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पराली जलाने वालों पर सेटेलाइट की पैनी नजर

Sat, 24 Oct 2020 11:36 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2020 11:36 PM IST
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satellite sight on stubble burners
पराली जलाने वालों पर सेटेलाइट की पैनी नजर
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देवरिया। पराली जलाने की घटनाओं पर स्थानीय प्रशासन भले ही आंख मूंद ले, लेकिन सेटेलाइट की पैनी नजर से बचना नामुमकिन है। धान की कटाई शुरू होते ही कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। राज्य मुख्यालय जिले के हर कोने की निगरानी में जुटा है। लखनऊ कंट्रोल रूम ने जिला मुख्यालय को पराली जलने के चित्र और लोकेशन भेजने शुरू कर दिए हैं।
फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने पिछले साल सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था शुरू की। इसकी मॉनीटरिंग कृषि विभाग लखनऊ द्वारा की जाती है। साल 2019 में जिले के अलग-अलग जगहों से पराली जलाने की 16 तस्वीरें सेटेलाइट ने कैद किए थे। जिला प्रशासन ने मामलों का सत्यापन कर संबंधित लोगों से जुर्माना वसूला। धान की कटाई आरंभ होने के साथ ही फिर से पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। राज्य मुख्यालय की ओर से भाटपाररानी में आग की फोटो उप कृषि निदेशक कार्यालय के पास भेजी गई है। जिसका सत्यापन करने में महकमा जुटा हुआ है।
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धरती और आकाश से हो रही निगरानी
पराली जलने की घटनाओं पर अंतरिक्ष में मौजूद सेटेलाइट से नजर तो रखी ही जा रही है। स्थानीय स्तर पर कृषि विभाग, तहसील कर्मचारी, पुलिस विभाग समेत ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कर्मचारी सेटेलाइट से प्राप्त केस का सत्यापन कर पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।
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पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्ती के प्रावधान
दो एकड़ तक फसल अवशेष जलाने वालों से ढाई हजार रुपये जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये व पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में पराली जलने पर दोषी व्यक्ति से 15 हजार रुपये जुर्माना वसूला जा सकता है। दोबारा पकड़े जाने पर संबंधित किसान को कृषि विभाग की योजनाओं के लाभ से हाथ धोना पड़ेगा।
पराली जलने से नुकसान
पराली जलाने से राख पैदा होता है और उस जगह के सूक्ष्म जीवों का नाश हो जाता है। इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हवा में उपस्थित धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषित कणों की वजह से अस्थमा और खांसी जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा निमोनिया और दिल की बीमारी जैसे रोग भी बढ़ रहे हैं।

पराली न जले इसके लिए कंबाइन मालिकों को एसएमएस (सुपर एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे फसल अवशेष के छोटे टुकड़े हो जाते हैं। इसके अलावा पराली जलने की घटनाओं की मॉनीटरिंग सेटेलाइट से भी की जा रही है। कृषि विभाग व तहसील कर्मचारी पूरी तरह अलर्ट हैं। जो भी व्यक्ति पराली जलाते हुए पकड़ा जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- एके मिश्रा, उप कृषि निदेशक
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