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अपने बाबुओं को वापस भेज दिया, प्राइवेट बाबू चला रहे डीआईओएस ऑफिस
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अपने बाबुओं को वापस भेज दिया, प्राइवेट बाबू चला रहे डीआईओएस ऑफिस
देवरिया। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय वर्तमान में प्राइवेट बाबुओं के हवाले हो गया है। यहां तैनात विभागीय लिपिकों ने अपने-अपने प्राइवेट लोग रखे हुए हैं। इस समय यही लोग कार्यालय को चला रहे हैं। इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी, वेतन बिल सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षक संगठन भी इन बाबुओं की कार्यशैली पर सवाल उठा चुका है।
डीआईओएस ऑफिस ने एक साल पूर्व राजकीय स्कूलों में कार्यरत कुछ बाबुओं को बोर्ड परीक्षा, माध्यमिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन, मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग, कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं की मॉनिटरिंग के लिए अपने कार्यालय में अटैच किया था। नए डीआईओएस ने आते ही अपने बाबुओं को, जो यहां अटैच किए गए थे उनको तैनाती वाले स्कूल वापस भेज दिया है। इससे कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारियों को रखकर काम कराने वाले विभागीय बाबुओं की पूछ बढ़ गई है। हालांकि इससे अनियमितता की शिकायतें बढ़ गई हैं। शिक्षक कर्मचारी संघर्ष समिति से जुड़े पदाधिकारी इसके विरोध में 30 दिसंबर को डीआईओएस कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। संयोजक उमाशंकर लाल श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को बताया कि विभागीय अधिकारियों को अपने बाबुओं पर भरोसा नहीं है, वह प्राइवेट कर्मचारियों के भरोसे काम कर रहे हैं। इससे शिक्षकों का आर्थिक नुकसान व शोषण हो रहा है।
आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों पर भरोसा कायम
डीआईओएस कार्यालय ने राजकीय के अपने बाबुओं पर लगातार अविश्वास जताया है। आउटसोर्सिंग के जो कर्मचारी यहां तैनात हैं, उन्हें बरकरार रखा गया है। जबकि शासन से स्पष्ट निर्देश है कि जुम पोर्टल के जरिये ही कर्मचारियों की तैनाती की जाए। हालांकि विभागीय अधिकारी शासनादेश को मानना उचित नहीं समझते।
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कई स्कूलों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को किया है अटैच
कार्यालय में कई एडेड विद्यालयों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को अटैच किया गया है। इससे उन विद्यालयों का कार्य प्रभावित हो रहा है। यह कर्मचारी यहां से जुड़कर काम कम अधिकारियों व कर्मचारियों की जी हुजूरी अधिक करते हैं। किसके जिम्मे कौन सा काम है, यह पता ही नहीं चलता।
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जिन बाबुओं को वापस भेजा गया है, उनकी मूल तैनाती वाले विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उनकी मांग की थी। उनका कार्य भी प्रभावित हो रहा था। अब इनका यहां कोई कार्य नहीं रह गया था। अभी ज्वाइन किए कुछ ही दिन हुए हैं। पूरे मामले को समझने का प्रयास किया जा रहा है। प्राइवेट बाबुओं को रखकर काम चलाने वाले प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
देवेंद्र कुमार गुप्ता, डीआईओएस
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देवरिया। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय वर्तमान में प्राइवेट बाबुओं के हवाले हो गया है। यहां तैनात विभागीय लिपिकों ने अपने-अपने प्राइवेट लोग रखे हुए हैं। इस समय यही लोग कार्यालय को चला रहे हैं। इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी, वेतन बिल सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षक संगठन भी इन बाबुओं की कार्यशैली पर सवाल उठा चुका है।
डीआईओएस ऑफिस ने एक साल पूर्व राजकीय स्कूलों में कार्यरत कुछ बाबुओं को बोर्ड परीक्षा, माध्यमिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन, मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग, कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं की मॉनिटरिंग के लिए अपने कार्यालय में अटैच किया था। नए डीआईओएस ने आते ही अपने बाबुओं को, जो यहां अटैच किए गए थे उनको तैनाती वाले स्कूल वापस भेज दिया है। इससे कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारियों को रखकर काम कराने वाले विभागीय बाबुओं की पूछ बढ़ गई है। हालांकि इससे अनियमितता की शिकायतें बढ़ गई हैं। शिक्षक कर्मचारी संघर्ष समिति से जुड़े पदाधिकारी इसके विरोध में 30 दिसंबर को डीआईओएस कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। संयोजक उमाशंकर लाल श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को बताया कि विभागीय अधिकारियों को अपने बाबुओं पर भरोसा नहीं है, वह प्राइवेट कर्मचारियों के भरोसे काम कर रहे हैं। इससे शिक्षकों का आर्थिक नुकसान व शोषण हो रहा है।
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आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों पर भरोसा कायम
डीआईओएस कार्यालय ने राजकीय के अपने बाबुओं पर लगातार अविश्वास जताया है। आउटसोर्सिंग के जो कर्मचारी यहां तैनात हैं, उन्हें बरकरार रखा गया है। जबकि शासन से स्पष्ट निर्देश है कि जुम पोर्टल के जरिये ही कर्मचारियों की तैनाती की जाए। हालांकि विभागीय अधिकारी शासनादेश को मानना उचित नहीं समझते।
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कई स्कूलों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को किया है अटैच
कार्यालय में कई एडेड विद्यालयों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को अटैच किया गया है। इससे उन विद्यालयों का कार्य प्रभावित हो रहा है। यह कर्मचारी यहां से जुड़कर काम कम अधिकारियों व कर्मचारियों की जी हुजूरी अधिक करते हैं। किसके जिम्मे कौन सा काम है, यह पता ही नहीं चलता।
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जिन बाबुओं को वापस भेजा गया है, उनकी मूल तैनाती वाले विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उनकी मांग की थी। उनका कार्य भी प्रभावित हो रहा था। अब इनका यहां कोई कार्य नहीं रह गया था। अभी ज्वाइन किए कुछ ही दिन हुए हैं। पूरे मामले को समझने का प्रयास किया जा रहा है। प्राइवेट बाबुओं को रखकर काम चलाने वाले प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
देवेंद्र कुमार गुप्ता, डीआईओएस