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Deoria News: मेडिकल काॅलेज को मिले 19 नए सीनियर रेजिडेंट
Tue, 29 Jul 2025 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 29 Jul 2025 12:14 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में शासन की ओर से बांड के 19 सीनियर रेजिडेंट मिले हैं। इनके आने से विभागों की व्यवस्था और सुदृढ़ हाेगी।
पठन-पाठन के कार्य सहित इमरजेंसी, ओपीडी में मरीजाें के इलाज में आसानी होगी, जबकि वार्डों में भी मरीजों के देखभाल में काफी सहूलियत होगी। इमरजेंसी के मरीजों का और बेहतर इलाज हो सकेगा।
अब रेडियोलाजिस्ट के अभाव में अल्ट्रा साउंड जांच ठप नहीं होगी। मेडिकल कॉलेजों में शासन की ओर से सीनियर रेजिडेंट (एसआर) की तैनाती की जा रही है। इसके तहत जिले को सीनियर रेजिडेंट मिले हैं। अभी तक एसआर की कमी थी।
गायनी व आर्थों विभाग व कुछ अन्य विभागों में एसआर की तैनाती थी, जबकि अधिकांश विभागों में एसआर नहीं थे। रेडियोलाजी विभाग में फैकेल्टी की कमी व एसआर नहीं थे। मात्र दो रेडियोलाजिस्ट के जिम्मे अल्ट्रासाउंड जांच थी, जिससे जांच के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ता था। इस विभाग में दो एसआर मिले हैं।
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अब किसी रेडियोलाजिस्ट के अवकाश पर जाने से कार्य बाधित नहीं होगा। बेहोशी के एक एसआर मिले हैं, जबकि अस्पताल में मात्र दो एनेस्थेटिक हैं। इसमें किसी के न रहने पर कार्य बाधित हो जाता था, अब ऐसा नहीं होगा। बारह विभागों में एसआर के मिलने से व्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि अभी अन्य विभागों में एसआर की जरूरत है।
क्लीनिकल में चर्म रोग, ईएनटी, मानसिक रोग, चेस्ट व टीबी विभाग में एसआर की जरूरत है, इन विभागों में एक भी एसआर नहीं हैं, जिससे परेशानी होती है।
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देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में शासन की ओर से बांड के 19 सीनियर रेजिडेंट मिले हैं। इनके आने से विभागों की व्यवस्था और सुदृढ़ हाेगी।
पठन-पाठन के कार्य सहित इमरजेंसी, ओपीडी में मरीजाें के इलाज में आसानी होगी, जबकि वार्डों में भी मरीजों के देखभाल में काफी सहूलियत होगी। इमरजेंसी के मरीजों का और बेहतर इलाज हो सकेगा।
अब रेडियोलाजिस्ट के अभाव में अल्ट्रा साउंड जांच ठप नहीं होगी। मेडिकल कॉलेजों में शासन की ओर से सीनियर रेजिडेंट (एसआर) की तैनाती की जा रही है। इसके तहत जिले को सीनियर रेजिडेंट मिले हैं। अभी तक एसआर की कमी थी।
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गायनी व आर्थों विभाग व कुछ अन्य विभागों में एसआर की तैनाती थी, जबकि अधिकांश विभागों में एसआर नहीं थे। रेडियोलाजी विभाग में फैकेल्टी की कमी व एसआर नहीं थे। मात्र दो रेडियोलाजिस्ट के जिम्मे अल्ट्रासाउंड जांच थी, जिससे जांच के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ता था। इस विभाग में दो एसआर मिले हैं।
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अब किसी रेडियोलाजिस्ट के अवकाश पर जाने से कार्य बाधित नहीं होगा। बेहोशी के एक एसआर मिले हैं, जबकि अस्पताल में मात्र दो एनेस्थेटिक हैं। इसमें किसी के न रहने पर कार्य बाधित हो जाता था, अब ऐसा नहीं होगा। बारह विभागों में एसआर के मिलने से व्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि अभी अन्य विभागों में एसआर की जरूरत है।
क्लीनिकल में चर्म रोग, ईएनटी, मानसिक रोग, चेस्ट व टीबी विभाग में एसआर की जरूरत है, इन विभागों में एक भी एसआर नहीं हैं, जिससे परेशानी होती है।