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Deoria News: दो राजस्व कर्मियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
Thu, 15 Jan 2026 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 15 Jan 2026 12:12 AM IST
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देवरिया। मजार प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जिले में दिन भर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। राजस्व कर्मचारियों के बीच इस प्राथमिकी को लेकर अनेक प्रकार की चर्चाएं होती रहीं। वहीं मजार की जमीन पर नाम दर्ज करने में अहम भूमिका निभाने वाले राजस्व कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दोनों इस प्रकरण में अपनी भूमिका से इन्कार कर रहे हैं।
गोरखपुर रोड पर ओवरब्रिज के बगल में कुर्ना नाला के किनारे स्थित हजरत शहीद अब्दुल गनी शाह मजार के नाम से सरकारी बंजर जमीन के नामांतरण मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को इस प्रकरण में सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
इसमें आरोपी बनाए गए तत्कालीन लेखपाल रामानुज सिंह और रजिस्ट्रार कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसमें रामानुज सिंह करीब 16 वर्ष पहले और राधेश्याम उपाध्याय 10 वर्ष से अधिक समय पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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वक्फ बोर्ड का आया था आदेश : रामानुज सिंह ने बताया कि 1992 में एक आदेश वक्फ बोर्ड से आया था, जो नायब नाजिर से होते हुए रजिस्ट्रार कानूनगो तक पहुंचा।
इसके बाद नाम दर्ज किया गया। इसमें मैंने सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश का अनुपालन किया। अधिकारी के आदेश के बाद सही गलत का निर्णय लेने का अधिकारी मेरे पास नहीं होता था।
ऊपर के अधिकारियों को बचाने के लिए हमारे ऊपर कार्रवाई की गई है। जो परवाना आया था, उसकी पड़ताल करनी चाहिए थी कि कहां से और कैसे आया।
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गोरखपुर रोड पर ओवरब्रिज के बगल में कुर्ना नाला के किनारे स्थित हजरत शहीद अब्दुल गनी शाह मजार के नाम से सरकारी बंजर जमीन के नामांतरण मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को इस प्रकरण में सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
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इसमें आरोपी बनाए गए तत्कालीन लेखपाल रामानुज सिंह और रजिस्ट्रार कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसमें रामानुज सिंह करीब 16 वर्ष पहले और राधेश्याम उपाध्याय 10 वर्ष से अधिक समय पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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वक्फ बोर्ड का आया था आदेश : रामानुज सिंह ने बताया कि 1992 में एक आदेश वक्फ बोर्ड से आया था, जो नायब नाजिर से होते हुए रजिस्ट्रार कानूनगो तक पहुंचा।
इसके बाद नाम दर्ज किया गया। इसमें मैंने सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश का अनुपालन किया। अधिकारी के आदेश के बाद सही गलत का निर्णय लेने का अधिकारी मेरे पास नहीं होता था।
ऊपर के अधिकारियों को बचाने के लिए हमारे ऊपर कार्रवाई की गई है। जो परवाना आया था, उसकी पड़ताल करनी चाहिए थी कि कहां से और कैसे आया।