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हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक होती है मजार : डाॅ.आशुतोष
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- अकीदत के साथ मनाया गया सैयद बाबा का सालाना उर्स
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापपुर/भाटपाररानी। बनकटा ब्लाॅक के ग्राम सभा खुरवसिया दक्षिण में सैय्यद बाबा का दो दिवसीय सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नत मांगी। इसके पूर्व चादरपोशी का जुलूस निकाला गया।
उर्स के पहले दिन जलसे में तमाम उलमा-ए-कराम व शोरा-ए- इस्लाम ने तकरीर की। रात में कव्वाली का कार्यक्रम हुआ। बाबा की मजार पर मुस्लिमों के साथ हिंदुओं की उपस्थिति से मुल्क की गंगा- जमुनी तहजीब जीवंत हो उठी। मुख्य अतिथि सपा के पूर्व विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने बाबा की मजार पर हाजिरी देकर मुल्क की सलामती के लिए दुआएं मांगी और कहा कि संतों और फकीरों का दरबार सबके लिए खुला रहता है। फकीरों के दरबार में कोई भेदभाव नहीं होता है। मजार हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं। सभी धर्म हमें इंसानियत की शिक्षा देते हैं। इस दौरान उर्स कमेटी के लोगों के अलावा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापपुर/भाटपाररानी। बनकटा ब्लाॅक के ग्राम सभा खुरवसिया दक्षिण में सैय्यद बाबा का दो दिवसीय सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नत मांगी। इसके पूर्व चादरपोशी का जुलूस निकाला गया।
उर्स के पहले दिन जलसे में तमाम उलमा-ए-कराम व शोरा-ए- इस्लाम ने तकरीर की। रात में कव्वाली का कार्यक्रम हुआ। बाबा की मजार पर मुस्लिमों के साथ हिंदुओं की उपस्थिति से मुल्क की गंगा- जमुनी तहजीब जीवंत हो उठी। मुख्य अतिथि सपा के पूर्व विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने बाबा की मजार पर हाजिरी देकर मुल्क की सलामती के लिए दुआएं मांगी और कहा कि संतों और फकीरों का दरबार सबके लिए खुला रहता है। फकीरों के दरबार में कोई भेदभाव नहीं होता है। मजार हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं। सभी धर्म हमें इंसानियत की शिक्षा देते हैं। इस दौरान उर्स कमेटी के लोगों के अलावा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
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