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Deoria News: मोबाइल फोन बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास पर डाल रहा असर
Sat, 03 Feb 2024 01:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 03 Feb 2024 01:24 AM IST
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देवरिया। अत्यधिक मोबाइल देखना बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। इससे बच्चों के व्यवहार, बातचीत में जहां परिवर्तन हो रहा है, वहीं, कई अन्य समस्याएं हो रही है। इससे शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। बच्चों को कई तरह की दिक्कत भी होती है।
मेडिकल कॉलेज में हर रोज औसतन करीब आठ से दस इस तरह के बच्चे आते हैं। इसे लेकर माता-पिता को स्क्रीन टाइम पर खास ध्यान देने की जरूरत है। मोबाइल की लत ने बच्चों के स्वभाव और दिनचर्या को बदल कर रख दिया है। परिजनों और सामाजिक लगाव कम हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. इकबाल ने बताया कि कोरोना से बच्चों में मोबाइल, लैपटाप, टैबलेट देखने की प्रवृत्ति (स्क्रीन टाइम) बढ़ी है। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन नहीं लगना, यादाश्त, समझने (कोबनेटिव इंपेयरमेंट), बोलचाल की भाषा पर असर पड़ रहा है। वहीं, स्वभाव, व्यवहार भी बदल रहा है। कुछ बच्चे कभी एग्रेसिव व्यवहार करने लगते हैं।
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बताया कि मोबाइल देखने के चक्कर में बच्चे समय से नाश्ता और भोजन ठीक से नहीं करते हैं। इससे बच्चों की ग्रोथ पर असर पड़ता है। माता-पिता, केयर टेकर को स्क्रीन टाइम का खास ध्यान देना चाहिए। रात में देर तक मोबाइल न देखें। सोने से दो घंटे पहले मोबाइल देखना बंद कर देना चाहिए। रात में देर तक मोबाइल देखने से नींद की समस्या हो जाती है।
बताया कि तीन से चार साल के बच्चों में मस्तिष्क का विकास 90 प्रतिशत होता है। पर उनमें सही और गलत की समझ नहीं होती है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर ज्यादा दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। परिवार के लोग कम उम्र में बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। इससे अधिक उम्र के बच्चों को भी देर तक मोबाइल न देखने दें।
बताया कि बच्चे शिक्षाप्रद कंटेंट ही देखें। बच्चों में लक्षण दिखने और जरूरत महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए। इसमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
मोबाइल और टैबलेट से आंख पर पड़ता है असर
मोबाइल और टैबलेट से आंख पर असर पड़ता है। इससे ब्लू रेज निकलती हैं। इसका आंखों की रेटिना पर काफी दुष्प्रभाव पड़ता है।
ये बरतें सावधानी
बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें
हर रोज एक घंटे व विकेंड में अधिक से अधिक दो घंटे स्क्रीन टाइम हो
माता-पिता बच्चों से बातचीत करें
इनडोर-आउट डोर गेम में रुचि बढ़ाएं
मोबाइल पर शिक्षाप्रद कंटेंट देखने दें
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मेडिकल कॉलेज में हर रोज औसतन करीब आठ से दस इस तरह के बच्चे आते हैं। इसे लेकर माता-पिता को स्क्रीन टाइम पर खास ध्यान देने की जरूरत है। मोबाइल की लत ने बच्चों के स्वभाव और दिनचर्या को बदल कर रख दिया है। परिजनों और सामाजिक लगाव कम हो रहा है।
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मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. इकबाल ने बताया कि कोरोना से बच्चों में मोबाइल, लैपटाप, टैबलेट देखने की प्रवृत्ति (स्क्रीन टाइम) बढ़ी है। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन नहीं लगना, यादाश्त, समझने (कोबनेटिव इंपेयरमेंट), बोलचाल की भाषा पर असर पड़ रहा है। वहीं, स्वभाव, व्यवहार भी बदल रहा है। कुछ बच्चे कभी एग्रेसिव व्यवहार करने लगते हैं।
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बताया कि मोबाइल देखने के चक्कर में बच्चे समय से नाश्ता और भोजन ठीक से नहीं करते हैं। इससे बच्चों की ग्रोथ पर असर पड़ता है। माता-पिता, केयर टेकर को स्क्रीन टाइम का खास ध्यान देना चाहिए। रात में देर तक मोबाइल न देखें। सोने से दो घंटे पहले मोबाइल देखना बंद कर देना चाहिए। रात में देर तक मोबाइल देखने से नींद की समस्या हो जाती है।
बताया कि तीन से चार साल के बच्चों में मस्तिष्क का विकास 90 प्रतिशत होता है। पर उनमें सही और गलत की समझ नहीं होती है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर ज्यादा दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। परिवार के लोग कम उम्र में बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। इससे अधिक उम्र के बच्चों को भी देर तक मोबाइल न देखने दें।
बताया कि बच्चे शिक्षाप्रद कंटेंट ही देखें। बच्चों में लक्षण दिखने और जरूरत महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए। इसमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
मोबाइल और टैबलेट से आंख पर पड़ता है असर
मोबाइल और टैबलेट से आंख पर असर पड़ता है। इससे ब्लू रेज निकलती हैं। इसका आंखों की रेटिना पर काफी दुष्प्रभाव पड़ता है।
ये बरतें सावधानी
बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें
हर रोज एक घंटे व विकेंड में अधिक से अधिक दो घंटे स्क्रीन टाइम हो
माता-पिता बच्चों से बातचीत करें
इनडोर-आउट डोर गेम में रुचि बढ़ाएं
मोबाइल पर शिक्षाप्रद कंटेंट देखने दें