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Deoria News: कन्हौली में मोरों का बसेरा, खेत-खलिहान से आंगन तक डेरा
Thu, 20 Aug 2026 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:52 PM IST
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नृत्य करता मोर
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रुद्रपुर। राजनीति समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी खास पहचान रखने वाला कन्हौली गांव इन दिनों मोर की वजह से चर्चा में है।
खेतों और बागों से लेकर लोगों के आंगन तक राष्ट्रीय पक्षी की चहलकदमी आम है। सुबह होते ही मोरों के कलरव से गांव में अलग ही वातावरण दिखाई पड़ता है। यही वजह है कि कन्हौली को लोग अब ‘मोर गांव’ कहने लगे हैं।
गांव की हरियाली, बड़े बगीचे और खुला प्राकृतिक वातावरण मोरों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। चौड़ी गलियों और घरों के अहाते से आंगन तक मोरों की मौजूदगी मिलती है। मौसम सुहाना होने पर मोरों के जोड़े खुले स्थानों पर पंख फैलाकर नृत्य करते भी नजर आते हैं। गांव के रहने वाले शैलेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक खड़ग बहादुर सिंह और भगवान सिंह आदि का कहना है कि मोरों की मौजूदगी एक अलग प्राकृतिक एहसास देती है।
गांव का हरियाली भरा वातावरण मोरों के लिए अनुकूल है शायद यही वजह है कि दिनोंदिन इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। खेतों में विचरण करते झुंड और घरों के आंगन में पंख फैलाकर नाचते मोर गांव की पहचान बन गए हैं। प्रकृति और इंसान के इस खूबसूरत मेल ने कन्हौली को आसपास के गांवों से अलग पहचान दे दी है।
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लोगों ने अपने घरों के आसपास पेड़-पौधों और हरियाली को संजोकर रखा है। पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह और ओलंपियन संजीव कुमार सिंह के घर का बड़ा अहाता भी मोरों के पसंदीदा डेरे में शामिल है। यहां अक्सर मोरों को घूमते और दाना चुगते देखा जा सकता है।
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खेतों और बागों से लेकर लोगों के आंगन तक राष्ट्रीय पक्षी की चहलकदमी आम है। सुबह होते ही मोरों के कलरव से गांव में अलग ही वातावरण दिखाई पड़ता है। यही वजह है कि कन्हौली को लोग अब ‘मोर गांव’ कहने लगे हैं।
गांव की हरियाली, बड़े बगीचे और खुला प्राकृतिक वातावरण मोरों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। चौड़ी गलियों और घरों के अहाते से आंगन तक मोरों की मौजूदगी मिलती है। मौसम सुहाना होने पर मोरों के जोड़े खुले स्थानों पर पंख फैलाकर नृत्य करते भी नजर आते हैं। गांव के रहने वाले शैलेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक खड़ग बहादुर सिंह और भगवान सिंह आदि का कहना है कि मोरों की मौजूदगी एक अलग प्राकृतिक एहसास देती है।
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गांव का हरियाली भरा वातावरण मोरों के लिए अनुकूल है शायद यही वजह है कि दिनोंदिन इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। खेतों में विचरण करते झुंड और घरों के आंगन में पंख फैलाकर नाचते मोर गांव की पहचान बन गए हैं। प्रकृति और इंसान के इस खूबसूरत मेल ने कन्हौली को आसपास के गांवों से अलग पहचान दे दी है।
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लोगों ने अपने घरों के आसपास पेड़-पौधों और हरियाली को संजोकर रखा है। पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह और ओलंपियन संजीव कुमार सिंह के घर का बड़ा अहाता भी मोरों के पसंदीदा डेरे में शामिल है। यहां अक्सर मोरों को घूमते और दाना चुगते देखा जा सकता है।