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Deoria News: वृद्धाश्रम पहुंचा भतीजा, कहा घर चलो बड़की माई... हम करेंगे सेवा

Thu, 18 May 2023 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 18 May 2023 12:10 AM IST
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Nephew reached old age home, said come home elder mother
वृद्धाश्रम पहुंचा भतीजा, कहा घर चलो बड़की माई... हम करेंगे सेवा
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अमर उजाला इंपैक्ट: फोटो समाचार
-मदर्स डे पर खबर प्रकाशित होने के बाद वृद्धाश्रम पहुंच रहे वृद्धजनों के स्वजन
देवरिया। उम्र के आखिरी पड़ाव में जिन माताओं को औलादों ने वृद्ध आश्रम में रहने को मजबूर किया, वह अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद उनकी सुधि ले रहे हैं। मंगलवार को मेहरा पुरवा स्थित वृद्धाश्रम में पहुंचा एक युवक लीलावती का पैर पकड़ फूट-फूटकर रोया। कहने लगा कि बड़की माई आप घर चलो हम सब मिलकर आपकी सेवा करेंगे। लाज के मारे बड़का भइया नहीं आए। उन्होंने ही मुझे भेजा है।
समाज कल्याण विभाग से सहायता प्राप्त थारू जनजाति महिला विकास समिति गोंडा की ओर से संचालित मेहड़ा पुरवा देवरिया स्थित वृद्धाश्रम में इस समय लगभग 38 महिलाएं रह रही हैं। इनमें ज्यादातर माताएं ऐसी हैं, जिनके बेटे-बहू हाल जानना तो दूर मरने पर मुखाग्नि देने तक नहीं आते। 2020 से अब तक 12 लोगों का अंतिम संस्कार वृद्धाश्रम की ओर से किया गया है। रविवार को मदर्स डे के मौके पर अमर उजाला ने वृद्धाश्रम में रह रही माताओं की पीड़ा जानी। जिसमें गौरीबाजार के पथरहट गांव निवासी साहेबजादी, रुद्रपुर ब्लाक की रामलक्षन निवासी आनंदी, भलुअनी ब्लाक के जिगनी सोन्हौली गांव निवासी लीलावती आदि वृद्ध माताओं की पीड़ा के आंसू फूट पड़े। अपने ही पाले कपूतों से तिरस्कार, अपमान और प्रताड़ना की कहानी माताओं ने सिसक-सिसक कर बयां की थी। खबर प्रकाशित होने के अगले दिन से ही इनके स्वजनों में संवेदना जागने लगी। मंगलवार को लीलावती का भतिजा शंभू यादव वृद्धाश्रम पहुंचा। बड़े भाई की ओर से किए गए प्रताड़ना के लिए माफी मांगी। कहने लगा कोई नहीं पूछेगा तो हम आपकी सेवा करेंगे, लेकिन आप हमारे साथ घर चलिए। भइया भी अपने किए पर शर्मिंदा हैं। इतना सुनते ही लीलावती की ममता फूट पड़ी। वह शंभू के साथ घर चली गईं।
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कोट
वृद्धाश्रम देवरिया के प्रबंधक विजय कुमार शुक्ल ने बताया कि अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद से कई माताओं के स्वजन उनसे मिलने आ रहे हैं। घर चलने के लिए मनुहार कर रहे हैं। बेटा और बहू की प्रताड़ना झेलने के बावजूद मां की ममता पिघल रही है। कई माताएं घर लौटने के लिए राजी हो रही हैं। मंगलवार को लीलावती का भतीजा आकर उन्हें ले गया। बता रहा था कि अमर उजाला में उनकी व्यथा पढ़ने के बाद हम सभी को पाश्चाताप हो रहा है।
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- नोट रविवार को पेज नंबर पांच पर प्रकाशित खबर का पीडीएफ लगाएं
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