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Deoria News: कामदेव और श्रीकृष्ण की कथा सुनाई गई
Tue, 28 Oct 2025 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 28 Oct 2025 12:48 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सदर ब्लॉक के अहीर परसिया गांव में श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन कामदेव और श्रीकृष्ण की कथा हुई। कथा सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा का रसपान कराते हुए कथाव्यास डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहाकि शुद्ध जीव का ब्रम्ह के साथ विलास ही रास है। उन्होंने कहाकि जब इंद्रादि देवताओं का भगवान श्रीकृष्ण ने पराभव कर दिया तो कामदेव का अभिमान जाग उठा। वह अपने को सबसे बड़ा मानने लगा और एक दिन श्रीकृष्ण के पास आकर कहाकि आप हमसे युद्ध कर लीजिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहाकि एकबार तो शिवजी से लड़ने गया, तो तुम अनंग हो गए। अब क्या लड़ने आए हो। इस पर कामदेव ने कहाकि उस समय शंकर जी समाधि अवस्था में थे, इसलिए भस्म हो गया। आप तो कुछ नियमों का पालन करते नहीं, अब आप गोपियों के साथ आलिंगन बद्ध होइए मैं अपना काम बाण चलाऊंगा। अगर आप जीते तो आप जगत के ईश्वर, हारे तो मैं। भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव की चुनौती स्वीकार कर शरद पूर्णिमा की रात्रि में गोपियों के साथ रास नृत्य प्रारम्भ कर दिया। कामदेव ने अपना वाण चलाना प्रारम्भ कर दिया और अंत में पराजित हो गया। श्रीकृष्ण के अंदर काम सुख था ही नहीं, इसलिए गोपियों के अंदर जो काम था वह मर गया। उस समय जो गोपियां थीं वह पूर्व जन्म के ऋषी मुनि योगी जती थे। जब सारे महात्मा पूर्व जन्म में तपस्या करते करते थक हार गए, फिर भी उनका काम नहीं मरा। तो ऋषियों मुनियों का चोला उतार कर गोपी बनकर अपना कामार्पण श्रीकृष्ण को अर्पण करने हेतु गोपी बनकर आये भगवान ने सभी गोपियों को अपने जैसा बना दिए। कामदेव ने अंत शरणागति स्वीकार कर ली।
इस अवसर पर केशव तिवारी रविप्रकाश मिश्र अनिल मिश्र राधारमन मिश्र प्रीतम मिश्र एस डी एम अवधेश निगम आदि श्रोताओं ने कथा का रसपान किए ।
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देवरिया। सदर ब्लॉक के अहीर परसिया गांव में श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन कामदेव और श्रीकृष्ण की कथा हुई। कथा सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा का रसपान कराते हुए कथाव्यास डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहाकि शुद्ध जीव का ब्रम्ह के साथ विलास ही रास है। उन्होंने कहाकि जब इंद्रादि देवताओं का भगवान श्रीकृष्ण ने पराभव कर दिया तो कामदेव का अभिमान जाग उठा। वह अपने को सबसे बड़ा मानने लगा और एक दिन श्रीकृष्ण के पास आकर कहाकि आप हमसे युद्ध कर लीजिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहाकि एकबार तो शिवजी से लड़ने गया, तो तुम अनंग हो गए। अब क्या लड़ने आए हो। इस पर कामदेव ने कहाकि उस समय शंकर जी समाधि अवस्था में थे, इसलिए भस्म हो गया। आप तो कुछ नियमों का पालन करते नहीं, अब आप गोपियों के साथ आलिंगन बद्ध होइए मैं अपना काम बाण चलाऊंगा। अगर आप जीते तो आप जगत के ईश्वर, हारे तो मैं। भगवान श्रीकृष्ण ने कामदेव की चुनौती स्वीकार कर शरद पूर्णिमा की रात्रि में गोपियों के साथ रास नृत्य प्रारम्भ कर दिया। कामदेव ने अपना वाण चलाना प्रारम्भ कर दिया और अंत में पराजित हो गया। श्रीकृष्ण के अंदर काम सुख था ही नहीं, इसलिए गोपियों के अंदर जो काम था वह मर गया। उस समय जो गोपियां थीं वह पूर्व जन्म के ऋषी मुनि योगी जती थे। जब सारे महात्मा पूर्व जन्म में तपस्या करते करते थक हार गए, फिर भी उनका काम नहीं मरा। तो ऋषियों मुनियों का चोला उतार कर गोपी बनकर अपना कामार्पण श्रीकृष्ण को अर्पण करने हेतु गोपी बनकर आये भगवान ने सभी गोपियों को अपने जैसा बना दिए। कामदेव ने अंत शरणागति स्वीकार कर ली।
इस अवसर पर केशव तिवारी रविप्रकाश मिश्र अनिल मिश्र राधारमन मिश्र प्रीतम मिश्र एस डी एम अवधेश निगम आदि श्रोताओं ने कथा का रसपान किए ।