।
विज्ञापन

वंदे मातरम् और भारत माता की जय का नारा लगाते हुए मुख्य चौक पर तिरंगा फहराकर उन्होंने नगर क्षेत्र को आजाद घोषित कर दिया। दोनों सदा के लिए भारत माता की गोद में सो गए। बताया जाता है कि दोनों शहीदों को जमीन पर पड़ा देख भीड़ उग्र हो गई, जिससे कैप्टन मूर और अंग्रेजी सेना को भागना पड़ा। शहीद पंडित मिश्र के परिजनों के अनुसार शहीद विश्वनाथ मिश्र पर रामधारी सिंह दिनकर की कविता आज कलम उनकी जय बोल का गहरा प्रभाव पड़ा था, जिससे प्रभावित होकर 25 वर्ष की उम्र में वह आजादी के आंदोलन में कूद पड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------
शहादत पर तनिक भी विचलित नहीं हुई थीं पत्नी
सरयू में विलीन कुरह परसियां गांव निवासी पंडित विश्वनाथ मिश्र की शहादत पर उनकी पत्नी सरस्वती देवी तनिक भी विचलित नहीं हुई थीं। शादी के दो वर्ष बाद देश सेवा में पति को खो देने का उन्हें जरा भी मलाल नहीं था। कुछ वर्ष बाद उनकी भी मौत हो गई। विश्वनाथ मिश्र की शादी मरवटिया राजा गांव निवासी सरयू चौबे की पुत्री सरस्वती से हुई थी। उनका परिवार आज भी नई बस्ती के खाली टोला में निवास करता है। मोहल्ले के बुजुर्गों का कहना है कि देश की आजादी में पंडित विश्वनाथ मिश्र का अहम योगदान है, लेकिन आजादी के बाद पांच हजार के आबादी वाले गांव को नदी के शॉप से नहीं बचाया जा सका। लोगों को यह बात आज भी सालती है।

--------
शहीदों की याद में दीपदान कार्यक्रम आज
प्रत्येक वर्ष की भांति नगर के मुख्य चौक स्थित शहीद पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल की स्मृति में बुधवार को दीपदान कार्यक्रम आयोजित किया गया है। संयोजक अनिल निषाद और उनके छोटे भाई सुधीर निषाद ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी शाम को कार्यक्रम नियत है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है। बताया जा रहा है कि अमर उजाला की पहल पर दोनों भाई 2007 से शहीदों की याद में दीपदान कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जिस पर समाचार पत्र की ओर से पूर्व में परिशिष्ट भी जारी किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed