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रियल टाइम अटेंडेंस : जनपद में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही व्यवस्था, शिक्षक संगठनों ने शुरू किया विरोध
Mon, 04 Mar 2024 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:09 AM IST
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2120 परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति के लिए दिए गए हैं टैबलेट
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए लागू की गई रियल टाइम अटेंडेंस व्यवस्था को अभी रफ्तार नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि अधिकतर विद्यालयों ने तो अभी टैबलेट का उपयोग करना ही नहीं शुरू किया है। इधर विभाग की ओर से इसे लेकर सख्ती का मूड बनाते ही शिक्षक संगठनों की ओर से इसका विरोध शुरू हो गया है।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति, मिड-डे मील की रिकार्डिंग व फल-दूध वितरण की तस्वीर व संबंधित अन्य जानकारी फरवरी माह से मांगी जा रही है। शासन को उम्मीद है कि इससे प्राथमिक विद्यालयों की दशा व दिशा में सुधार होगा और पठन-पाठन व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, जिले के अधिकतर विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों ने इसका उपयोग करना ही शुरू नहीं किया है। जबकि बच्चों की उपस्थिति, मिड-डे मील समेत अन्य कार्यों को डिजिटल करने की प्रक्रिया चल रही है। टैबलेट का प्रयोग नहीं किए जाने से इस नई व्यवस्था को यहां लागू ही नहीं हो पा रही है।
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शिक्षक संगठनों के विरोध ने अधिकारियों के तनाव को और बढ़ा दिया है। जूनियर शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष हेमा त्रिपाठी ने बताया कि संगठन नई व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि टैबलेट में सिम हम अपनी आईडी वाला क्यों उपयोग करें। अगर हेडमास्टर दो साल बाद सेवानिवृत्त हो जाएगा तो क्या सिम उसे दे दिया जाएगा। शिक्षक किसी कारण से 15 मिनट लेट पहुंचता है तो क्या उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
सभी विद्यालयों में नहीं पहुंचा है टैबलेट
जिले के सभी परिषदीय स्कूलों में अभी टैबलेट नहीं पहुंचा है। इससे भी नई व्यवस्था को लागू करने में परेशानी हो रही है। जहां नवंबर व दिसंबर माह में दे दिया गया, वहां प्रशिक्षण नहीं कराया गया, जबकि शिक्षकों की ओर से लगातार इसकी मांग की जाती रही है। डीसी प्रशिक्षण स्वप्नेश मंगलम ने बताया कि जिले के कुल 2120 परिषदीय विद्यालयों से पहले चरण में 1798 विद्यालयों को कहीं दो कहीं एक टैबलेब दिया गया है। कुल 3704 का वितरण किया जा चुका है। इसके लिए दो यू-ट्यूब सत्र भी चले हैं। जनपद में भी यह व्यवस्था जल्द लागू हो, इसके लिए यहां भी शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
कोट
विद्यालयों की पंजिकाएं एवं शिक्षकों की ऑनलाइन डिजिटल पंजिका, डिजिटल उपस्थिति के निर्देश शिक्षक हित में नहीं हैं। बिना संसाधन के यह कैसे पूरा होगा। इससे शिक्षकों की निजता का हनन होगा। संगठन इसके विरोध में सात मार्च को डीएम को ज्ञापन देगा।
-विजय कुमार सिंह, अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
सरकार ने टेंडर कर सभी विद्यालयों में टैबलेट दे दिया। सिम व नेट के लिए 1500-1500 रुपये दिया गया है। संबंधित शिक्षक अपनी आईडी से सिम लेगा। अगर उसका तबादला हो जाता है तो जो सिम टैबलेट में लगा है, उसका दुरुपयोग होने की स्थिति में पहले वाला शिक्षक ही जिम्मेदार माना जाएगा। अच्छा यह होता कि विभाग की ओर से सीयूजी नंबर जारी कर सिम दिए जाते, ताकि टैबलेट संचालन में सहूलियत होती।
-अनिल यादव, उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष
कोट
परिषदीय विद्यालयों में टैबलेट पहले ही दिए जा चुके हैं। रियल टाइम अटेंडेस व्यवस्था को जनपद में व्यवस्थित ढंग से लागू करने के लिए सभी बीईओ को निर्देश दिए जा चुके हैं। धीरे-धीरे यह यहां बेहतर ढंग से होगा। प्रदेश स्तर पर इस मामले में हमारा जिला 43वें स्थान पर हैं। एक मार्च को सभी ब्लॉकों में शिक्षकों का प्रशिक्षण भी कराया गया है। यू-ट्यूब सेशन में भी शिक्षकों को इस बारे में बताया जा चुका है।
-शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए लागू की गई रियल टाइम अटेंडेंस व्यवस्था को अभी रफ्तार नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि अधिकतर विद्यालयों ने तो अभी टैबलेट का उपयोग करना ही नहीं शुरू किया है। इधर विभाग की ओर से इसे लेकर सख्ती का मूड बनाते ही शिक्षक संगठनों की ओर से इसका विरोध शुरू हो गया है।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति, मिड-डे मील की रिकार्डिंग व फल-दूध वितरण की तस्वीर व संबंधित अन्य जानकारी फरवरी माह से मांगी जा रही है। शासन को उम्मीद है कि इससे प्राथमिक विद्यालयों की दशा व दिशा में सुधार होगा और पठन-पाठन व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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हालांकि, जिले के अधिकतर विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों ने इसका उपयोग करना ही शुरू नहीं किया है। जबकि बच्चों की उपस्थिति, मिड-डे मील समेत अन्य कार्यों को डिजिटल करने की प्रक्रिया चल रही है। टैबलेट का प्रयोग नहीं किए जाने से इस नई व्यवस्था को यहां लागू ही नहीं हो पा रही है।
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शिक्षक संगठनों के विरोध ने अधिकारियों के तनाव को और बढ़ा दिया है। जूनियर शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष हेमा त्रिपाठी ने बताया कि संगठन नई व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि टैबलेट में सिम हम अपनी आईडी वाला क्यों उपयोग करें। अगर हेडमास्टर दो साल बाद सेवानिवृत्त हो जाएगा तो क्या सिम उसे दे दिया जाएगा। शिक्षक किसी कारण से 15 मिनट लेट पहुंचता है तो क्या उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
सभी विद्यालयों में नहीं पहुंचा है टैबलेट
जिले के सभी परिषदीय स्कूलों में अभी टैबलेट नहीं पहुंचा है। इससे भी नई व्यवस्था को लागू करने में परेशानी हो रही है। जहां नवंबर व दिसंबर माह में दे दिया गया, वहां प्रशिक्षण नहीं कराया गया, जबकि शिक्षकों की ओर से लगातार इसकी मांग की जाती रही है। डीसी प्रशिक्षण स्वप्नेश मंगलम ने बताया कि जिले के कुल 2120 परिषदीय विद्यालयों से पहले चरण में 1798 विद्यालयों को कहीं दो कहीं एक टैबलेब दिया गया है। कुल 3704 का वितरण किया जा चुका है। इसके लिए दो यू-ट्यूब सत्र भी चले हैं। जनपद में भी यह व्यवस्था जल्द लागू हो, इसके लिए यहां भी शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
कोट
विद्यालयों की पंजिकाएं एवं शिक्षकों की ऑनलाइन डिजिटल पंजिका, डिजिटल उपस्थिति के निर्देश शिक्षक हित में नहीं हैं। बिना संसाधन के यह कैसे पूरा होगा। इससे शिक्षकों की निजता का हनन होगा। संगठन इसके विरोध में सात मार्च को डीएम को ज्ञापन देगा।
-विजय कुमार सिंह, अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
सरकार ने टेंडर कर सभी विद्यालयों में टैबलेट दे दिया। सिम व नेट के लिए 1500-1500 रुपये दिया गया है। संबंधित शिक्षक अपनी आईडी से सिम लेगा। अगर उसका तबादला हो जाता है तो जो सिम टैबलेट में लगा है, उसका दुरुपयोग होने की स्थिति में पहले वाला शिक्षक ही जिम्मेदार माना जाएगा। अच्छा यह होता कि विभाग की ओर से सीयूजी नंबर जारी कर सिम दिए जाते, ताकि टैबलेट संचालन में सहूलियत होती।
-अनिल यादव, उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष
कोट
परिषदीय विद्यालयों में टैबलेट पहले ही दिए जा चुके हैं। रियल टाइम अटेंडेस व्यवस्था को जनपद में व्यवस्थित ढंग से लागू करने के लिए सभी बीईओ को निर्देश दिए जा चुके हैं। धीरे-धीरे यह यहां बेहतर ढंग से होगा। प्रदेश स्तर पर इस मामले में हमारा जिला 43वें स्थान पर हैं। एक मार्च को सभी ब्लॉकों में शिक्षकों का प्रशिक्षण भी कराया गया है। यू-ट्यूब सेशन में भी शिक्षकों को इस बारे में बताया जा चुका है।
-शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए