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नगरपालिका को ‘अपने’ ही लगा रहे टैक्स में चूना
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नगरपालिका को ‘अपने’ ही लगा रहे टैक्स में चूना
देवरिया। नगर पालिका में राजस्व निरीक्षकों का हस्ताक्षर स्कैन कर भवनों का नामांतरण और स्वकर निर्धारण करने का खेल कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है। इसके कारण मनमर्जी टैक्स जमाकर नगर पालिका को हर माह लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
हस्ताक्षर स्कैन करने का मामला पकड़े जाने पर निरीक्षक ने इसकी शिकायत आला अफसरों से की है। इस पर ईओ ने जांच कमेटी बैठा दी है। प्रबल संभावना है कि जांच का दायरा आगे बढ़ा तो कई मामलों का खुलासा हो सकता है।
नगर पालिका परिषद के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से हाउस टैक्स व नामांतरण का खेल होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे ही एक मामले की शिकायत आला अफसरों के पास पहुंची तो उन्होंने जांच करने के लिए एक कमेटी बना दी है।
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राजस्व निरीक्षक दीपक पति तिवारी ने नगर पालिका अध्यक्ष, अपर जिलधिकारी प्रशासन को पत्र देकर बताया है कि वार्ड नंबर दस रामगुलाम टोला पूर्वी के एक व्यक्ति के भवन की मूल पत्रवाली नामांतरण के प्रक्रिया के तहत लंबित थी। इसके संबंध में ईओ ने विभागीय आख्या के लिए निर्देश दिया था। इस पत्रवाली में बिना दिनांक के नोट सीट के कर निर्धारण कर दिया गया है। जांच के दौरान हस्ताक्षर स्कैन करके बनाया गया है। जिसके आधार पर पत्रावली का निस्तारण कर दिया गया।
उन्होंने आशंका जताई है कि शहर के कई वार्डों में पटल पर मौजूद कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा कार्य किया जा रहा है, जिससे कर निर्धारण में बड़ी चूक होने से नगर पालिका परिषद को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नगर पालिका के सूत्रों के मुताबिक, नामांतरण और कर निर्धारण प्रक्रिया में बड़ा गोलमाल हो रहा है। हाल यह है कि विभागीय मिलीभगत से हजारों रुपये का टैक्स कब मामूली रकम में सिमट जाए और कब पूरा टैक्स जमा करने वाला बकाएदार बन जाए, यह कहा नहीं जा सकता है। फर्जी दस्तावेज के जरिये नामांतरण और कर माफ करने का काम किया जा रहा है। यहां तक आनलाइन व्यवस्था होने के बाद कर निर्धारण और जमा करने का अधिकांश कार्य मैनुअल ही किया जा रहा है। इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कर्मचारी मैनुअल पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं।
राजस्व निरीक्षक का हस्ताक्षर स्कैन करने का मामला सामने आया है। उन्होंने गड़बड़ी होने की शिकायत की है। प्रकरण में जांज कमेटी बनाई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- रोहित सिंह, ईओ
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देवरिया। नगर पालिका में राजस्व निरीक्षकों का हस्ताक्षर स्कैन कर भवनों का नामांतरण और स्वकर निर्धारण करने का खेल कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है। इसके कारण मनमर्जी टैक्स जमाकर नगर पालिका को हर माह लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
हस्ताक्षर स्कैन करने का मामला पकड़े जाने पर निरीक्षक ने इसकी शिकायत आला अफसरों से की है। इस पर ईओ ने जांच कमेटी बैठा दी है। प्रबल संभावना है कि जांच का दायरा आगे बढ़ा तो कई मामलों का खुलासा हो सकता है।
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नगर पालिका परिषद के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से हाउस टैक्स व नामांतरण का खेल होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे ही एक मामले की शिकायत आला अफसरों के पास पहुंची तो उन्होंने जांच करने के लिए एक कमेटी बना दी है।
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राजस्व निरीक्षक दीपक पति तिवारी ने नगर पालिका अध्यक्ष, अपर जिलधिकारी प्रशासन को पत्र देकर बताया है कि वार्ड नंबर दस रामगुलाम टोला पूर्वी के एक व्यक्ति के भवन की मूल पत्रवाली नामांतरण के प्रक्रिया के तहत लंबित थी। इसके संबंध में ईओ ने विभागीय आख्या के लिए निर्देश दिया था। इस पत्रवाली में बिना दिनांक के नोट सीट के कर निर्धारण कर दिया गया है। जांच के दौरान हस्ताक्षर स्कैन करके बनाया गया है। जिसके आधार पर पत्रावली का निस्तारण कर दिया गया।
उन्होंने आशंका जताई है कि शहर के कई वार्डों में पटल पर मौजूद कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा कार्य किया जा रहा है, जिससे कर निर्धारण में बड़ी चूक होने से नगर पालिका परिषद को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नगर पालिका के सूत्रों के मुताबिक, नामांतरण और कर निर्धारण प्रक्रिया में बड़ा गोलमाल हो रहा है। हाल यह है कि विभागीय मिलीभगत से हजारों रुपये का टैक्स कब मामूली रकम में सिमट जाए और कब पूरा टैक्स जमा करने वाला बकाएदार बन जाए, यह कहा नहीं जा सकता है। फर्जी दस्तावेज के जरिये नामांतरण और कर माफ करने का काम किया जा रहा है। यहां तक आनलाइन व्यवस्था होने के बाद कर निर्धारण और जमा करने का अधिकांश कार्य मैनुअल ही किया जा रहा है। इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कर्मचारी मैनुअल पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं।
राजस्व निरीक्षक का हस्ताक्षर स्कैन करने का मामला सामने आया है। उन्होंने गड़बड़ी होने की शिकायत की है। प्रकरण में जांज कमेटी बनाई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- रोहित सिंह, ईओ