Deoria: सरकारी जमीन से बेदखली की सुनवाई में साक्ष्य नहीं दे सके प्रेमचंद के अधिवक्ता, अब आठ को होगी सुनवाई
छह अक्तूबर को प्रेमचंद के पिता रामभवन यादव, गोरख यादव और परमहंश यादव को नोटिस जारी कर सात अक्तूबर को पक्ष रखने का आदेश दिया। नौ अक्तूबर को 15 सदस्यीय राजस्व टीम ने दूसरी बार पैमाइश की, जिसमें प्रेमचंद के पिता रामभवन यादव,गोरख यादव और परमहंस का मकान खलिहान की जमीन में पाया गया।
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देवरिया जिले में फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में नरसंहार के बाद सरकारी जमीन से बेदखली के मामले में जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चल रही सुनवाई में मृतक प्रेमचंद यादव पक्ष के अधिवक्ता साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसकी वजह से एक सप्ताह तक सुनवाई टल गई और अगली तिथि आठ नवंबर तय की गई।
रूद्रपुर कोतवाली फतेहपुर गांव के लेहड़ा टोला में दो अक्तूबर को भूमि विवाद को लेकर नरसंहार हो गया। इसमें एक पक्ष के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव और दूसरे पक्ष के सत्यप्रकाश दूबे समेत परिवार के पांच लोगों की हत्या हुई थी।
चार अक्तूबर को रुद्रपुर एसडीएम न्यायिक सीमा पांडेय के नेतृत्व में राजस्व टीम पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव के घर और आसपास की जमीन का पैमाइश की तो तीन आरोपियों का घर खलिहान की जमीन में बना पाया गया। रूद्रपुर तहसीलदार कोर्ट में सरकारी जमीन से बेदखली के लिए वाद दाखिल किया गया।
छह अक्तूबर को प्रेमचंद के पिता रामभवन यादव, गोरख यादव और परमहंश यादव को नोटिस जारी कर सात अक्तूबर को पक्ष रखने का आदेश दिया। पहली बार की पैमाइश पर सवाल उठाने के बाद नौ अक्तूबर को 15 सदस्यीय राजस्व टीम ने दूसरी बार पैमाइश की, जिसमें प्रेमचंद के पिता रामभवन यादव,गोरख यादव और परमहंस का मकान खलिहान की जमीन में पाया गया।
यह रिपोर्ट भी रूद्रपुर के तहसीलदार न्यायालय में राजस्व टीम ने प्रस्तुत किया। 11 अक्तूबर को रूद्रपुर के तहसील अरुण कुमार ने जमीन से बेदखली का आदेश दिया। इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। इसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 16 अक्तूबर को बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए डीएम को निर्देश दिया कि वे इस मामले की तय सीमा के अंदर सुनाई करें। इसकी सुनाई जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चल रहा है।
बुधवार को इसकी सुनाई जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में हुई। प्रेमचंद यादव के अधिवक्ता रामनगीना यादव और गोपी यादव ने बहस की। जिस पर जिला शासकीय अधिवक्ता रेवेन्यू नवनीत मालवीय ने आराजी से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन विपक्षी के अधिवक्ताओं ने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। अब अगली तिथि 8 नवंबर को पड़ी, जिस पर सुनवाई होगी।