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Deoria News: प्रदूषण फैला रहे 27 हजार से ज्यादा वाहन, कसेगा शिकंजा

Mon, 08 Dec 2025 01:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Dec 2025 01:03 AM IST
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More than 27,000 vehicles are polluting, the noose will be tightened
पडरौना। जिले की सड़कों पर 27 हजार से ज्यादा ऐसे वाहन फर्राटा भर रहे हैं, जिनकी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की अवधि खत्म हो चुकी है। अधिकांश ऐसे वाहनों को जुगाड़ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं शहर की हवा को जहरीली बना रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से इन वाहनों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है।
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हालांकि, कभी-कभी चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति जरूर होती है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एआरटीओ की ओर से अभियान चलाकर शिकंजा कसने का रणनीति बना रहे हैं। वाहन मालिकों को इसके लिए नोटिस भेजा जाएगा।
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एआरटीओ कार्यालय में 673148 वाहन पंजीकृत हैं। इसमें मोपेट, स्कूटर, कार, जीप और ट्रैक्टर समेत अन्य वाहन शामिल हैं। पंजीकृत वाहनों में बाइकों की संख्या सबसे अधिक है। एआरटीओ कार्यालय में उपलब्ध वाहनों के पंजीकरण में कारों की संख्या 14,090 है। इसके अलावा 34,302 ट्रैक्टर पंजीकृत हैं। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 24545 बाइक, 145 मोपेट, 2046 स्कूटर, 235 कार, 176 जीप और 309 ट्रैक्टर समेत 27,456 वाहन ऐसे हैं, जो 15 वर्ष पुराने हैं। इनमें से अधिकांश वाहनों की वैधता तिथि समाप्त हो गई है।
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15 वर्ष पुरानी हो चुके वाहनों को ही लोग सड़क पर दौड़ा रहे हैं। ऐसे वाहनों के अलावा बिना पंजीकरण की वैधता समाप्त होने वाले सड़क पर दौड़ रही कई वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) नहीं है, जबकि (पीयूसी) बनाने के लिए जिले में कई प्रदूषण केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर छह महीन से लेकर एक साल के लिए वाहनों की पीयूसी जारी की जाती है। इसके बावजूद जिले की सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहन विना पीयूसी के बेखौफ दौड़ रहे हैं जबकि नियमानुसार पीयूसी के बिना वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है।

127 एक्यूआई शहर का : शहर हवा लगातार प्रदूषण के चलते खराब हो रही है। रविवार को भी शहर का एक्यूआई 127 रहा। चेस्ट फिजिशियन डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के उच्च स्तर में सांस लेने से श्वसन समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इससे खांसी आने के साथ लोगों को सांस लेने में कठिनाई होती है। अधिक समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने पर श्वसन संक्रमण हो सकता है।
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