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मनरेगा में मेठ की भूमिका निभाएंगी समूह की महिलाएं
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मनरेगा में मेठ की भूमिका निभाएंगी समूह की महिलाएं
50 मजदूरों पर एक मेठ की होगी तैनाती, मनरेगा से दी जाएगी दिहाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। एनआरएलएम की ओर से गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के जीविकोपर्जन के लिए सरकार ने एक और अवसर प्रदान किया है। अब वह मनरेगा में मेठ की भूमिका निभा सकेंगी। मनरेगा योजना के तहत उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से मेहनताना दिया जाएगा। शासन ने 50 मनरेगा मजदूरों पर एक मेठ की तैनाती करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले भर में करीब 25 हजार स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न प्रकार के रोजगार में जुटी हुई हैं। कुछ महिलाएं स्कूली बच्चों के लिए ड्रेस सिलाई का काम कर रहीं हैं तो कुछ एलईडी उत्पाद बनाने और खेती-बारी के काम में लगी हैं। इनमें सक्षम महिलाओं को मनरेगा में मेठ के रूप में तैनात किया जाएगा। जहां 50 से अधिक मजदूर काम पर लगे हैं, ऐसे बड़े प्रोजेक्ट की सूची मनरेगा सेल की और से तैयार की जा रही है।
इनसेट
सुरक्षा नियमों का कराएंगी पालन
मेठ के रूप में तैनात महिलाएं मनरेगा मजदूरों को कोरोना के संक्रमण से बचाव की जानकारी देते हुए कार्यस्थल की व्यवस्था दुरुस्त रखेंगी। ताकि मजदूरों में कोरोना का संक्रमण न फैल सके। कार्यस्थल पर सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित करना व श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मेठ की होगी।
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वर्जन
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा में मेठ के रूप में तैनात किया जाना है। जहां भी 50 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। उन कार्य स्थलों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।
- गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा।
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50 मजदूरों पर एक मेठ की होगी तैनाती, मनरेगा से दी जाएगी दिहाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। एनआरएलएम की ओर से गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के जीविकोपर्जन के लिए सरकार ने एक और अवसर प्रदान किया है। अब वह मनरेगा में मेठ की भूमिका निभा सकेंगी। मनरेगा योजना के तहत उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से मेहनताना दिया जाएगा। शासन ने 50 मनरेगा मजदूरों पर एक मेठ की तैनाती करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले भर में करीब 25 हजार स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न प्रकार के रोजगार में जुटी हुई हैं। कुछ महिलाएं स्कूली बच्चों के लिए ड्रेस सिलाई का काम कर रहीं हैं तो कुछ एलईडी उत्पाद बनाने और खेती-बारी के काम में लगी हैं। इनमें सक्षम महिलाओं को मनरेगा में मेठ के रूप में तैनात किया जाएगा। जहां 50 से अधिक मजदूर काम पर लगे हैं, ऐसे बड़े प्रोजेक्ट की सूची मनरेगा सेल की और से तैयार की जा रही है।
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सुरक्षा नियमों का कराएंगी पालन
मेठ के रूप में तैनात महिलाएं मनरेगा मजदूरों को कोरोना के संक्रमण से बचाव की जानकारी देते हुए कार्यस्थल की व्यवस्था दुरुस्त रखेंगी। ताकि मजदूरों में कोरोना का संक्रमण न फैल सके। कार्यस्थल पर सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित करना व श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मेठ की होगी।
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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा में मेठ के रूप में तैनात किया जाना है। जहां भी 50 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। उन कार्य स्थलों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।
- गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा।