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Deoria News: पांच साल में सिर्फ दो पुरुषों ने कराई नसबंदी
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पांच साल में सिर्फ दो पुरुषों ने कराई नसबंदी
पुरुष नहीं ले रहे परिवार नियोजन की जिम्मेदारी, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
पांच वर्ष में 1844 महिलाओं ने कराई नसबंदी
21 नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा पुरुष नसबंदी पखवारा
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। परिवार नियोजन के प्रति पुरुष उदासीन हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े पर गौर करें तो नसबंदी कराने में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों का योगदान नगण्य है। रुद्रपुर क्षेत्र में पांच वर्षों में सिर्फ दो पुरुषों ने नसबंदी कराई है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा जागरूक हैं।
सरकार पुरुषों को जागरूक करने के लिए 21 नवंबर से चार दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवारा चला रही है। उन्हें नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पुरुष नसबंदी कराने वाले प्रेरक को 400 रुपये प्रेरक धनराशि दी जाएगी। पुरुषों में नसबंदी का चलन बढ़ाने के लिए गांवों में प्रचार वाहन घूम रहे हैं। लेकिन अभियान का आधा पखवारा बीतने के बाद भी रुद्रपुर क्षेत्र में एक भी पुरुष नसबंदी कराने के लिए तैयार नहीं हुआ।
सीएचसी रुद्रपुर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में 418 महिलाओं ने नसबंदी कराई। 2018-19 में 439 महिलाओं और दो पुरुषों ने नसबंदी कराई। 2019-20 में सिर्फ 459 महिलाओं ने नसबंदी कराई। 2021 में 463 महिलाएं परिवार नियोजन कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। इस वर्ष अब तक सिर्फ 65 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। इन पांच वर्षों में 1844 महिलाओं ने परिवार नियोजन में अपना योगदान दिया। इस बीच सिर्फ दो पुरुष ही परिवार नियोजन कार्यक्रम के भागीदार बने।
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आसान और सुरक्षित है पुरुष नसबंदी
इस बाबत सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. एसके राव ने कहा कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी आसान और सुरक्षित है। लेकिन पुरुषों में नसबंदी को लेकर भ्रांतियों के कारण वे आगे नहीं आ रहे हैं। पुरुष नसबंदी से उनकी यौन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। पुरुष का अंडकोष बाहर होने के कारण शल्य क्रिया आसान होती है। पुरुष नसबंदी में अधिकतम 15 मिनट का समय लगता है। उन्हें प्रोत्साहन राशि के रूप में सरकार तीन हजार रुपये दे रही है।
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पुरुष नहीं ले रहे परिवार नियोजन की जिम्मेदारी, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
पांच वर्ष में 1844 महिलाओं ने कराई नसबंदी
21 नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा पुरुष नसबंदी पखवारा
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। परिवार नियोजन के प्रति पुरुष उदासीन हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े पर गौर करें तो नसबंदी कराने में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों का योगदान नगण्य है। रुद्रपुर क्षेत्र में पांच वर्षों में सिर्फ दो पुरुषों ने नसबंदी कराई है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा जागरूक हैं।
सरकार पुरुषों को जागरूक करने के लिए 21 नवंबर से चार दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवारा चला रही है। उन्हें नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पुरुष नसबंदी कराने वाले प्रेरक को 400 रुपये प्रेरक धनराशि दी जाएगी। पुरुषों में नसबंदी का चलन बढ़ाने के लिए गांवों में प्रचार वाहन घूम रहे हैं। लेकिन अभियान का आधा पखवारा बीतने के बाद भी रुद्रपुर क्षेत्र में एक भी पुरुष नसबंदी कराने के लिए तैयार नहीं हुआ।
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सीएचसी रुद्रपुर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में 418 महिलाओं ने नसबंदी कराई। 2018-19 में 439 महिलाओं और दो पुरुषों ने नसबंदी कराई। 2019-20 में सिर्फ 459 महिलाओं ने नसबंदी कराई। 2021 में 463 महिलाएं परिवार नियोजन कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। इस वर्ष अब तक सिर्फ 65 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। इन पांच वर्षों में 1844 महिलाओं ने परिवार नियोजन में अपना योगदान दिया। इस बीच सिर्फ दो पुरुष ही परिवार नियोजन कार्यक्रम के भागीदार बने।
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आसान और सुरक्षित है पुरुष नसबंदी
इस बाबत सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. एसके राव ने कहा कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी आसान और सुरक्षित है। लेकिन पुरुषों में नसबंदी को लेकर भ्रांतियों के कारण वे आगे नहीं आ रहे हैं। पुरुष नसबंदी से उनकी यौन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। पुरुष का अंडकोष बाहर होने के कारण शल्य क्रिया आसान होती है। पुरुष नसबंदी में अधिकतम 15 मिनट का समय लगता है। उन्हें प्रोत्साहन राशि के रूप में सरकार तीन हजार रुपये दे रही है।