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Deoria News: बिना पार्किंग के चल रहे शॉपिंग काॅम्प्लेक्स, सड़कों पर लग रहा जाम
Mon, 10 Apr 2023 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 10 Apr 2023 11:57 PM IST
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शहर में चार दर्जन से अधिक शॉपिंग कॉम्पलेक्स धड़ल्ले से चल रहे, जहां-तहां वाहन खड़ा करने से हो रही दिक्कत
कार्रवाई के लिए बायलाज नहीं होने का फायदा उठा रहे भवन स्वामी
जहां नक्शे में दिखाए पार्किंग वहां चलवा रहे दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर में बिना पार्किंग के चार दर्जन से अधिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स धड़ल्ले से चल रहे हैं। पार्किंग न होने से खरीदारी करने वाले सड़क पर ही वाहन खड़ा कर देते हैं। इससे आए दिन जाम की समस्या से शहरवासियों को जूझना पड़ता है। पार्किंग नहीं बनाने वालों पर प्रशासन का भी कोई जोर नहीं है। प्रशासन की लापरवाही कॉम्प्लेक्स मालिकों के लिए ढाल का काम कर रही है। दरअसल मानक के विपरीत भवन बनवाने के बाद उस पर कार्रवाई का कोई ठोस प्रावधान नहीं है। ऐसे में मनमानी करने वाले नियम कानून ताक पर क्यों न रखें, जब इसके लिए अभी तक कोई बायलाज ही नहीं बनाया गया है।
शहर को सुव्यवस्थित बसाने का जिम्मा नियत प्राधिकारी कार्यालय का है। वही भवनों के नक्शे पास करता है। इसके वर्ष 2001 में बनाया गया उसका कायदा कानून ही बेहद लचीला है। प्रशासन की उदासीनता के कारण बेमानक व्यावसायिक भवन बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल नोटिस देने तक ही सीमित रह जाती है। इसके चलते व्यावसायिक भवनों के स्वामियों की मनमानी का खामियाजा राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। शहर में कई ऐसे शॉपिंग काम्प्लेक्स हैं, जिन्होंने नक्शे में वाहन पार्किंग की सुविधा तो दी है लेकिन धरातल पर उनके पास यह इंतजाम नहीं है।
बेसमेंट को बना दिया स्टोर रूम
शहर में छोटे-बड़े करीब 50 से अधिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खुले हैं। इनमें कुछ का नक्शा पास नहीं है तो कुछ ऐसे भी हैं, जिनका स्वीकृत नक्शे के विपरीत भवन निर्माण हुआ है। वर्ष 2018 में बिना वाहन पार्किंग वाले होटल, अस्पताल व शॉपिंग कांप्लेक्स के खिलाफ अमर उजाला ने अभियान चलाया था। इसके बाद मास्टर प्लान के जिम्मेदारों की नींद खुली। बिना नक्शा वाले और स्वीकृत नक्शा के विपरीत भवन निर्माण कराने वालों को नोटिस भेजकर मुकदमा दर्ज किया गया। कहने के लिए वह मुकदमे आज भी चल रहे हैं, लेकिन किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। नतीजतन शॉपिंग काम्प्लेक्स संचालकों की मनमानी बरकरार है। बेसमेंट में वाहन पार्क होने की जगह उसका उपयोग दुकान या स्टोर रूम के लिए किया जा रहा है। ग्राहकों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो रही हैं। इससे समय-समय पर लंबा जाम लग रहा है। जाम में फंसकर राहगीर धूल से बेहाल हो रहे हैं।
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इनसेट
ऐसे पास होता है नक्शा
शॉपिंग माल बनाने के लिए सबसे पहले जमीन के कागजात और उसका नक्शा नियत प्राधिकारी कार्यालय को देना होता है। विभाग नक्शे की गहन जांच के दौरान यह सुनिश्चित करता है कि पार्किंग की सुविधा है या नहीं। बिना पार्किंग के कोई भी व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत नहीं किया जा सकता। वाहन पार्किंग के लिए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की कुल भूमि का 10वां हिस्सा निर्धारित किया जाता है। लिहाजा आम तौर पर बेसमेंट में ही पार्किंग की सुविधा दी जाती है। नक्शा स्वीकृत करने के बदले चार रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से विकास शुल्क व 50 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से मानचित्र शुल्क जमा करना होता है।
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इनसेट
प्रशासन की लापरवाही, मनमानी करने वालों की ढाल
शॉपिंग मॉल का नक्शा पास कराने के लिए लोग जमीन के कागजात के अलावा जरूरी धनराशि नगर विकास विभाग के जेई व बाबुओं के पास जमा कर देते हैं। विभाग नियमों के मुताबिक नक्शा पास कर देता है, मगर इसके बाद कोई भी कर्मचारी यह देखने निर्माण स्थल पर नहीं जाता कि नक्शे के अनुरूप काम हो रहा है या नहीं। यही कारण है कि नक्शे में भले ही पार्किंग हो, लेकिन मौके पर उनका वजूद नहीं है। कुछ ने किराए पर पार्किंग की जगह ले रखी है, लेकिन वह भी मानक के अनुरूप नहीं है।
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इनसेट
शहर में इन क्षेत्रों में हैं सर्वाधिक कॉम्प्लेक्स
ऑपरेटिव चौराहा से हनुमान मंदिर रोड जाने वाले मार्ग पर आधा दर्जन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खुले हैं। किसी के पास पार्किंग की सुविधा नहीं है। रामलीला मैदान के पास वाले दो शॉपिंग मॉल में हमेशा 50 से सौ ग्राहकों की भीड़ रहती है। सभी की गाड़ियां सड़क पर खड़ी होने से जाम लगा रहता है। भटवलिया चौराहा के पास तीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स हैं। किसी के बेसमेंट में दुकानें चल रहीं तो किसी में स्टोर रूम बना दिया गया है। गाड़ियां सड़क पर खड़ी होने से जाम की समस्या रहती है। मालवीय रोड पर दो शॉपिंग कॉप्लेक्स के सामने वाहन खड़े होते हैं। सोमवार को इन जगहों पर पूरे दिन जाम की नौबत रही। ईद की खरीदारी करने शहर आए लोग जाम के झाम से परेशान दिखे।
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इसलिए नहीं हो पा रही कार्रवाई
आरबीओ की धारा सात के तहत नियत प्राधिकारी कार्यालय से भवनों के नक्शे स्वीकृत होते हैं। इसके बाद भूस्वामी को भवन निर्माण कराना होता है। नक्शे के विपरीत भवन बनाने वालों का धारा सात ए के तहत मानचित्र निरस्त करने का नियम है, लेकिन जुर्माना या अन्य कार्रवाई संबंधी बायलाज नहीं है।
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ईद की खरीदारी करने परिवार समेत बाइक से आया हूं। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की ओर से वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं दी गई है। डर है सड़क पर वाहन खड़ा करके अंदर जाऊं और इधर वाहन का चालान न कट जाए। - आदिल अंसारी, राहगीर।
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लोग सुविधा के लिए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में खरीदारी करने आते हैं, लेकिन शहर के ज्यादातर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं है। कोऑपरेटिव चौराहा से हनुमान मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हमेशा जाम लगा रहता है। - अब्दुल, राहगीर।
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वर्जन
किसी भी भवन स्वामी को स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण या बदलाव नहीं करने दिया जाएगा। बायलाज के संबंध में मैं अवर अभियंता से बात करूंगा। शॉपिंग कांप्लेक्स की पुन: जांच कराई जाएगी।
- सौरभ सिंह, एसडीएम सदर/नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र।
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कार्रवाई के लिए बायलाज नहीं होने का फायदा उठा रहे भवन स्वामी
जहां नक्शे में दिखाए पार्किंग वहां चलवा रहे दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर में बिना पार्किंग के चार दर्जन से अधिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स धड़ल्ले से चल रहे हैं। पार्किंग न होने से खरीदारी करने वाले सड़क पर ही वाहन खड़ा कर देते हैं। इससे आए दिन जाम की समस्या से शहरवासियों को जूझना पड़ता है। पार्किंग नहीं बनाने वालों पर प्रशासन का भी कोई जोर नहीं है। प्रशासन की लापरवाही कॉम्प्लेक्स मालिकों के लिए ढाल का काम कर रही है। दरअसल मानक के विपरीत भवन बनवाने के बाद उस पर कार्रवाई का कोई ठोस प्रावधान नहीं है। ऐसे में मनमानी करने वाले नियम कानून ताक पर क्यों न रखें, जब इसके लिए अभी तक कोई बायलाज ही नहीं बनाया गया है।
शहर को सुव्यवस्थित बसाने का जिम्मा नियत प्राधिकारी कार्यालय का है। वही भवनों के नक्शे पास करता है। इसके वर्ष 2001 में बनाया गया उसका कायदा कानून ही बेहद लचीला है। प्रशासन की उदासीनता के कारण बेमानक व्यावसायिक भवन बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल नोटिस देने तक ही सीमित रह जाती है। इसके चलते व्यावसायिक भवनों के स्वामियों की मनमानी का खामियाजा राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। शहर में कई ऐसे शॉपिंग काम्प्लेक्स हैं, जिन्होंने नक्शे में वाहन पार्किंग की सुविधा तो दी है लेकिन धरातल पर उनके पास यह इंतजाम नहीं है।
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शहर में छोटे-बड़े करीब 50 से अधिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खुले हैं। इनमें कुछ का नक्शा पास नहीं है तो कुछ ऐसे भी हैं, जिनका स्वीकृत नक्शे के विपरीत भवन निर्माण हुआ है। वर्ष 2018 में बिना वाहन पार्किंग वाले होटल, अस्पताल व शॉपिंग कांप्लेक्स के खिलाफ अमर उजाला ने अभियान चलाया था। इसके बाद मास्टर प्लान के जिम्मेदारों की नींद खुली। बिना नक्शा वाले और स्वीकृत नक्शा के विपरीत भवन निर्माण कराने वालों को नोटिस भेजकर मुकदमा दर्ज किया गया। कहने के लिए वह मुकदमे आज भी चल रहे हैं, लेकिन किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। नतीजतन शॉपिंग काम्प्लेक्स संचालकों की मनमानी बरकरार है। बेसमेंट में वाहन पार्क होने की जगह उसका उपयोग दुकान या स्टोर रूम के लिए किया जा रहा है। ग्राहकों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो रही हैं। इससे समय-समय पर लंबा जाम लग रहा है। जाम में फंसकर राहगीर धूल से बेहाल हो रहे हैं।
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ऐसे पास होता है नक्शा
शॉपिंग माल बनाने के लिए सबसे पहले जमीन के कागजात और उसका नक्शा नियत प्राधिकारी कार्यालय को देना होता है। विभाग नक्शे की गहन जांच के दौरान यह सुनिश्चित करता है कि पार्किंग की सुविधा है या नहीं। बिना पार्किंग के कोई भी व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत नहीं किया जा सकता। वाहन पार्किंग के लिए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की कुल भूमि का 10वां हिस्सा निर्धारित किया जाता है। लिहाजा आम तौर पर बेसमेंट में ही पार्किंग की सुविधा दी जाती है। नक्शा स्वीकृत करने के बदले चार रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से विकास शुल्क व 50 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से मानचित्र शुल्क जमा करना होता है।
इनसेट
प्रशासन की लापरवाही, मनमानी करने वालों की ढाल
शॉपिंग मॉल का नक्शा पास कराने के लिए लोग जमीन के कागजात के अलावा जरूरी धनराशि नगर विकास विभाग के जेई व बाबुओं के पास जमा कर देते हैं। विभाग नियमों के मुताबिक नक्शा पास कर देता है, मगर इसके बाद कोई भी कर्मचारी यह देखने निर्माण स्थल पर नहीं जाता कि नक्शे के अनुरूप काम हो रहा है या नहीं। यही कारण है कि नक्शे में भले ही पार्किंग हो, लेकिन मौके पर उनका वजूद नहीं है। कुछ ने किराए पर पार्किंग की जगह ले रखी है, लेकिन वह भी मानक के अनुरूप नहीं है।
इनसेट
शहर में इन क्षेत्रों में हैं सर्वाधिक कॉम्प्लेक्स
ऑपरेटिव चौराहा से हनुमान मंदिर रोड जाने वाले मार्ग पर आधा दर्जन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खुले हैं। किसी के पास पार्किंग की सुविधा नहीं है। रामलीला मैदान के पास वाले दो शॉपिंग मॉल में हमेशा 50 से सौ ग्राहकों की भीड़ रहती है। सभी की गाड़ियां सड़क पर खड़ी होने से जाम लगा रहता है। भटवलिया चौराहा के पास तीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स हैं। किसी के बेसमेंट में दुकानें चल रहीं तो किसी में स्टोर रूम बना दिया गया है। गाड़ियां सड़क पर खड़ी होने से जाम की समस्या रहती है। मालवीय रोड पर दो शॉपिंग कॉप्लेक्स के सामने वाहन खड़े होते हैं। सोमवार को इन जगहों पर पूरे दिन जाम की नौबत रही। ईद की खरीदारी करने शहर आए लोग जाम के झाम से परेशान दिखे।
इसलिए नहीं हो पा रही कार्रवाई
आरबीओ की धारा सात के तहत नियत प्राधिकारी कार्यालय से भवनों के नक्शे स्वीकृत होते हैं। इसके बाद भूस्वामी को भवन निर्माण कराना होता है। नक्शे के विपरीत भवन बनाने वालों का धारा सात ए के तहत मानचित्र निरस्त करने का नियम है, लेकिन जुर्माना या अन्य कार्रवाई संबंधी बायलाज नहीं है।
ईद की खरीदारी करने परिवार समेत बाइक से आया हूं। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की ओर से वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं दी गई है। डर है सड़क पर वाहन खड़ा करके अंदर जाऊं और इधर वाहन का चालान न कट जाए। - आदिल अंसारी, राहगीर।
लोग सुविधा के लिए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में खरीदारी करने आते हैं, लेकिन शहर के ज्यादातर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं है। कोऑपरेटिव चौराहा से हनुमान मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हमेशा जाम लगा रहता है। - अब्दुल, राहगीर।
वर्जन
किसी भी भवन स्वामी को स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण या बदलाव नहीं करने दिया जाएगा। बायलाज के संबंध में मैं अवर अभियंता से बात करूंगा। शॉपिंग कांप्लेक्स की पुन: जांच कराई जाएगी।
- सौरभ सिंह, एसडीएम सदर/नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र।