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जिले में कालाजार के मिले मरीज
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जिले में कालाजार के मिले मरीज
देवरिया। जनपद में साढ़े पांच माह में कालाजार के छह और छह पीकेडीएल (पोस्ट कालाजार डर्मल लिस्मेनिएसीस) यानी चमड़ी बुखार के नए मरीज मिलने से हड़कंप है। मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। तीन ब्लाकों में मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमा सतर्क हो गया है। प्रभावित क्षेत्र में छिड़काव कराने के साथ ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
जनपद के कुछ क्षेत्रों में कालाजार का प्रकोप है। यह रोग बालू मक्खी के काटने से होता है। बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है। इससे बचने की जरूरत है। बालू मक्खी को जड़ से समाप्त करने के लिए विभाग की ओर से समय-समय पर निरोधात्मक कार्रवाई भी की जाती है। इसके तहत घर के अंदर छह फीट ऊंचाई तक छिड़काव कराया जाता है। जनवरी माह से अब तक छह मरीज कालाजार तथा छह पीकेडीएल (चमड़ी बुखार) के मिले हैं, जिसमें सात महिला, तीन बच्चे और दो पुरुष शामिल हैं। यह सभी रोगी बनकटा, देसई देवरिया और बैतालपुर ब्लॉक क्षेत्र में पाए गए हैं। जिनका इलाज चल रहा है। वेक्टर बार्न डिजीज (वीबीडी) कंट्रोल प्रोग्राम परामर्शदाता डॉ. एसके पांडेय ने कालाजार के साथ कोविड से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि इन दिनों भले ही कोरोना के केस कम हुए हैं, लेकिन अभी भी सतर्कता और सावधानी बहुत जरूरी है। सभी लोग घरों में रहें और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। उन्होंने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए जिले के सभी प्रभावित गांवों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए छिड़काव का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
इन गांवों में मिले मरीज
जनपद के तीन विकास खंडों में कालाजार के मरीज मिले हैं। इसमें विकास खंड बनकटा क्षेत्र के मिश्रौली, सिरसिया पवार, रतसिया, बतरौली, बसावन चक, परसिया, देसही देवरिया ब्लाक के मदरापाली, जगदीशपुर तथा बैतालपुर ब्लाक का बटुलही गांव शामिल है।
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लक्षण दिखे तो न करें नजरंदाज, जिला अस्पताल में कराएं इलाज
डब्ल्यूएचओ के जोनल कोर्डिनेटर ने बताया कि कोरोना काल में यदि किसी में कालाजार के लक्षण दिखे तो वह उसे अनदेखा न करें और तत्काल जांच कराएं। अब कालाजार का इलाज आसान हो गया है। मरीज के लिए जिला अस्पताल में अच्छी व्यवस्था की गई है। दवा महंगी होने के बावजूद नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने निजी चिकित्सकों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास कोई कालाजार का रोगी इलाज कराने पहुंचे तो जिला अस्पताल भेज दें।
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देवरिया। जनपद में साढ़े पांच माह में कालाजार के छह और छह पीकेडीएल (पोस्ट कालाजार डर्मल लिस्मेनिएसीस) यानी चमड़ी बुखार के नए मरीज मिलने से हड़कंप है। मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। तीन ब्लाकों में मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमा सतर्क हो गया है। प्रभावित क्षेत्र में छिड़काव कराने के साथ ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
जनपद के कुछ क्षेत्रों में कालाजार का प्रकोप है। यह रोग बालू मक्खी के काटने से होता है। बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है। इससे बचने की जरूरत है। बालू मक्खी को जड़ से समाप्त करने के लिए विभाग की ओर से समय-समय पर निरोधात्मक कार्रवाई भी की जाती है। इसके तहत घर के अंदर छह फीट ऊंचाई तक छिड़काव कराया जाता है। जनवरी माह से अब तक छह मरीज कालाजार तथा छह पीकेडीएल (चमड़ी बुखार) के मिले हैं, जिसमें सात महिला, तीन बच्चे और दो पुरुष शामिल हैं। यह सभी रोगी बनकटा, देसई देवरिया और बैतालपुर ब्लॉक क्षेत्र में पाए गए हैं। जिनका इलाज चल रहा है। वेक्टर बार्न डिजीज (वीबीडी) कंट्रोल प्रोग्राम परामर्शदाता डॉ. एसके पांडेय ने कालाजार के साथ कोविड से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि इन दिनों भले ही कोरोना के केस कम हुए हैं, लेकिन अभी भी सतर्कता और सावधानी बहुत जरूरी है। सभी लोग घरों में रहें और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। उन्होंने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए जिले के सभी प्रभावित गांवों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए छिड़काव का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
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इन गांवों में मिले मरीज
जनपद के तीन विकास खंडों में कालाजार के मरीज मिले हैं। इसमें विकास खंड बनकटा क्षेत्र के मिश्रौली, सिरसिया पवार, रतसिया, बतरौली, बसावन चक, परसिया, देसही देवरिया ब्लाक के मदरापाली, जगदीशपुर तथा बैतालपुर ब्लाक का बटुलही गांव शामिल है।
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लक्षण दिखे तो न करें नजरंदाज, जिला अस्पताल में कराएं इलाज
डब्ल्यूएचओ के जोनल कोर्डिनेटर ने बताया कि कोरोना काल में यदि किसी में कालाजार के लक्षण दिखे तो वह उसे अनदेखा न करें और तत्काल जांच कराएं। अब कालाजार का इलाज आसान हो गया है। मरीज के लिए जिला अस्पताल में अच्छी व्यवस्था की गई है। दवा महंगी होने के बावजूद नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने निजी चिकित्सकों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास कोई कालाजार का रोगी इलाज कराने पहुंचे तो जिला अस्पताल भेज दें।