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सरयू नदी खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर, बाढ़ से घिरे भदिला प्रथम और विशुनपुर देवार के सात मजरे
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सरयू नदी खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर, बाढ़ से घिरे भदिला प्रथम और विशुनपुर देवार के सात मजरे
बरहज। सरयू में आई बाढ़ से भदिला प्रथम और दियारा के परसियां-विशुनपुर देवार के सात मजरे पानी से घिरे हुए हैं। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। नदी खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर बह रही है। हालांकि पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 30 सेमी की नरमी नोट किया गया है।
बुधवार को नदी खतरे के निशान 66.50 से 70 सेमी ऊपर 67.20 पर बह रही थी। नदी इस बार बढ़त बनाते हुए 67.50 मीटर तक पहुंची थी। नदी में सैलाब उमड़ने के कारण बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि मैरुंड हो गई है। जिससे किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं चारों तरफ पानी से घिरे गांवों के लोगों की आवाजाही नाव के जरिए हो रही है। जलस्तर में आई कमी से तटवर्ती गांवों के लोगों ने कुछ हद तक राहत महसूस किया है। जबकि दुश्वारियां बरकरार है। गोरखपुर जनपद के विस्थापित कोलखास गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे लोग अन्यत्र ठौर की तलाश कर रहे हैं। एसडीएम न्यायिक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि सरयू तट पर स्नान के लिए जुटने वाली भीड़ के लिए घाट पर चाक-चौबंद व्यवस्था कराई गई है। नदी के हालात पर नजर रखी जा रही है।
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बरहज। सरयू में आई बाढ़ से भदिला प्रथम और दियारा के परसियां-विशुनपुर देवार के सात मजरे पानी से घिरे हुए हैं। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। नदी खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर बह रही है। हालांकि पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 30 सेमी की नरमी नोट किया गया है।
बुधवार को नदी खतरे के निशान 66.50 से 70 सेमी ऊपर 67.20 पर बह रही थी। नदी इस बार बढ़त बनाते हुए 67.50 मीटर तक पहुंची थी। नदी में सैलाब उमड़ने के कारण बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि मैरुंड हो गई है। जिससे किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं चारों तरफ पानी से घिरे गांवों के लोगों की आवाजाही नाव के जरिए हो रही है। जलस्तर में आई कमी से तटवर्ती गांवों के लोगों ने कुछ हद तक राहत महसूस किया है। जबकि दुश्वारियां बरकरार है। गोरखपुर जनपद के विस्थापित कोलखास गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे लोग अन्यत्र ठौर की तलाश कर रहे हैं। एसडीएम न्यायिक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि सरयू तट पर स्नान के लिए जुटने वाली भीड़ के लिए घाट पर चाक-चौबंद व्यवस्था कराई गई है। नदी के हालात पर नजर रखी जा रही है।
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