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Deoria News: फर्जीवाड़ा के आरोपी कानूनगो, लेखपाल, प्रधानपति की तलाश में पुलिस दे रही दबिश
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राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, प्रधान पति और बेटा समेत छह के खिलाफ दर्ज है प्राथमिकी
लार ब्लॉक के एडीओ पंचायत की शिकायती पत्र पर मईल पुलिस ने की कार्रवाई
तत्कालीन आरोपी लेखपाल को एसडीएम पूर्व में ही कर चुकी हैं निलंबित
पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपितों का बंद बता रहा है मोबाइल, नहीं मिल रहा है लोकेशन
सलेमपुर। लार विकास खंड क्षेत्र के पड़री गजराज गांव में फर्जी वरासत, बैनामा और मुआवजे की राशि के बंदरबांट के मामले में कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपितों के ठिकानों पर दबिश देना की शुरू कर दी है। बुधवार की रात पुलिस आरोपितों के मोबाइल ट्रेस कर दबिश दी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। कार्रवाई सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) लार की शिकायती पत्र पर मईल पुलिस बुधवार की देर रात राजस्व निरीक्षक, तत्कालीन लेखपाल, प्रधानपति, प्रधान बेटा, सफाईकर्मी समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
पं. जवाहरलाल कृषक इंटर कॉलेज के प्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह ने 24 फरवरी को मामले की शिकायत डीएम दिव्या मित्तल से की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने इसकी जांच उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव को सौंपी। डीएम के निर्देश पर गठित राजस्व टीम ने 26 और 27 फरवरी को स्थलीय व अभिलेखीय जांच की। एसडीएम की 9 मार्च की जांच आख्या में वरासत को विवादित बताते हुए लेखपाल, राजस्व निरीक्षक और आवेदनकर्ता प्रधानपति की भूमिका संदिग्ध मानी गई। जांच टीम ने माया देवी के खाते में धनराशि आने के बाद 11 जुलाई को प्रधानपति रामप्रताप के खाते में 15 लाख रुपये और सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते में 8 लाख रुपये भेजे गए। इसके बाद 17 जुलाई को सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते से प्रधानपति रामप्रताप के पुत्र राहुल प्रताप सिंह के खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि एक लाख रुपये नकद दिए जाने की बात भी सामने आई। इसी आधार पर मुख्य राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट और जिला पंचायत राज अधिकारी के आदेश के क्रम में एडीओ पंचायत ने बुधवार को मईल थाने में शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की बात कही। सहायक विकास अधिकारी (पं) चंद्रप्रकाश मिश्र ने पुलिस को कदए शिकायती पत्र में बताया कि पड़री गजराज के गाटा संख्या 34 रकबा 0.0810 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 25 रकबा 0.0400 हेक्टेयर भूमि लंबे समय से पं. जवाहरलाल कृषक इंटर कॉलेज, महुआबारी, लार रोड, देवरिया के कब्जे में चली आ रही थी। इसके बावजूद मूल खातेदार फेकू के नाम दर्ज भूमि पर, उनकी मृत्यु के करीब 30 वर्ष बाद, कथित पत्नी माया देवी का नाम वरासत में दर्ज कर दिया गया। आरोप है कि वरासत का आवेदन ग्राम प्रधान इंदू देवी के पति रामप्रताप की ओर से किया गया था। जांच में प्रथम दृष्टया यह दुरभिसंधि का मामला पाया गया। इसके बाद गाटा संख्या 34 में से 0.0245 हेक्टेयर भूमि पंचायत भवन निर्माण के लिए 66 लाख 67 हजार 920 रुपये में पंचायतीराज विभाग देवरिया के नाम बैनामा कर दी गई। साथ ही इसी गाटा की 0.0074 हेक्टेयर भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-727बी के लिए अधिग्रहित हुई, जिसका 5 लाख 44 हजार 254 रुपये मुआवजा मिला। गाटा संख्या 25 में से 0.0026 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर एक लाख 91 हजार 224 रुपये का मुआवजा दिया गया। इस प्रकार कुल 74 लाख 3 हजार 398 रुपये माया देवी द्वारा प्राप्त किए जाने की बात सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह, तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव, प्रधानपति रामप्रताप, प्रधान का बेटा राहुल प्रताप सिंह, सफाईकर्मी रामराज प्रसाद व जमीन बैनामा करने वाली माया देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
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पहले ही निलंबित हो चुका है लेखपाल
इस प्रकरण में नामजद तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को पूर्व में एसडीएम दिशा श्रीवास्तव द्वारा निलंबित किया जा चुका है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। सूत्रों की माने तो विभाग राजस्व निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।
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कोट
फर्जी वरासत, बैनामा और मुआवजे की राशि के बंदरबांट के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपितों के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। संतोष कुमार सिंह थानाध्यक्ष मईल
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लार ब्लॉक के एडीओ पंचायत की शिकायती पत्र पर मईल पुलिस ने की कार्रवाई
तत्कालीन आरोपी लेखपाल को एसडीएम पूर्व में ही कर चुकी हैं निलंबित
पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपितों का बंद बता रहा है मोबाइल, नहीं मिल रहा है लोकेशन
सलेमपुर। लार विकास खंड क्षेत्र के पड़री गजराज गांव में फर्जी वरासत, बैनामा और मुआवजे की राशि के बंदरबांट के मामले में कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपितों के ठिकानों पर दबिश देना की शुरू कर दी है। बुधवार की रात पुलिस आरोपितों के मोबाइल ट्रेस कर दबिश दी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। कार्रवाई सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) लार की शिकायती पत्र पर मईल पुलिस बुधवार की देर रात राजस्व निरीक्षक, तत्कालीन लेखपाल, प्रधानपति, प्रधान बेटा, सफाईकर्मी समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
पं. जवाहरलाल कृषक इंटर कॉलेज के प्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह ने 24 फरवरी को मामले की शिकायत डीएम दिव्या मित्तल से की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने इसकी जांच उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव को सौंपी। डीएम के निर्देश पर गठित राजस्व टीम ने 26 और 27 फरवरी को स्थलीय व अभिलेखीय जांच की। एसडीएम की 9 मार्च की जांच आख्या में वरासत को विवादित बताते हुए लेखपाल, राजस्व निरीक्षक और आवेदनकर्ता प्रधानपति की भूमिका संदिग्ध मानी गई। जांच टीम ने माया देवी के खाते में धनराशि आने के बाद 11 जुलाई को प्रधानपति रामप्रताप के खाते में 15 लाख रुपये और सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते में 8 लाख रुपये भेजे गए। इसके बाद 17 जुलाई को सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते से प्रधानपति रामप्रताप के पुत्र राहुल प्रताप सिंह के खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि एक लाख रुपये नकद दिए जाने की बात भी सामने आई। इसी आधार पर मुख्य राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट और जिला पंचायत राज अधिकारी के आदेश के क्रम में एडीओ पंचायत ने बुधवार को मईल थाने में शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की बात कही। सहायक विकास अधिकारी (पं) चंद्रप्रकाश मिश्र ने पुलिस को कदए शिकायती पत्र में बताया कि पड़री गजराज के गाटा संख्या 34 रकबा 0.0810 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 25 रकबा 0.0400 हेक्टेयर भूमि लंबे समय से पं. जवाहरलाल कृषक इंटर कॉलेज, महुआबारी, लार रोड, देवरिया के कब्जे में चली आ रही थी। इसके बावजूद मूल खातेदार फेकू के नाम दर्ज भूमि पर, उनकी मृत्यु के करीब 30 वर्ष बाद, कथित पत्नी माया देवी का नाम वरासत में दर्ज कर दिया गया। आरोप है कि वरासत का आवेदन ग्राम प्रधान इंदू देवी के पति रामप्रताप की ओर से किया गया था। जांच में प्रथम दृष्टया यह दुरभिसंधि का मामला पाया गया। इसके बाद गाटा संख्या 34 में से 0.0245 हेक्टेयर भूमि पंचायत भवन निर्माण के लिए 66 लाख 67 हजार 920 रुपये में पंचायतीराज विभाग देवरिया के नाम बैनामा कर दी गई। साथ ही इसी गाटा की 0.0074 हेक्टेयर भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-727बी के लिए अधिग्रहित हुई, जिसका 5 लाख 44 हजार 254 रुपये मुआवजा मिला। गाटा संख्या 25 में से 0.0026 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर एक लाख 91 हजार 224 रुपये का मुआवजा दिया गया। इस प्रकार कुल 74 लाख 3 हजार 398 रुपये माया देवी द्वारा प्राप्त किए जाने की बात सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह, तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव, प्रधानपति रामप्रताप, प्रधान का बेटा राहुल प्रताप सिंह, सफाईकर्मी रामराज प्रसाद व जमीन बैनामा करने वाली माया देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
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पहले ही निलंबित हो चुका है लेखपाल
इस प्रकरण में नामजद तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को पूर्व में एसडीएम दिशा श्रीवास्तव द्वारा निलंबित किया जा चुका है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। सूत्रों की माने तो विभाग राजस्व निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।
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कोट
फर्जी वरासत, बैनामा और मुआवजे की राशि के बंदरबांट के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपितों के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। संतोष कुमार सिंह थानाध्यक्ष मईल