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गर्म हवाओं से लोग बेहाल
देवरिया
Updated Wed, 24 May 2017 10:36 PM IST
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बुधवार को तापमान में दो डिग्री की बढ़ोतरी होने से हर कोई परेशान दिखा। धूप में चेहरा ढककर जातीं युवतियां।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। एक दिन पहले हुई हल्की बूंदाबांदी के बाद बुधवार को सूर्यदेव ने फिर तेवर दिखा दिए। बुधवार को तापमान में दो डिग्री की बढ़ोतरी हुई। अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम 27 डिग्री रहा। दोपहर के समय भीषण गर्मी और गर्म हवाओं के थपेड़ों से लोगों का हाल बेहाल हो गया। बुधवार को सुबह से ही गर्मी का प्रकोप रहा। सुबह आठ बजते ही लोगों को तेज धूप का सामना करना पड़ा। दोपहर के समय गर्म हवाओं के चलने से लोगों को काफी दिक्कत हुईं।
सफर करने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर दो पहिया वाहन चालकों को दिक्कत आई। मुंह पर कपड़ा बांधकर वाहन चालकों ने सफर किया। गर्मी से बचने के लिए लोग घरों से कम ही बाहर निकले। दोपहर के समय बाजार व सड़कें सुनसान नजर आई। उधर जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एचके मिश्र ने बताया कि इस वक्त धूप अधिक हो रही है। धूप में अत्यधिक देर तक शरीर को बिना सही ढंग से ढके, तरल पदार्थ यानी जल का सेवन लंबे अंतराल पर करने से हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है।
पीड़ित के दिमाग में स्थित तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली गड़बड़ हो जाती है। त्वचा शुष्क हो जाती है। तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। पीड़ित व्यक्ति में कभी-कभी तापमान की अधिकता की वजह से मानसिक स्थिति एवं व्यवहार में बदलाव आता है। ऐसे लोग मूर्छित होकर गिर जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में अभी तक इस तरह का कोई मरीज नहीं आया है, लेकिन सभी को सावधान रहने की जरूरत है। डिहाइड्रेशन के मरीज अस्पताल आ रहे हैं। इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। बारिश के बाद होनी वाली धूप और खतरनाक हो जाती है।
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सफर करने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर दो पहिया वाहन चालकों को दिक्कत आई। मुंह पर कपड़ा बांधकर वाहन चालकों ने सफर किया। गर्मी से बचने के लिए लोग घरों से कम ही बाहर निकले। दोपहर के समय बाजार व सड़कें सुनसान नजर आई। उधर जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एचके मिश्र ने बताया कि इस वक्त धूप अधिक हो रही है। धूप में अत्यधिक देर तक शरीर को बिना सही ढंग से ढके, तरल पदार्थ यानी जल का सेवन लंबे अंतराल पर करने से हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है।
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पीड़ित के दिमाग में स्थित तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली गड़बड़ हो जाती है। त्वचा शुष्क हो जाती है। तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। पीड़ित व्यक्ति में कभी-कभी तापमान की अधिकता की वजह से मानसिक स्थिति एवं व्यवहार में बदलाव आता है। ऐसे लोग मूर्छित होकर गिर जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में अभी तक इस तरह का कोई मरीज नहीं आया है, लेकिन सभी को सावधान रहने की जरूरत है। डिहाइड्रेशन के मरीज अस्पताल आ रहे हैं। इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। बारिश के बाद होनी वाली धूप और खतरनाक हो जाती है।
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