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Deoria News: 362 दिन में कई कार्य अधूरे, तीन दिन में खपाए एक अरब दस करोड़ रुपये
Sun, 02 Apr 2023 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 02 Apr 2023 12:18 AM IST
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गांवों में मच्छरों से निजात दिलाने और छिड़काव के लिए लौटा दिए 50 लाख, पीएचसी, सीएचसी के भी रुपये वापस हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। विभिन्न विभागों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले धन को अफसर 365 दिन में खपा नहीं पाए। मार्च महीने के अंतिम दिन जिले के कोषागार से महज दिन दिन के भीतर एक अरब दस करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। जबकि विकास कार्य अभी पेंडिंग पड़े हैं। गांवों में मच्छरों से निजात दिलाने और छिड़काव के लिए 50 लाख रुपये स्वास्थ्य विभाग की ओर खर्च नहीं हो सकें। इतना ही नहीं उपकरण के लिए तरस रहे सीएचसी व पीएचसी सहित अन्य मद के 30 लाख रुपये भी वापस करना पड़ा।
जिले के करीब 45 विभागों में से करीबन 30 विभागों में तीन दिनों के भीतर किए गए भुगतान से यह बात सामने आ रही है कि कई विभाग धन खर्च करने में फिसड्डी रहे हैं। कोषागार कार्यालय के मुताबिक करीब एक अरब दस करोड़ रुपये का भुगतान तीन दिन के भीतर किया गया है। इसमें अक्तूबर माह से माध्यमिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का बोनस बकाया था, उसके भुगतान के लिए शिक्षक भी चक्कर लगा रहे थे, इसके लिए 46 लाख रुपये वापस हो गए। बाढ़ खंड के रुद्रपुर के दो बंधे सहित करीब दस नहरों की सफाई के लिए आया धन वापस न चला जाए, इस वजह से आठ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। आरईएस ने दस सड़कों का निर्माण नहीं कराया, इसके चलते 90 लाख रुपये वापस करना पड़ा है। माननीयों की निधि के भी करीब सात करोड़ रुपये का काम जल्दबाजी में शुरू कर बजट को बचाया गया है। ट्रामा सेंटर का बजट वापस न करना पड़े, इसके चक्कर में राजकीय निर्माण निगम को छह करोड़ तीस लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।
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तीन दिनों में जमकर हुआ भुुगतान
कोषागार से 29 मार्च को दस करोड़, 30 मार्च को 40 और 31 मार्च को 45 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों को ट्रांसफार्मर किया गया है। इसमें सबसे अधिक सिंचाई विभाग को दस करोड़ बांध निर्माण और लोक निर्माण विभाग को सड़क के लिए आठ करोड़ रुपये, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में शिक्षकों का बोनस को मिलाकर एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसी तरह अन्य विभागों का हाल रहा है। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर पूरे साल भर जिम्मेदार अफसर मार्च के आने का इंतजार कर रहे थे। इनको डर था कि अगर वित्तीय वर्ष की रात 11 बजे तक आंकड़ा दुरुस्त नहीं होगा तो बजट लैप्स हो जाएगा। इन विभागों ने वापस किया पैसा
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इन विभागों में वापस हुई रकम
- लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड दो करोड़
- सिंचाई विभाग एक करोड़
- स्वास्थ्य विभाग 86 लाख
- आरईएस 90 लाख
- कृषि विभाग 67 लाख
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ट्रामा सेंटर का निर्माण शुरू नहीं
ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपये करीब दो माह से पड़ा हुआ है। इसके बावजूद भी काम शुरू नहीं है। अनंत: नौबत यह आई कि 31 मार्च को रुपये वापस करना पड़ता। इसके कारण जल्दबाजी में पहली किस्त जारी की गई है।
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किसानों को मिलने वाली सब्सिडी भी हुई वापस
कृषि विभाग से किसानों को यंत्र और बीज आदि के लिए मिलने वाली सब्सिडी के करीब 67 लाख रुपये वापस करने पड़े। विभाग कहना है कि अनुदान की राशि किसानों को इस नाते नहीं मिल पाई कि उनके कागजात पूरे नहीं थे। इसके चलते बजट को लौटाना पड़ा है।
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विभिन्न मदों में आया बजट लैप्स न हो, जिन विभागों का बकाया था, भुगतान किया गया है। इस बार मोटी रकम का कोई भी बजट लैप्स नहीं हुआ है। ट्रामा सेंटर के लिए पहली किस्त जारी कर दी गई है।
कुलदीप सरोज, जिला कोषाधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। विभिन्न विभागों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले धन को अफसर 365 दिन में खपा नहीं पाए। मार्च महीने के अंतिम दिन जिले के कोषागार से महज दिन दिन के भीतर एक अरब दस करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। जबकि विकास कार्य अभी पेंडिंग पड़े हैं। गांवों में मच्छरों से निजात दिलाने और छिड़काव के लिए 50 लाख रुपये स्वास्थ्य विभाग की ओर खर्च नहीं हो सकें। इतना ही नहीं उपकरण के लिए तरस रहे सीएचसी व पीएचसी सहित अन्य मद के 30 लाख रुपये भी वापस करना पड़ा।
जिले के करीब 45 विभागों में से करीबन 30 विभागों में तीन दिनों के भीतर किए गए भुगतान से यह बात सामने आ रही है कि कई विभाग धन खर्च करने में फिसड्डी रहे हैं। कोषागार कार्यालय के मुताबिक करीब एक अरब दस करोड़ रुपये का भुगतान तीन दिन के भीतर किया गया है। इसमें अक्तूबर माह से माध्यमिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का बोनस बकाया था, उसके भुगतान के लिए शिक्षक भी चक्कर लगा रहे थे, इसके लिए 46 लाख रुपये वापस हो गए। बाढ़ खंड के रुद्रपुर के दो बंधे सहित करीब दस नहरों की सफाई के लिए आया धन वापस न चला जाए, इस वजह से आठ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। आरईएस ने दस सड़कों का निर्माण नहीं कराया, इसके चलते 90 लाख रुपये वापस करना पड़ा है। माननीयों की निधि के भी करीब सात करोड़ रुपये का काम जल्दबाजी में शुरू कर बजट को बचाया गया है। ट्रामा सेंटर का बजट वापस न करना पड़े, इसके चक्कर में राजकीय निर्माण निगम को छह करोड़ तीस लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।
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तीन दिनों में जमकर हुआ भुुगतान
कोषागार से 29 मार्च को दस करोड़, 30 मार्च को 40 और 31 मार्च को 45 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों को ट्रांसफार्मर किया गया है। इसमें सबसे अधिक सिंचाई विभाग को दस करोड़ बांध निर्माण और लोक निर्माण विभाग को सड़क के लिए आठ करोड़ रुपये, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में शिक्षकों का बोनस को मिलाकर एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसी तरह अन्य विभागों का हाल रहा है। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर पूरे साल भर जिम्मेदार अफसर मार्च के आने का इंतजार कर रहे थे। इनको डर था कि अगर वित्तीय वर्ष की रात 11 बजे तक आंकड़ा दुरुस्त नहीं होगा तो बजट लैप्स हो जाएगा। इन विभागों ने वापस किया पैसा
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इन विभागों में वापस हुई रकम
- लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड दो करोड़
- सिंचाई विभाग एक करोड़
- स्वास्थ्य विभाग 86 लाख
- आरईएस 90 लाख
- कृषि विभाग 67 लाख
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ट्रामा सेंटर का निर्माण शुरू नहीं
ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपये करीब दो माह से पड़ा हुआ है। इसके बावजूद भी काम शुरू नहीं है। अनंत: नौबत यह आई कि 31 मार्च को रुपये वापस करना पड़ता। इसके कारण जल्दबाजी में पहली किस्त जारी की गई है।
किसानों को मिलने वाली सब्सिडी भी हुई वापस
कृषि विभाग से किसानों को यंत्र और बीज आदि के लिए मिलने वाली सब्सिडी के करीब 67 लाख रुपये वापस करने पड़े। विभाग कहना है कि अनुदान की राशि किसानों को इस नाते नहीं मिल पाई कि उनके कागजात पूरे नहीं थे। इसके चलते बजट को लौटाना पड़ा है।
विभिन्न मदों में आया बजट लैप्स न हो, जिन विभागों का बकाया था, भुगतान किया गया है। इस बार मोटी रकम का कोई भी बजट लैप्स नहीं हुआ है। ट्रामा सेंटर के लिए पहली किस्त जारी कर दी गई है।
कुलदीप सरोज, जिला कोषाधिकारी