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Deoria News: ब्लैक स्पॉट पर संकेतक के नहीं इंतजाम...सड़क हादसों में गवां रहे जान
Thu, 07 Dec 2023 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 07 Dec 2023 12:33 AM IST
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सड़क किनारे की सफेद पट्टी और जेब्रा क्रासिंग के निशान भी धुंधले
अभी नहीं चेते तो कोहरे के दौरान हादसों की संख्या इजाफा तय
नशे में वाहन चलाना भी हादसों की बड़ी वजह, जांच न होने से बेपरवाह रहते हैं लोग
शासन के आदेश के बाद भी नहीं लगाई गई वाहनों की रफ्तार जांचने की मशीन
जनवरी से अभी तक हुए 475 हादसे करीब 310 लोगों की गई जान
देवरिया। जिले की सड़कों पर मौैजूद ब्लैक स्पॉट पर संकेतकों का ना होना सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहा है। इसके अलावा वाहनों के तेज रफ्तार की जांच का भी इंतजाम नहीं है। नशे में वाहन चलाने वालों की जांच के नाम पर खानापूरी की जा रही है। इस बीच कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। लेकिन अब तक सड़क किनारे की सफेद पट्टी और जेब्रा क्रासिंग का निशान ठीक करवाने की कोई पहल नहीं हुई है।
जनवरी से अभी तक हुए 475 हादसे में करीब 310 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। यातायात माह (नवंबर) में ही करीब 26 लोगों की हादसे में जान गई है।जानकारों का कहना है कि लापरवाही का आलम यही रहा तो इस मौसम में सड़क हादसों में इजाफा तय है।
बीते दिनों यातायात माह संपन्न हुआ। इस दौरान यातायात नियमों के प्रचार-प्रसार और जागरूकता तो फैलाई गई लेकिन हादसे की मुख्य वजहों में से एक मूलभूत सुविधाओं की कमी को दूर करने पर ध्यान कम रहा। जिम्मेदारों की ओर से ब्लैक स्पॉट के पास ना तो संकेतक लगाए गए, न ही जेब्रा क्रासिंग और सड़क के किनारे की सफेद पट्टियों को दुरुस्त कराया गया है।
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कुछ स्थानों पर लगे संकेतक बोर्ड सड़क के किनारे झाड़ियों में छिप गए हैं। इसलिए राहगीरों को ये दिखाई नहीं देते। अंधा मोड़ कोन्हवलिया के पास स्पीड संकेतक का बोर्ड नहीं है। पुरवा, औराचौरी और खरोह के पास फुटपाथ पर दुकानें लगी रहती हैं। जिससे संकेतक नजर नहीं आते। एआरटीओ कार्यालय के पास भी सड़क किनारे दुकानें होने से हादसे का डर बना रहता है।
ये हैं शहर के ब्लैक स्पॉट
शहर के पुरवा, सोनूघाट, सिरजम, खुखुन्दू, रामपुर चौराहा को ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। कुछ साल पूर्व तक जिले में दस ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे।
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बिहार, कुशीनगर, गोरखपुर रोड पर होती हैं अधिक दुर्घटनाएं
देवरिया जिले से गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, कुशीनगर समेत बिहार प्रांत को जाने वाली सड़के गुजरती हैं। गोरखपुर, कुशीनगर, बिहार जाने वाली सड़कों पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है और सर्वाधिक हादसे भी इन्हीं सड़कों पर होते हैं। बिहार के सिवान, गोपालगंज जिले की सीमा देवरिया से सटी होने के कारण बाजार में खरीदारी करने और इलाज के लिए अधिकांश लोग आते-जाते रहते हैं। इसके अलावा देवरिया-सलेमपुर, देवरिया-बरहज और देवरिया-रूद्रपुर मार्ग पर भी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है। इसके चलते जब-तब इन सड़कों पर दुर्घटनाएं होती हैं।
सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहा नशे में वाहन चलाना
नवंबर माह में हुए सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में अधिकांश युवकों को नशे में होने की बात सामने आई। हादसे में मौत के बाद इमरजेंसी पहुंचे घायल साथियों ने भी परिजनों को शराब के नशे में हादसा होने की जानकारी दी। जनवरी से अभी तक जिले में सिर्फ 29 लोगों नशा करके वाहन चलाते पकड़े गए। इन पर जुर्माना लगाया गया।
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एक माह में एक 1.20 करोड़ का काटा चालान
यातायात माह (नवंबर) में दस हजार वाहनों का 1.20 करोड़ का चालान यातायात पुलिस ने किया। बावजूद इसके वाहन चालक अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। दस दिन पूर्व एक दिन में सड़क हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी। जिसमें रूद्रपुर तहसील क्षेत्र के चार युवक शामिल थे, जो शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे।
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सड़क हादसे में मरने वालों की साल दर साल बढ़ रही संख्या
वर्ष 2020 में 339 सड़क हादसों में 147 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2021 में 332 हादसों में 132 लोगों की जान गई । 2022 में 268 सड़क हादसों में 164 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस वर्ष जनवरी से अभी तक जिले में हुए 475 सड़क हादसों में 310 लोगों की मौत हो चुकी है।
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तहसील स्तर पर चिह्नित किए जाने थे ब्लैक स्पॉट...मामला ठंडे बस्ते में
तत्कालीन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए विशेष प्लान बनाया था। डीएम ने घुमावदार मोड़ पर इंडिकेटर लगाने, सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान के तहत रोड सेफ्टी आइकॉन को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष अभियान चलाने के अलावा सीओ सिटी, पीडब्लूडी के एक्सईएन, एआरटीओ को तहसीलवार ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने का निर्देश दिए थे। लेकिन उनके स्थानान्तरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
कोट
आरटीओ कार्यालय गोरखपुर को स्पीड जांचने का यंत्र मिला है। महीने में दो दिन देवरिया को भी मिलेगा। जिले में भी तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। अभी तक इस यंत्र का इस्तेमाल नहीं किया गया है।-आशुतोष शुक्ला, एआरटीओ देवरिया
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सड़क हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। नशे में बाइक चलाने वालों की जांच की जाती है। सड़कों से सफेद पट्टी मिट चुकी है और जेब्रा क्रासिंग भी धुंधली हो गई है। पीडब्लूडी को इसे ठीक करवाना चाहिए। क्योंकि इसके मिटने से कोहरे में हादसे का ज्यादा खतरा रहता है।-गुलाब सिंह, टीएसआई
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ब्लैक स्पॉट को चिह्नित कर संकेतक लगाने का निर्देश दिया गया है। अंधे मोड़ पर भी रेडियम और सेफ्टी रॉड लगाया जाएगा। इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। झाड़ियों के बीच छिपे संकेतक को भी सामने लाया जाएगा।-राजेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड
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ब्लैक स्पॉट वाली खबर में बातचीत
देवरिया-सलेमपुर फोरलेन मार्ग पर गाड़ियों की इतनी अधिक भीड़ है कि सड़क पार करना आसान नहीं है। इस मार्ग पर भारी और हल्के वाहन एक साथ चल रहे हैं जो मानक के खिलाफ हैं। इन सड़कों पर इंडिकेटर की कोई व्यवस्था नहीं हैं। बहादुरपुर दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां जो बोर्ड लगा है झाड़ियों में छिपा है। जबकि बोर्ड डिवाइडर के बीच में लगा होना चाहिए।-डॉ. चतुरानन ओझा बहादुरपुर
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हिरंदापुर मोड़ पर दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। सड़कों के दोनों तरफ झाड़ियां फैली हुई हैं जिससे इन सड़कों के किनारे पैदल और साइकिल से चलना भी जान जोखिम में डालना है। हादसों में सर्वाधिक मौते होती हैं। यहा पर चेतावनी और स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अफसर नहीं सुन रहे हैं। -बृजेश मिश्रा भगवानपुर तिवारी
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अभी नहीं चेते तो कोहरे के दौरान हादसों की संख्या इजाफा तय
नशे में वाहन चलाना भी हादसों की बड़ी वजह, जांच न होने से बेपरवाह रहते हैं लोग
शासन के आदेश के बाद भी नहीं लगाई गई वाहनों की रफ्तार जांचने की मशीन
जनवरी से अभी तक हुए 475 हादसे करीब 310 लोगों की गई जान
देवरिया। जिले की सड़कों पर मौैजूद ब्लैक स्पॉट पर संकेतकों का ना होना सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहा है। इसके अलावा वाहनों के तेज रफ्तार की जांच का भी इंतजाम नहीं है। नशे में वाहन चलाने वालों की जांच के नाम पर खानापूरी की जा रही है। इस बीच कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। लेकिन अब तक सड़क किनारे की सफेद पट्टी और जेब्रा क्रासिंग का निशान ठीक करवाने की कोई पहल नहीं हुई है।
जनवरी से अभी तक हुए 475 हादसे में करीब 310 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। यातायात माह (नवंबर) में ही करीब 26 लोगों की हादसे में जान गई है।जानकारों का कहना है कि लापरवाही का आलम यही रहा तो इस मौसम में सड़क हादसों में इजाफा तय है।
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कुछ स्थानों पर लगे संकेतक बोर्ड सड़क के किनारे झाड़ियों में छिप गए हैं। इसलिए राहगीरों को ये दिखाई नहीं देते। अंधा मोड़ कोन्हवलिया के पास स्पीड संकेतक का बोर्ड नहीं है। पुरवा, औराचौरी और खरोह के पास फुटपाथ पर दुकानें लगी रहती हैं। जिससे संकेतक नजर नहीं आते। एआरटीओ कार्यालय के पास भी सड़क किनारे दुकानें होने से हादसे का डर बना रहता है।
ये हैं शहर के ब्लैक स्पॉट
शहर के पुरवा, सोनूघाट, सिरजम, खुखुन्दू, रामपुर चौराहा को ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। कुछ साल पूर्व तक जिले में दस ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे।
बिहार, कुशीनगर, गोरखपुर रोड पर होती हैं अधिक दुर्घटनाएं
देवरिया जिले से गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, कुशीनगर समेत बिहार प्रांत को जाने वाली सड़के गुजरती हैं। गोरखपुर, कुशीनगर, बिहार जाने वाली सड़कों पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है और सर्वाधिक हादसे भी इन्हीं सड़कों पर होते हैं। बिहार के सिवान, गोपालगंज जिले की सीमा देवरिया से सटी होने के कारण बाजार में खरीदारी करने और इलाज के लिए अधिकांश लोग आते-जाते रहते हैं। इसके अलावा देवरिया-सलेमपुर, देवरिया-बरहज और देवरिया-रूद्रपुर मार्ग पर भी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है। इसके चलते जब-तब इन सड़कों पर दुर्घटनाएं होती हैं।
सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहा नशे में वाहन चलाना
नवंबर माह में हुए सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में अधिकांश युवकों को नशे में होने की बात सामने आई। हादसे में मौत के बाद इमरजेंसी पहुंचे घायल साथियों ने भी परिजनों को शराब के नशे में हादसा होने की जानकारी दी। जनवरी से अभी तक जिले में सिर्फ 29 लोगों नशा करके वाहन चलाते पकड़े गए। इन पर जुर्माना लगाया गया।
एक माह में एक 1.20 करोड़ का काटा चालान
यातायात माह (नवंबर) में दस हजार वाहनों का 1.20 करोड़ का चालान यातायात पुलिस ने किया। बावजूद इसके वाहन चालक अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। दस दिन पूर्व एक दिन में सड़क हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी। जिसमें रूद्रपुर तहसील क्षेत्र के चार युवक शामिल थे, जो शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे।
सड़क हादसे में मरने वालों की साल दर साल बढ़ रही संख्या
वर्ष 2020 में 339 सड़क हादसों में 147 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2021 में 332 हादसों में 132 लोगों की जान गई । 2022 में 268 सड़क हादसों में 164 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस वर्ष जनवरी से अभी तक जिले में हुए 475 सड़क हादसों में 310 लोगों की मौत हो चुकी है।
तहसील स्तर पर चिह्नित किए जाने थे ब्लैक स्पॉट...मामला ठंडे बस्ते में
तत्कालीन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए विशेष प्लान बनाया था। डीएम ने घुमावदार मोड़ पर इंडिकेटर लगाने, सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान के तहत रोड सेफ्टी आइकॉन को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष अभियान चलाने के अलावा सीओ सिटी, पीडब्लूडी के एक्सईएन, एआरटीओ को तहसीलवार ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने का निर्देश दिए थे। लेकिन उनके स्थानान्तरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
कोट
आरटीओ कार्यालय गोरखपुर को स्पीड जांचने का यंत्र मिला है। महीने में दो दिन देवरिया को भी मिलेगा। जिले में भी तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। अभी तक इस यंत्र का इस्तेमाल नहीं किया गया है।-आशुतोष शुक्ला, एआरटीओ देवरिया
सड़क हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। नशे में बाइक चलाने वालों की जांच की जाती है। सड़कों से सफेद पट्टी मिट चुकी है और जेब्रा क्रासिंग भी धुंधली हो गई है। पीडब्लूडी को इसे ठीक करवाना चाहिए। क्योंकि इसके मिटने से कोहरे में हादसे का ज्यादा खतरा रहता है।-गुलाब सिंह, टीएसआई
ब्लैक स्पॉट को चिह्नित कर संकेतक लगाने का निर्देश दिया गया है। अंधे मोड़ पर भी रेडियम और सेफ्टी रॉड लगाया जाएगा। इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। झाड़ियों के बीच छिपे संकेतक को भी सामने लाया जाएगा।-राजेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड
ब्लैक स्पॉट वाली खबर में बातचीत
देवरिया-सलेमपुर फोरलेन मार्ग पर गाड़ियों की इतनी अधिक भीड़ है कि सड़क पार करना आसान नहीं है। इस मार्ग पर भारी और हल्के वाहन एक साथ चल रहे हैं जो मानक के खिलाफ हैं। इन सड़कों पर इंडिकेटर की कोई व्यवस्था नहीं हैं। बहादुरपुर दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां जो बोर्ड लगा है झाड़ियों में छिपा है। जबकि बोर्ड डिवाइडर के बीच में लगा होना चाहिए।-डॉ. चतुरानन ओझा बहादुरपुर
हिरंदापुर मोड़ पर दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। सड़कों के दोनों तरफ झाड़ियां फैली हुई हैं जिससे इन सड़कों के किनारे पैदल और साइकिल से चलना भी जान जोखिम में डालना है। हादसों में सर्वाधिक मौते होती हैं। यहा पर चेतावनी और स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अफसर नहीं सुन रहे हैं। -बृजेश मिश्रा भगवानपुर तिवारी