{"_id":"5f6e33ce8ebc3e9b91746d6f","slug":"tap-is-important-in-life-deoria-news-gkp3669313126","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मानव जीवन में तप का सर्वश्रेष्ठ स्थान’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मानव जीवन में तप का सर्वश्रेष्ठ स्थान’
विज्ञापन
‘मानव जीवन में तप का सर्वश्रेष्ठ स्थान’
भाटपाररानी। श्री बब्बन सिंह शिक्षा संस्थान रतसिया कोठी में श्रीराम कथा में शुक्रवार को कथावाचक राजन ने भगवान राम व केवट का प्रेम प्रसंग सुनाया। कहा कि मानव जीवन में तप का सर्वश्रेष्ठ स्थान है। जीवन में तप करने से कुछ भी असंभव नहीं रह जाता। आप चाहते हैं कि आपकी बात आपकी संतान सुने, आपकी प्रतिष्ठा, सम्मान बना रहे, जीवन में उत्थान हो तो जीवन को तप में लगाएं।
कथा व्यास ने कहा कि तप के लिए श्रीरामचंद्र ने 14 वर्षों तक वनवास किया। केवट प्रसंग के दौरान कहा कि यदि संभव हो तो मानव को भगवान से मांगने की प्रवृत्ति को त्यागने की कोशिश करनी चाहिए। केवट ने भगवान से अपने पूरे जीवन में कुछ नहीं मांगा। भगवान के देने पर भी उसने स्वीकार नहीं किया। अंत में केवट को प्रभु की विपुल भक्ति प्राप्त हुई। इस प्रकार यदि भगवान से कुछ मांगने की इच्छा नहीं रखेंगे तो भगवान हमें अपनी भक्ति स्वयं दे देंगे। उन्होंने कहा कि निशुल्क कुछ नहीं मिलता है, लेकिन भक्ति एवं तप का कोई मोल नहीं होता। आदमी की दिशा भटकेगी तो उसकी दशा भी बदल जाएगी। इस दौरान यजमान भूनेश प्रताप सिंह, कुलमुख्य डॉ.तेज प्रताप सिंह, प्रबंधक डॉ.भानु प्रताप सिंह, निदेशक चंद्र प्रताप सिंह, सुदामा सिंह कुशवाहा, भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल, अश्वनी सिंह, मंटू पटेल आदि मौजूद रहे।
भक्तों के हृदय में बसते हैं भगवान : पं. राघवेंद्र
कपरवार। गांव के पश्चिमी टोला स्थित रमईपुरा में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। कथावाचक पंडित राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि भगवान भक्तों के हृदय में बसते हैं। प्रभु ज्ञान के नहीं बल्कि हृदय के विषय हैं।
विज्ञापन
कपरवार के रमईपुरा टोला में नौ दिवसीय कथा के प्रथम दिन कथा वाचक पंडित राघवेंद्र ने कहा कि भागवत कथा अमृत के समान होती है। जिसका श्रवण करने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। उन्होंने कुंती के देवताओं की स्तुति प्रसंग पर व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि भीष्म अपने प्रतिज्ञा पर अटल थे। उन्होंने राज्य की रक्षा में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। संसार दुखालय है। सुख तो परमात्मा के चरणों में है। इस दौरान रामबहाल पांडेय, ध्रुवनारायण पांडेय, रामविश्वास, सूर्यदेव उपाध्याय, चौथी पांडेय, राजेश यादव, रामप्रवेेश यादव, दयाशंकर सिंह आदि उपस्थित रहे।
गुमटही गांव में हुई श्रीमद्भागवत कथा
सलेमपुर। ब्लॉक के गुमटही गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन शुक्रवार को कथा व्यास साधना शास्त्री ने कृष्ण सुदामा मिलन की कथा सुनाई। दोनों की मित्रता का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविह्वल हो गए।
साधना ने कहा कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं, पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नही हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था, जिसे देखने वाले अचंभित रह गए थे। आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मित्रता हमेशा मित्रता का भाव देखती है। इसमें जात-पात, कुल, बड़ाई के लिए कोई स्थान नहीं है। श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता युगों-युगों तक लोगों के लिए एक आदर्श बनी रहेगी। भगवान कृष्ण के सहपाठी रहे सुदामा बहुत ही गरीब ब्राह्मण थे। उनके सामने हालात ऐसे थे कि बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल हो गया था। गरीबी से तंग आकर एक दिन सुदामा की पत्नी ने उनसे कहा कि वे खुद भूखे रह सकते हैं, लेकिन बच्चों को भूखा नहीं देख सकते। पत्नी के कहने पर वे द्वारका तो आ गए, लेकिन यहां उन्हें मित्र से मिलने में संकोच होने लगा। द्वारपाल जब श्रीकृष्ण को उनका परिचय बताने गया तो वे लौटने लगे। तब श्रीकृष्ण अपने मित्र को महल में ले जाते हैं। वहां सुदामा द्वारा ले गए चावल खाते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को श्रीकृष्ण व सुदामा की तरह मित्रता का भाव रखना चाहिए।
विज्ञापन
भाटपाररानी। श्री बब्बन सिंह शिक्षा संस्थान रतसिया कोठी में श्रीराम कथा में शुक्रवार को कथावाचक राजन ने भगवान राम व केवट का प्रेम प्रसंग सुनाया। कहा कि मानव जीवन में तप का सर्वश्रेष्ठ स्थान है। जीवन में तप करने से कुछ भी असंभव नहीं रह जाता। आप चाहते हैं कि आपकी बात आपकी संतान सुने, आपकी प्रतिष्ठा, सम्मान बना रहे, जीवन में उत्थान हो तो जीवन को तप में लगाएं।
कथा व्यास ने कहा कि तप के लिए श्रीरामचंद्र ने 14 वर्षों तक वनवास किया। केवट प्रसंग के दौरान कहा कि यदि संभव हो तो मानव को भगवान से मांगने की प्रवृत्ति को त्यागने की कोशिश करनी चाहिए। केवट ने भगवान से अपने पूरे जीवन में कुछ नहीं मांगा। भगवान के देने पर भी उसने स्वीकार नहीं किया। अंत में केवट को प्रभु की विपुल भक्ति प्राप्त हुई। इस प्रकार यदि भगवान से कुछ मांगने की इच्छा नहीं रखेंगे तो भगवान हमें अपनी भक्ति स्वयं दे देंगे। उन्होंने कहा कि निशुल्क कुछ नहीं मिलता है, लेकिन भक्ति एवं तप का कोई मोल नहीं होता। आदमी की दिशा भटकेगी तो उसकी दशा भी बदल जाएगी। इस दौरान यजमान भूनेश प्रताप सिंह, कुलमुख्य डॉ.तेज प्रताप सिंह, प्रबंधक डॉ.भानु प्रताप सिंह, निदेशक चंद्र प्रताप सिंह, सुदामा सिंह कुशवाहा, भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल, अश्वनी सिंह, मंटू पटेल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भक्तों के हृदय में बसते हैं भगवान : पं. राघवेंद्र
कपरवार। गांव के पश्चिमी टोला स्थित रमईपुरा में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। कथावाचक पंडित राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि भगवान भक्तों के हृदय में बसते हैं। प्रभु ज्ञान के नहीं बल्कि हृदय के विषय हैं।
विज्ञापन
कपरवार के रमईपुरा टोला में नौ दिवसीय कथा के प्रथम दिन कथा वाचक पंडित राघवेंद्र ने कहा कि भागवत कथा अमृत के समान होती है। जिसका श्रवण करने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। उन्होंने कुंती के देवताओं की स्तुति प्रसंग पर व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि भीष्म अपने प्रतिज्ञा पर अटल थे। उन्होंने राज्य की रक्षा में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। संसार दुखालय है। सुख तो परमात्मा के चरणों में है। इस दौरान रामबहाल पांडेय, ध्रुवनारायण पांडेय, रामविश्वास, सूर्यदेव उपाध्याय, चौथी पांडेय, राजेश यादव, रामप्रवेेश यादव, दयाशंकर सिंह आदि उपस्थित रहे।
गुमटही गांव में हुई श्रीमद्भागवत कथा
सलेमपुर। ब्लॉक के गुमटही गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन शुक्रवार को कथा व्यास साधना शास्त्री ने कृष्ण सुदामा मिलन की कथा सुनाई। दोनों की मित्रता का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविह्वल हो गए।
साधना ने कहा कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं, पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नही हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था, जिसे देखने वाले अचंभित रह गए थे। आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मित्रता हमेशा मित्रता का भाव देखती है। इसमें जात-पात, कुल, बड़ाई के लिए कोई स्थान नहीं है। श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता युगों-युगों तक लोगों के लिए एक आदर्श बनी रहेगी। भगवान कृष्ण के सहपाठी रहे सुदामा बहुत ही गरीब ब्राह्मण थे। उनके सामने हालात ऐसे थे कि बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल हो गया था। गरीबी से तंग आकर एक दिन सुदामा की पत्नी ने उनसे कहा कि वे खुद भूखे रह सकते हैं, लेकिन बच्चों को भूखा नहीं देख सकते। पत्नी के कहने पर वे द्वारका तो आ गए, लेकिन यहां उन्हें मित्र से मिलने में संकोच होने लगा। द्वारपाल जब श्रीकृष्ण को उनका परिचय बताने गया तो वे लौटने लगे। तब श्रीकृष्ण अपने मित्र को महल में ले जाते हैं। वहां सुदामा द्वारा ले गए चावल खाते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को श्रीकृष्ण व सुदामा की तरह मित्रता का भाव रखना चाहिए।