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छह वर्ष बाद सऊदी अरब से वतन लौटा लार का दुर्गेश
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छह वर्ष बाद सऊदी अरब से वतन लौटा लार का दुर्गेश
लार। छह वर्ष से सऊदी अरब में फंसा दुर्गेश 26 अक्तूूबर को वतन लौट आया। यहां आते ही उसने भारत की मिट्टी को माथे से लगाया और फोन पर ‘अमर उजाला’ को धन्यवाद दिया। भारतीय राजदूत ने तीन महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद उनकी सकुशल वतन वापसी कराई है। दुर्गेश के दिल्ली पहुंचते ही परिजनों में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी।
लार नगर के भरटोलिया वार्ड निवासी गोपाल वर्मा के तीन बेटे हैं। परिवार की माली हालत को देखते हुए शादी के चार माह बाद बड़ा बेटा दुर्गेश वर्मा सऊदी चला गया। यहां उसे अलखब्जी शहर में एक (कपिल) मालिक के घर काम मिल गया। कुछ माह तक सब ठीक चला। इसके बाद मालिक ने तनख्वाह देना बंद कर दिया था। आरोप है कि पेमेंट मांगने पर वह कमरे में बंद कर पिटाई करता था। जीने के लिए सिर्फ भोजन देता था। इस तरह करीब 6 वर्ष बीत गए। परेशान दुर्गेश ने किसी तरह अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर सऊदी अरब में फंसे होने की जानकारी फेसबुक पर दी। ‘अमर उजाला’ ने 13 जुलाई के अंक में ‘सऊदी में फंसा है लार का दुर्गेश’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर की कटिंग को दो दर्जन से अधिक लोगों ने भारतीय राजदूत और एसएमबी को ट्वीट किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय राजदूत ने फोन कर दुर्गेश से बातचीत कर उसका हाल जाना। वहां रह रहे भाटपाररानी तहसील के कटाई टिकट गांव निवासी इंजीनियर बृजेश यादव ने भी दुर्गेश के मालिक से मिलकर दुर्गेश को मुक्त करने का निवेदन किया। तीन माह बाद इन सभी की मदद से दुर्गेश 26 अक्तूूबर को दिल्ली एयर पोर्ट पहुंचा। यहां पहुंचते ही उसने अपने वतन की मिट्टी को माथे से लगा लिया। फोन कर अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उसने बताया कि भारत आने में ‘अमर उजाला’ की अहम भूमिका है। दुर्गेश के आने की जानकारी होते ही परिजनों में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी। हालांकि एहतियात के तौर पर दुर्गेश को 2 नवंबर तक दिल्ली के एयरपोर्ट पर क्वारंटीन किया गया है।
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लार। छह वर्ष से सऊदी अरब में फंसा दुर्गेश 26 अक्तूूबर को वतन लौट आया। यहां आते ही उसने भारत की मिट्टी को माथे से लगाया और फोन पर ‘अमर उजाला’ को धन्यवाद दिया। भारतीय राजदूत ने तीन महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद उनकी सकुशल वतन वापसी कराई है। दुर्गेश के दिल्ली पहुंचते ही परिजनों में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी।
लार नगर के भरटोलिया वार्ड निवासी गोपाल वर्मा के तीन बेटे हैं। परिवार की माली हालत को देखते हुए शादी के चार माह बाद बड़ा बेटा दुर्गेश वर्मा सऊदी चला गया। यहां उसे अलखब्जी शहर में एक (कपिल) मालिक के घर काम मिल गया। कुछ माह तक सब ठीक चला। इसके बाद मालिक ने तनख्वाह देना बंद कर दिया था। आरोप है कि पेमेंट मांगने पर वह कमरे में बंद कर पिटाई करता था। जीने के लिए सिर्फ भोजन देता था। इस तरह करीब 6 वर्ष बीत गए। परेशान दुर्गेश ने किसी तरह अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर सऊदी अरब में फंसे होने की जानकारी फेसबुक पर दी। ‘अमर उजाला’ ने 13 जुलाई के अंक में ‘सऊदी में फंसा है लार का दुर्गेश’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर की कटिंग को दो दर्जन से अधिक लोगों ने भारतीय राजदूत और एसएमबी को ट्वीट किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय राजदूत ने फोन कर दुर्गेश से बातचीत कर उसका हाल जाना। वहां रह रहे भाटपाररानी तहसील के कटाई टिकट गांव निवासी इंजीनियर बृजेश यादव ने भी दुर्गेश के मालिक से मिलकर दुर्गेश को मुक्त करने का निवेदन किया। तीन माह बाद इन सभी की मदद से दुर्गेश 26 अक्तूूबर को दिल्ली एयर पोर्ट पहुंचा। यहां पहुंचते ही उसने अपने वतन की मिट्टी को माथे से लगा लिया। फोन कर अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उसने बताया कि भारत आने में ‘अमर उजाला’ की अहम भूमिका है। दुर्गेश के आने की जानकारी होते ही परिजनों में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी। हालांकि एहतियात के तौर पर दुर्गेश को 2 नवंबर तक दिल्ली के एयरपोर्ट पर क्वारंटीन किया गया है।
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