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अपने सत्य लेखन के कारण प्रासंगिक हैं प्रेमचंद : प्रो. विमलेश मिश्र
Tue, 01 Aug 2023 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 01 Aug 2023 12:14 AM IST
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देवरिया। बाबा राघव दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। हिंदी विभाग ने प्रेमचंद की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. विमलेश मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद का लेखन सत्य का लेखन है, इसीलिए वह आज भी प्रासंगिक है। आज का किसान प्रेमचंद का किसान नहीं है, क्योंकि प्रेमचंद का किसान अपने खेतों से अधिक प्रेम करता था। आज का किसान चाहता है कि उसका खेत बगल से गुजर रहे एक्सप्रेस वे में आ जाए। सभ्यता का रहस्य कहानी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज जो व्यक्ति जितना ही अपने दुर्गुणों पर पर्दा डालता है वही सबसे अधिक सभ्य है। प्रेमचंद जिस राष्ट्र का सपना देखते हैं उसमें जाति-वर्ग से भिन्न सब भारतवासी हैं।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील यादव ने कहा कि प्रेमचंद के लेखन का केंद्रीय लक्ष्य आर्थिक मुक्ति का है। प्रेमचंद की कहानियों के पात्र महाजन एवं सामंती व्यवस्था के शोषण के शिकार हैं। मुख्य वक्ता बुद्ध पीजी कॉलेज, कुशीनगर के सहायक आचार्य डॉ. गौरव तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद अपने साहित्य में नए सौंदर्य बोध को प्रस्तुत करते हैं उनके नायक दलित, स्त्री एवं निम्न वर्ग से आते हैं जो मानवीय संवेदना से भरे होते हैं तथा उच्च वर्ग के पात्र दोहरे चरित्र के कारण समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं एवं निम्न वर्ग का शोषण करते हैं। विशिष्ट अतिथि वीएसएवी पीजी कॉलेज गोला, गोरखपुर के प्राचार्य डॉ. फूलचंद तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों एवं उपन्यासों में प्रत्येक पात्र किसान संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है जिसका प्रेमचंद ने बड़ी गंभीरता से चित्रण किया है। प्रेमचंद के समय का भारतीय समाज दलाली के चरित्र से भरा हुआ था जो देश के वर्तमान और भविष्य के लिए घोर संकट का विषय था।संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शरद चंद्र मिश्र तथा संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रद्योत कुमार सिंह ने किया। इस दौरान महाविद्यालय के प्रो. ज्ञानेंद्र सिंह, प्रो. रजनीश कुमार, डॉ. मुकुल लवानिया, डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. धीरज वर्मा, डॉ. शुभम मिश्र, डॉ. सानिया त्यागी, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील यादव ने कहा कि प्रेमचंद के लेखन का केंद्रीय लक्ष्य आर्थिक मुक्ति का है। प्रेमचंद की कहानियों के पात्र महाजन एवं सामंती व्यवस्था के शोषण के शिकार हैं। मुख्य वक्ता बुद्ध पीजी कॉलेज, कुशीनगर के सहायक आचार्य डॉ. गौरव तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद अपने साहित्य में नए सौंदर्य बोध को प्रस्तुत करते हैं उनके नायक दलित, स्त्री एवं निम्न वर्ग से आते हैं जो मानवीय संवेदना से भरे होते हैं तथा उच्च वर्ग के पात्र दोहरे चरित्र के कारण समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं एवं निम्न वर्ग का शोषण करते हैं। विशिष्ट अतिथि वीएसएवी पीजी कॉलेज गोला, गोरखपुर के प्राचार्य डॉ. फूलचंद तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों एवं उपन्यासों में प्रत्येक पात्र किसान संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है जिसका प्रेमचंद ने बड़ी गंभीरता से चित्रण किया है। प्रेमचंद के समय का भारतीय समाज दलाली के चरित्र से भरा हुआ था जो देश के वर्तमान और भविष्य के लिए घोर संकट का विषय था।संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शरद चंद्र मिश्र तथा संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रद्योत कुमार सिंह ने किया। इस दौरान महाविद्यालय के प्रो. ज्ञानेंद्र सिंह, प्रो. रजनीश कुमार, डॉ. मुकुल लवानिया, डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. धीरज वर्मा, डॉ. शुभम मिश्र, डॉ. सानिया त्यागी, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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