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Deoria News: जांच न निगरानी, शुद्धता के नाम पर बिक रहा पानी

Tue, 17 Jun 2025 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Tue, 17 Jun 2025 11:55 PM IST
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No checking, no monitoring, water is being sold in the name of purity
संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया। शहर से लेकर देहात तक सील पैक पानी बेचना है तो नियम का पालन करना पड़ता है, मगर खुला पानी जार और टंकी में बेचने पर कोई नियम-कानून नहीं है। ऐसे में धंधेबाज मिनरल वाटर बताकर अशुद्ध पानी बेच रहे हैं। आरओ प्लांट चलाने वाले हर दिन हजारों लीटर पानी की आपूर्ति कर मालामाल रहे हैं।
इस पानी की गुणवत्ता को जांचने और रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। ऐसे में वह धड़ल्ले से खुले पानी का कारोबार कर रहे हैं। वहीं आम से लेकर खास तक भरोसे के साथ इस खुले पानी का सेवन कर रहे हैं।
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खुले पानी के व्यापार में लोगों के स्वास्थ्य के साथ कब क्या हो जाए, यह कहा नहीं जा सकता। हालांकि, अशुद्ध पानी पीने को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सचेत करते रहते हैं।
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पानी बेचने का धंधा इस समय शहर से तहसील और ग्रामीण इलाकों में खूब फल-फूल रहा है। वर्तमान में जनपद स्तर पर करीब 100 से अधिक आरओ प्लांट इस समय चल रहे हैं।
इनमें साफ- सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है। मंगलवार को शहर के सीसीरोड, रामनाथ देवरिया, सोंदा चौराहा, रामगुलाम टोला, साकेतनगर स्थित आरओ प्लांटों का जायजा लिया गया तो यहां सफाई की व्यवस्था बदहाल मिली। वहां गाड़ी पर रखे पानी की टंकी भी साफ नहीं थी।
जानकार बताते हैं कि शहर में ही करीब आठ से 10 हजार लीटर पानी लोगों के घरों व प्रतिष्ठानों में पहुंचाया जा रहा है। जार में शुद्ध पानी बताकर धंधेबाज ग्राहकों से 20 से 30 रुपये वसूल रहे हैं। इनमें कोई रोजाना भुगतान कर देता है तो कोई महीने में करता है। सबसे ज्यादा शहर के दुकानदार जार के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे दुकानदार अपना जार खुद रखे हुए हैं।
जब पानी वाला आता है तो गाड़ी पर रखी टंकी के पानी से पाइप से उनके जार को भर दिया जा रहा है। टंकी के पानी के लिए संचालक 10 से लेकर 20 रुपये वसूलते हैं।
शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में हर दिन तीन से चार हजार पानी वाले जार बेचे रहे हैं। खास बात है कि आरओ प्लांट के संचालनकर्ता को यह भी नहीं पता कि पानी की शुद्धता के मानक क्या हैं, पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए, इतना हीं नहीं, पानी की जांच कौन करता है।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी पैक होने के बाद ही प्लांट विभाग के अधीन आएगा। केवल पैक किए वॉटर बॉटल को ही विभाग सैंपल लेकर जांच के लिए भेजता है।
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