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Deoria News: कस्टडी से भागे बदमाश पुलिस के लिए बने चुनौती
Sat, 06 May 2023 11:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 06 May 2023 11:29 PM IST
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बंदीरक्षकों की लापरवाही से बदमाश भागने में हो रहे सफल, उन्हें पकड़ने में दशकों बीत जा रहा, फिर भी पुलिस के हाथ हैं खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पुलिस कस्टडी हो या जेल की चहारदीवारी बदमाश चकमा देने में माहिर हैं। एक बार हथकड़ी से फिसलने पर वह खाकी की नजरों से ओझल हो जा रहे हैं। उन्हें पकड़ने में दशकों का समय बीत जा रहा है। इसके बाद भी वह पुलिस के हाथ नहीं लग रहे हैं। पुलिस का नेटवर्क बदमाशों के सामने फेल साबित हो रहा है।
पुलिस और बंदी रक्षकों की लापरवाही से बदमाश अपने मंसूबे में सफल हो रहे हैं। इतना ही नहीं बदमाश नए-नए तरीके इजाद कर जेल प्रशासन से लगायत पुलिस तक को चकमा दे रहे हैं। पुलिस की सोच से आगे का प्लान तैयार कर वह फरार हो जा रहे हैं। छह माह के भीतर दो बंदी फरार हुए, जिनका सुराग पुलिस को नहीं मिल पाया है। एक बंदी ने तो फर्जी मुहर बनवाकर जेल के अंदर हाथ पर लगा लिया और मुलाकातियों के साथ फरार हो गया। जबकि दूसरा बंदी अस्पताल के शौचालय का जंगला तोड़कर फरार हो गया। सबसे दुस्साहस घटना 2006 में हुई। फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला के निजी सचिव का हत्यारोपी दीपक सिंह उर्फ दीपू जेल की चहारदीवारी फांदकर फरार हो गया। इसके बारे में 17 साल बाद भी पता नहीं चल सका है।
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केस- एक
- एक नवंबर को जिला अस्पताल से अयोध्या जनपद के इनायत थाना क्षेत्र के प्रवीण उर्फ प्रदीप पाल शौचालय का खिड़की तोड़कर जिले से फरार हो गया। इसने 28 सितंबर को कुशीनगर जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र के मेहदीगंज में एक महिला की हत्या की थी। जिसके बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है। इस पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
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केस-दो
- 29 दिसंबर को जेल में लगने वाली मुलाकातियों की मुहर हाथ पर लगाकर अमन पांडेय फरार हो गया था। नए तरीके का प्रयोग कर फरार अमन के बारे में पुलिस को अभी तक सुराग नहीं मिल पाया है। हालांकि पुलिस इस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर चुकी है।
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केस-तीन
- फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सचिव अजीत देवानी की हत्या 30 जून 2011 को हुई थी। इस मामले में चोलापुर थाना क्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी दीपक सिंह उर्फ दीपू नामजद हुआ था। यह बदमाश देवरिया जेल में बंद था और 2006 में फरार हो गया। पर देवरिया पुलिस के हाथ नहीं लग सका। इसके बारे में चर्चा है कि 2009 में बिहार पुलिस ने सासाराम में मुठभेड़ के दौरान मार दिया है, लेकिन अभी तक पुलिस रिकार्ड में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
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यह भी हो चुके हैं फरार
- 29 जुलाई 2019 को शातिर बदमाश सलेमपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के बबलू उर्फ अनूप सिंह पेशी पर गोंडा से देवरिया लाया जा रहा था। वह फरार हो गया था। इस बदमाश को पुलिस ने कुछ दिन बाद गिरफ्तार कर लिया था।
- खुखुंदू थाना क्षेत्र के नूनखार गांव निवासी विवेक मिश्रा जिला अस्पताल से 2013 में फरार हो गया था। जो काफी दिनों बाद पकड़ा गया था। गोरखपुर का शातिर बदमाश चंदन सिंह पेशी पर आते समय बैतालपुर के पास फरार हो गया था। जिसे करीब डेढ़ साल बाद बाराबंकी पुलिस पकड़ पाई थी। मऊ जिले से पेशी के लिए आ रहा शातिर बदमाश सुनील ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था।
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दस साल बाद पकड़ा गया फरार कैदी
- कुशीनगर जनपद के थाना क्षेत्र जटहां बाजार निवासी इंद्रासन चौरसिया और रामनिवास चौरसिया की 2007 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कुशीनगर जनपद में ही किशुन देवी यादव और वीरबल की हत्या हो गई। इसमें राम आश्रय केवट नामजद हुआ। देवरिया जेल गेट से वह 2011 में पुलिस को चकमा देकर दो अन्य साथियों के साथ फरार हो गया। इस बदमाश को पुलिस ने सितंबर 2022 में पकड़ा था। जिस पर 50 हजार रुपये का इनाम था।
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कोट
कस्टडी फरार बदमाशों पर इनाम घोषित किया गया है। इसके लिए एसओजी और पुलिस की टीम को लगाया गया है। इनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा चुकी है। गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। कस्टडी से फरार शातिरों की लोकेशन ट्रेस करने में थोड़ा समय लगता है। -संकल्प शर्मा, एसपी
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पुलिस कस्टडी हो या जेल की चहारदीवारी बदमाश चकमा देने में माहिर हैं। एक बार हथकड़ी से फिसलने पर वह खाकी की नजरों से ओझल हो जा रहे हैं। उन्हें पकड़ने में दशकों का समय बीत जा रहा है। इसके बाद भी वह पुलिस के हाथ नहीं लग रहे हैं। पुलिस का नेटवर्क बदमाशों के सामने फेल साबित हो रहा है।
पुलिस और बंदी रक्षकों की लापरवाही से बदमाश अपने मंसूबे में सफल हो रहे हैं। इतना ही नहीं बदमाश नए-नए तरीके इजाद कर जेल प्रशासन से लगायत पुलिस तक को चकमा दे रहे हैं। पुलिस की सोच से आगे का प्लान तैयार कर वह फरार हो जा रहे हैं। छह माह के भीतर दो बंदी फरार हुए, जिनका सुराग पुलिस को नहीं मिल पाया है। एक बंदी ने तो फर्जी मुहर बनवाकर जेल के अंदर हाथ पर लगा लिया और मुलाकातियों के साथ फरार हो गया। जबकि दूसरा बंदी अस्पताल के शौचालय का जंगला तोड़कर फरार हो गया। सबसे दुस्साहस घटना 2006 में हुई। फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला के निजी सचिव का हत्यारोपी दीपक सिंह उर्फ दीपू जेल की चहारदीवारी फांदकर फरार हो गया। इसके बारे में 17 साल बाद भी पता नहीं चल सका है।
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केस- एक
- एक नवंबर को जिला अस्पताल से अयोध्या जनपद के इनायत थाना क्षेत्र के प्रवीण उर्फ प्रदीप पाल शौचालय का खिड़की तोड़कर जिले से फरार हो गया। इसने 28 सितंबर को कुशीनगर जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र के मेहदीगंज में एक महिला की हत्या की थी। जिसके बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है। इस पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
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केस-दो
- 29 दिसंबर को जेल में लगने वाली मुलाकातियों की मुहर हाथ पर लगाकर अमन पांडेय फरार हो गया था। नए तरीके का प्रयोग कर फरार अमन के बारे में पुलिस को अभी तक सुराग नहीं मिल पाया है। हालांकि पुलिस इस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर चुकी है।
केस-तीन
- फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सचिव अजीत देवानी की हत्या 30 जून 2011 को हुई थी। इस मामले में चोलापुर थाना क्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी दीपक सिंह उर्फ दीपू नामजद हुआ था। यह बदमाश देवरिया जेल में बंद था और 2006 में फरार हो गया। पर देवरिया पुलिस के हाथ नहीं लग सका। इसके बारे में चर्चा है कि 2009 में बिहार पुलिस ने सासाराम में मुठभेड़ के दौरान मार दिया है, लेकिन अभी तक पुलिस रिकार्ड में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह भी हो चुके हैं फरार
- 29 जुलाई 2019 को शातिर बदमाश सलेमपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के बबलू उर्फ अनूप सिंह पेशी पर गोंडा से देवरिया लाया जा रहा था। वह फरार हो गया था। इस बदमाश को पुलिस ने कुछ दिन बाद गिरफ्तार कर लिया था।
- खुखुंदू थाना क्षेत्र के नूनखार गांव निवासी विवेक मिश्रा जिला अस्पताल से 2013 में फरार हो गया था। जो काफी दिनों बाद पकड़ा गया था। गोरखपुर का शातिर बदमाश चंदन सिंह पेशी पर आते समय बैतालपुर के पास फरार हो गया था। जिसे करीब डेढ़ साल बाद बाराबंकी पुलिस पकड़ पाई थी। मऊ जिले से पेशी के लिए आ रहा शातिर बदमाश सुनील ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था।
दस साल बाद पकड़ा गया फरार कैदी
- कुशीनगर जनपद के थाना क्षेत्र जटहां बाजार निवासी इंद्रासन चौरसिया और रामनिवास चौरसिया की 2007 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कुशीनगर जनपद में ही किशुन देवी यादव और वीरबल की हत्या हो गई। इसमें राम आश्रय केवट नामजद हुआ। देवरिया जेल गेट से वह 2011 में पुलिस को चकमा देकर दो अन्य साथियों के साथ फरार हो गया। इस बदमाश को पुलिस ने सितंबर 2022 में पकड़ा था। जिस पर 50 हजार रुपये का इनाम था।
कोट
कस्टडी फरार बदमाशों पर इनाम घोषित किया गया है। इसके लिए एसओजी और पुलिस की टीम को लगाया गया है। इनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा चुकी है। गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। कस्टडी से फरार शातिरों की लोकेशन ट्रेस करने में थोड़ा समय लगता है। -संकल्प शर्मा, एसपी