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स्वतंत्रता का संघर्ष राजनीतिक नहीं स्वजागरण का : राजशरण
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शरण शाही ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि स्व जागरण का संघर्ष था। भारत की भाषाओं को शिक्षा में, संस्कृति, संस्कारों को लोकतंत्र में और प्रतीकों और प्रतिमानों को व्यवस्था में शामिल करने का संघर्ष था। स्वतंत्रता के बाद देश में शिक्षा के पुर्नजागरण की दिशा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कार्य किया और कार्य प्रणाली से साबित किया कि छात्र शक्ति-राष्ट्र शक्ति है।
डॉ शाही ने कहा कि स्वतंत्रता के समय डॉ राम प्रसाद विस्मिल, बाबू बंधू सिंह जैसे नायक स्वतंत्रता की प्रत्यक्ष लड़ाई लड़ रहे थे तो पंडिता महामना मदन मोहन मालवीय और महंत दिग्विजयनाथ स्वतंत्र भारत के पुर्नजागरण का सपना बुन रहे थे। देश स्वतंत्र होगा तो आगे कैसे बढ़ेगा, राष्ट्रवादी शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया।
यही वजह है कि देश में विद्या पीठ की स्थापना हुई और देश का पहला सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर में खुला। कहा कि परिषद के कार्य शुचिता और साधना का परिणाम है कि समाज के सामने एक प्रतिमान स्थापित किया। परिषद की सोच समस्या खड़ा करना नहीं बल्कि समाधान है। यही कारण है कि कार्यकर्ताओं ने नागरिक भूमिका का निर्वहन किया।
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नव निर्वाचित अध्यक्ष व महामंत्री ने किया पदभार ग्रहण : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन के शुभारंभ के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शरण शाही ने कार्यकारिणी को भंग किया। इसके बाद परिषद के विशेष आमंत्रित सदस्य एवं चुनाव अधिकारी डॉ प्रशांत साठे ने पूर्व में घोषित नई कार्यकारिणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शरण शाही और महामंत्री वीरेंद्र सोलंकी को पदभार ग्रहण कराया।
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गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शरण शाही ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि स्व जागरण का संघर्ष था। भारत की भाषाओं को शिक्षा में, संस्कृति, संस्कारों को लोकतंत्र में और प्रतीकों और प्रतिमानों को व्यवस्था में शामिल करने का संघर्ष था। स्वतंत्रता के बाद देश में शिक्षा के पुर्नजागरण की दिशा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कार्य किया और कार्य प्रणाली से साबित किया कि छात्र शक्ति-राष्ट्र शक्ति है।
डॉ शाही ने कहा कि स्वतंत्रता के समय डॉ राम प्रसाद विस्मिल, बाबू बंधू सिंह जैसे नायक स्वतंत्रता की प्रत्यक्ष लड़ाई लड़ रहे थे तो पंडिता महामना मदन मोहन मालवीय और महंत दिग्विजयनाथ स्वतंत्र भारत के पुर्नजागरण का सपना बुन रहे थे। देश स्वतंत्र होगा तो आगे कैसे बढ़ेगा, राष्ट्रवादी शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया।
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यही वजह है कि देश में विद्या पीठ की स्थापना हुई और देश का पहला सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर में खुला। कहा कि परिषद के कार्य शुचिता और साधना का परिणाम है कि समाज के सामने एक प्रतिमान स्थापित किया। परिषद की सोच समस्या खड़ा करना नहीं बल्कि समाधान है। यही कारण है कि कार्यकर्ताओं ने नागरिक भूमिका का निर्वहन किया।
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नव निर्वाचित अध्यक्ष व महामंत्री ने किया पदभार ग्रहण : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन के शुभारंभ के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शरण शाही ने कार्यकारिणी को भंग किया। इसके बाद परिषद के विशेष आमंत्रित सदस्य एवं चुनाव अधिकारी डॉ प्रशांत साठे ने पूर्व में घोषित नई कार्यकारिणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शरण शाही और महामंत्री वीरेंद्र सोलंकी को पदभार ग्रहण कराया।