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Deoria News: टीएमटी की सुविधा नहीं, मरीज बाहर करा रहे दिल की जांच

Tue, 28 Jan 2025 02:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Tue, 28 Jan 2025 02:05 AM IST
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There is no facility of TMT, patients are getting their heart checked outside
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में ट्रेड मिल टेस्ट (टीएमटी) की सुविधा नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल तेज चलने, सीढ़ी चढ़ने से सांस फूलने पर इस जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। इन दिनों यह समस्या लेकर मरीज आ रहे हैं। रोजाना करीब आठ से दस मरीजों को करानी पड़ती है। उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ती है, जिससे मरीजों को कीमत चुकानी पड़ती है। इस जांच के होने से हर्ट की दिक्कत का पता करने में आसानी होगी। पारा गिरने से ठंड बढ़ी है। इसका लोगों के सेहत पर असर पड़ रहा है। अनियमित दिनचर्या व थोड़ी सी लापरवाही से बीपी, शुगर के मरीजों को परेशानी होती है। बीपी बढ़ जाता है। ऐसे मरीज जिनका बीपी बढ़ा और घटता है उन्हें हर्ट अटैक व फाजिल की संभावना बढ़ जाती है। वहीं सीढ़ी चढ़ने, पैदल तेज चलने पर सांस फूलने और मेहनत का काम करने पर जल्द थकान व सांस फूलती है और आराम करने पर राहत मिली है।
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इस तरह की परेशानी हर्ट के दिक्कत का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। ईसीजी जांच कराने पर रिपोर्ट नार्मल आती है। इसके बाद इन मरीजों को मेडिकल कॉलेज में ट्रेड मिल टेस्ट (टीएमटी) की जरूरत होती है। इसमें मरीज को मशीन पर करीब डेढ़ मील चलाया जाता है। इसके बाद ईसीजी जांच की जाती है। टीएमटी जांच से मरीज के दिल की धड़कन और सांस की निगरानी की जाती है।
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इससे हार्ट की मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन, पंप करने की क्षमता और कोरोनरी धमनी रोग के लक्षणों का पता चल जाता है। जांच में हर्ट के दिक्कत से संबंधित लक्षण होने पर पकड़ में आ जाता है, जिससे समय रहते डायग्नोसिस हो जाती है और बीमारी के अनुसार दवा चलती है। ठंड में मौसम में संख्या बढ़ जाती है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में करीब तीन सौ से अधिक मरीज आते हैं। इसमें आठ से दस लोग इस तरह की शिकायत लेकर लोग पहुंचते हैं। अस्पताल में ईसीजी की निशुल्क सुविधा है, लेकिन इसमें रिपोर्ट नार्मल आने पर डॉक्टर जरूरत महसूस होने पर टीएमटी जांच कराने की सलाह देते हैं, लेकिन यहां सुविधा न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ रही है, जहां करीब डेढ़ से दाे हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे मरीजों के तीमारदारों का समय बर्बाद होता है और आर्थिक बोझ पड़ता है। अस्पताल में सुविधा होने से मरीजों को काफी सहूलियत होती।
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