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Deoria News: रियल टाइम खतौनी... चढ़ावा बचेगा मगर चूके तो पेच लंबा फंसेगा

Fri, 26 May 2023 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Fri, 26 May 2023 12:05 AM IST
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Real time Khatauni... The offering will be saved but if missed, the problem will be stuck for a long time.
रियल टाइम खतौनी लेने के लिए सदर तहसील में कतार में खडे लोग।संवाद
जुलाई तक जनपद में लागू होगी व्यवस्था, खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए तहसील का नहीं काटना पड़ेगा चक्कर
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जुलाई तक जनपद में ऐसी व्यवस्था लागू हो जाएगी कि भूमि बैनामा कराने के बाद खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए तहसील का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। न ही चढ़ावा देना पड़ेगा। यह संभव होगा रियल टाइम खतौनी से। इसके तहत बैनामा होने के बाद 24 घंटे के भीतर खतौनी पर नाम चढ़ जाएगा। इसके लिए कार्य तेजी से हो रहा है। जिले के करीब 31 गांवों की खतौनी की रियल टाइम व्यवस्था लागू हो गई है। इसी महीने यह संख्या सौ के पार हो जानी है। इसके लिए तहसील से लगायत राजस्व परिषद तक तेजी से तैयारी चल रही है।
जिले के 31 गांवों में ट्रायल के तौर पर रियल टाइम खतौनी सिस्टम लागू किया गया है। मगर इसमें कुछ तकनीकी गड़बड़ी सामने आ रही है। साॅफ्टवेयर में गड़बड़ी और सर्वर धीमा चलने के कारण हर रोज महज दस खतौनी ही निकल पा रही है। इसकी रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजी गई है, ताकि सुधार हो सके। जिले में 31 मई तक 200 गांवों की खतौनियों को रियल टाइम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन जो रफ्तार है, इससे लगता है कि जुलाई तक 2232 गांवों की खतौनी रियल टाइम हो पाना संभव नहीं है। सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो महज 10 से 15 प्रतिशत काम ही हो पाया है, 31 मई तक सदर तहसील के 46 गांवों को रियल टाइम खतौनी से जोड़ने की योजना थी, लेकिन अभी दस ही गांव जुड़ पाए हैं, इसमें भी खामियां आ रही हैं। जिन जगहों पर रियल टाइम खतौनी 19 काॅलम नहीं है, वहां पर अभी भी 13 काॅलम की खतौनी मिल रही है।
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नाम चढ़वाने के लिए लेखपालों के दर पर टेकने पड़ते थे मत्थे
भूमि के विक्रेता का नाम हटाकर उसकी जगह पर क्रेता का नाम चढ़वाने के लिए तहसील में फाइल की जाती है। तब इसकी जांच लेखपाल करते हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही नाम चढ़ता है। इसमें कई ऐसे मामलों की शिकायत आला अफसरों तक पहुंची कि बिना चढ़ावा दिए उसका खारिज-दाखिल नहीं होता है। अगर वह उनकी बात मान ले तो उसका नाम खतौनी में चढ़ जाता था। अगर किसी ने भेंट देने में चूक कर दी तो उसे कई महीनों तक तहसील का चक्कर लगाना पड़ता था। कभी लेखपाल नहीं तो कभी अफसर नहीं मिलते थे। इसके चक्कर में 45 दिन की जगह चार से पांच माह का समय लग जाता था।
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रियल टाइम खतौनी के फायदे
- भूमि का बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर नई खतौनी जारी जो जाएगी, जिसमें विक्रेता की जगह क्रेता का नाम अंकित हो जाएगा।
- इस खतौनी से गाटा संख्या में खातेदार के नाम के आगे उनके हिस्से की भूमि का जिक्र होगा।
- खतौनी के लिए तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा
- जमीन के कारोबारी या खरीददार किसी लालच में पड़ कर आपत्ति नहीं लगा सकेंगे।
- हिस्सा का जिक्र होने से कोई अधिक भूमि नहीं बेच पाएगा और न ही कब्जा कर पाएगा।
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जनपद में करीब 1200 हैं मामले लंबित, 24 घंटे में मिलेगी खतौनी
संपत्ति का बैनामा कराने के बाद भी करीब 1200 ऐसे मामले हैं जो खारिज-दाखिल में अटके हुए हैं। जिनका समय 45 दिन से अधिक हो चुका है। रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने के बाद 24 घंटे के भीतर नाम चढ़ जाएगा। लेखपाल की रिपोर्ट से लगायत फाइल करने तक लोगों को उलझना पड़ता था, इससे निजात मिलेगी। रियल टाइम खतौनी होने से कानूनी दाव पेंच में पड़कर खारिज-दाखिल की देरी का खेल रुकेगा।
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नई व्यवस्था से राहत, मगर फर्जीवाड़े का तोड़ जरूरी
रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद तहसीलदारों की दौड़ लगाने और चढ़ावा देने से लोगों को राहत मिलेगी। इतना ही नहीं खाताधारकों को अपना हिस्सा तय करने में दिक्कत भी नहीं होगी। इससे दूसरे का हिस्सा कोई बेच भी नहीं पाएगा, लेकिन जानकारों की बातों पर गौर किया जाए तो जमीन का फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। बैनामा के 24 घंटे के भीतर की खतौनी पर नाम चढ़ जाने से जब तक जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी होगी तब तक जमीन खरीदने वाले के नाम दर्ज हो जाएगी। इसके बाद वह किसी और को दो से तीन दिन के भीतर जमीन बैनामा कर सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान क्रेता व विक्रेता दोनों को सूचना भेजी जाती है, ताकि आपत्ति दाखिल हो सके। इससे कई लोगों को राहत भी मिलती है। इसको लेकर अधिवक्ता भी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि बैनामा के बाद इस्तेहार की प्रक्रिया होती है, लेकिन रियल टाइम खतौनी में यह व्यवस्था नहीं है, इसका उपाय होना चाहिए।
----------------- कोट: - फोटो
- चढ़ावा देने के बाद ही मिलती थी खतौनी
- कैथवलिया निवासी अमरजीत ने बताया कि भूमि बैनामा कराने के बाद कई महीने तक खतौनी में नाम चढ़वाने के लिए चक्कर लगाना पड़ा था। रजिस्ट्री आफिस से लेकर खारिज-दाखिल में काफी समय लगा। रियल टाइम व्यवस्था लागू होने पर रहत मिली है, लेकिन सर्वर डाउन होने से घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है।
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- फोटो
- भगवानपुर निवासी रामअवतार चौहान ने बताया कि रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था ठीक है, लेकिन इसमें भी गड़बड़ी आ रही है। सर्वर काम न करने के कारण बहुत कम लोगों को खतौनी मिल पा रही है। पहले तो खतौनी में नाम चढ़वाने के लिए छह महीने का समय लग जाता था।
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कोट:
रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था में इस समय दिक्कतें आ रही हैं। सदर तहसील के दस गांवों में यह व्यवस्था लागू हुई है। इसे जुलाई तक पूरा हो जाना है। सर्वर और साफ्टवेयर में खामी के कारण हर रोज दो-तीन खतौनी ही निकल पा रही है। प्रयास है कि 31 मई तक 46 गांवों को रियल टाइम खतौनी उपलब्ध कराई जाए। जो खामियां हैं उसके लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया है।
आनंद कुमार, सदर तहसीलदार
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फर्जीवाड़ा रोकने के लिए हो उपाय
- फोटो
रियल टाइम खतौनी में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि आपत्ति करने का मौका नहीं मिलेगा। अगर किसी भूमि बैनामा हो गया तो 24 घंटे के भीतर ही क्रेता का नाम चढ़ जाएगा। इसके बाद पीड़ित कायमी दाखिल कर चक्कर लगाता रह जाएगा, क्योंकि सब कुछ आन लाइन होने से सीधे नाम चढ़ जाएगा। पहले तकनीकी खामियों को दूर करने की जरूरत है। -युगुल किशोर तिवारी, पूर्व अध्यक्ष तहसील बार एसोसिएशन

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- फोटो
- रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण मुख्य है। पर जो व्यवस्था लागू हो रही है, केवल कागजी खानापूर्ति है। अगर किसी खाते में कई हिस्सेदार हैं और उसकी भी संतान हैं तो उसके अंश का निर्धारण करना मुश्किल होगा। इससे फर्जीवाड़ा रुकने वाला नहीं है। इस व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने की जरूरत है।
अरविंद गुप्ता, अध्यक्ष तहसील बार एसोसिएशन
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