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Deoria News: रातभर जयकारों से गूंजता रहा राणी सती दादी मंदिर
Sun, 24 Aug 2025 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 24 Aug 2025 12:09 AM IST
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राणी सती दादी की सजी झांंकी।
भजन-कीर्तन और राणी सती दादी के लिए हुआ पाठ
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। राणी सती दादी मंदिर
में भादो महोत्सव शुक्रवार से शुरू होकर शनिवार की सुबह तक चला। भक्तों ने राणी सती के महात्म्य का पाठ किया। मंदिर जयकारों से रातभर गूंजता रहा।
श्याम और गिराधरी शर्मा ने बताया कि राणी सती दादी की कहानी महाभारत काल से जुडी हुई है। युद्ध के दौरान चक्रव्यूह में घिरे अभिमन्यु की वीरगति के बाद पत्नी उत्तरा सती होने जा रही थीं। उन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने सती होने से रोका और कहा कि तुम कलयुग में सती रूप को प्राप्त करोगी और लोग तुम्हें राणी सती दारी के नाम से पूजेंगे। यही उत्तरा कलयुग में राजस्थान में गुरसामल सेठ के वहां नारायणी नाम से जन्म लिया।
बड़े होने पर इनके विवाह को संपन्न कराने की गुरसामल की तमाम कोशिश बेकार जा रही थी. तब नारायणी ने खुद तनधन नाम के एक सेठ के बारे में अपने पिता को बताया जो वीर अभिमन्यु के रूप में जन्म लिए थे। फिर नारायणी का विवाह तनधन के साथ हुआ। एक बार नारायणी, तनधन के साथ यात्रा पर थीं। इसी दौरान एक नवाब शासक की सेना उनके रथ पर हमला कर दिया। इसमें उनके पति मारे गए। पति के मारे जाने से आहत दादी ने दुश्मन को स्वयं मार पति की चिता पर स्वयं जल कर सती हो गईं। इस दौरान भजन-कीर्तन में लक्ष्मण प्रसाद अग्रवाल, कुंजन देवी, भरत अग्रवाल, रूपक अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, मयूर अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। राणी सती दादी मंदिर
में भादो महोत्सव शुक्रवार से शुरू होकर शनिवार की सुबह तक चला। भक्तों ने राणी सती के महात्म्य का पाठ किया। मंदिर जयकारों से रातभर गूंजता रहा।
श्याम और गिराधरी शर्मा ने बताया कि राणी सती दादी की कहानी महाभारत काल से जुडी हुई है। युद्ध के दौरान चक्रव्यूह में घिरे अभिमन्यु की वीरगति के बाद पत्नी उत्तरा सती होने जा रही थीं। उन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने सती होने से रोका और कहा कि तुम कलयुग में सती रूप को प्राप्त करोगी और लोग तुम्हें राणी सती दारी के नाम से पूजेंगे। यही उत्तरा कलयुग में राजस्थान में गुरसामल सेठ के वहां नारायणी नाम से जन्म लिया।
बड़े होने पर इनके विवाह को संपन्न कराने की गुरसामल की तमाम कोशिश बेकार जा रही थी. तब नारायणी ने खुद तनधन नाम के एक सेठ के बारे में अपने पिता को बताया जो वीर अभिमन्यु के रूप में जन्म लिए थे। फिर नारायणी का विवाह तनधन के साथ हुआ। एक बार नारायणी, तनधन के साथ यात्रा पर थीं। इसी दौरान एक नवाब शासक की सेना उनके रथ पर हमला कर दिया। इसमें उनके पति मारे गए। पति के मारे जाने से आहत दादी ने दुश्मन को स्वयं मार पति की चिता पर स्वयं जल कर सती हो गईं। इस दौरान भजन-कीर्तन में लक्ष्मण प्रसाद अग्रवाल, कुंजन देवी, भरत अग्रवाल, रूपक अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, मयूर अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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