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एक चौथाई मजदूरों को ही मिला मनरेगा में काम
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एक चौथाई मजदूरों को ही मिला मनरेगा में काम
जिले में आए हैं 5468 प्रवासी मजदूर 1296 का बन सका जॉबकार्ड
रोजगार के संकट से जूझ रहे 4172 प्रवासी मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिस मनरेगा योजना के तहत प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने का दावा किया जा रहा था वह शुरुआती चरण में ही फ्लॉप होता दिखाई दे रहा है। जिले में अभी तक आए प्रवासी मजदूरों में एक चौथाई का ही जॉबकार्ड बन सका है। चार हजार से अधिक श्रमिक जॉबकार्ड बनवाने के लिए ग्राम प्रधान व मनरेगा सेल का चक्कर लगा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अबतक 5468 प्रवासी मजदूर आए हैं। इनमें 1296 का ही जॉबकार्ड बन सका है। 4172 श्रमिक मनरेगा से नहीं जुड़ पाए हैं। कोरोना महामारी के बीच शहरों से काम धंधा छोड़कर आए मजदूरों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जो बचत के रुपये पैसे थे उससे उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपना पेट पाला। जब जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं बची तो वह जहां थे वहीं से पैदल व साइकिल से अपने गांव को चल दिए। उन्हें लगा कि गांव पहुंचकर वह मनरेगा में काम करके अपना और परिवार का पेट पाल लेंगे। लेकिन यहां खोखले सरकारी दावों के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हो रहा। कोरोना से जान बचाकर शहर से भागे मजदूर गांव आकर भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। जॉबकार्ड नहीं होने के चलते इन्हें मनरेगा में काम नहीं मिल रहा।
इनसेट
सेटिंग के अभाव में नहीं मिल रहा काम
मनरेगा में काम कराने की सरकारी गाइडलाइन जो भी सही मायने में रोजगार सेटिंग वालों को ही मिलती है। पोखरी खोदाई से लगायत कृषि कार्य के लिए कराए जाने वाले संपर्क मार्गों के निर्माण में मशीनों का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। जो मजदूर खाते से रुपये निकालकर ग्राम प्रधान व मनरेगा कर्मियों को देते हैं, उन्हीं के खाते में मजदूरी भुगतान किया जाता है। इसका ताजा उदाहरण रामपुर कारखाना ब्लॉक के डीहा बसंत में देखने को मिला था। तालमेल का यही अभाव प्रवासी मजदूरों के रोजगार में रोड़ा बन रहा है।
इनसेट
मनरेगा में रोजगार की स्थिति
1189 में से 1022 ग्राम पंचायतों में चल रहा काम।
नए सत्र में बने हैं 5460 जॉबकार्ड।
अबतक 10537 परिवारों को मिला है रोजगार।
जिले में एक लाख 16 हजार 977 एक्टिव जॉबकार्ड हैं।
जिले में 5468 प्रवासी मजदूर आए हैं।
1296 प्रवासी मजदूरों का जॉबकार्ड बन पाया है।
वर्जन
प्रवासी मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। जॉबकार्ड बनवाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 9452313135 जारी किया गया है। श्रमिक काम के लिए सीधे रोजगार सेवक से संपर्क करें।
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- गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा।
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जिले में आए हैं 5468 प्रवासी मजदूर 1296 का बन सका जॉबकार्ड
रोजगार के संकट से जूझ रहे 4172 प्रवासी मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिस मनरेगा योजना के तहत प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने का दावा किया जा रहा था वह शुरुआती चरण में ही फ्लॉप होता दिखाई दे रहा है। जिले में अभी तक आए प्रवासी मजदूरों में एक चौथाई का ही जॉबकार्ड बन सका है। चार हजार से अधिक श्रमिक जॉबकार्ड बनवाने के लिए ग्राम प्रधान व मनरेगा सेल का चक्कर लगा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अबतक 5468 प्रवासी मजदूर आए हैं। इनमें 1296 का ही जॉबकार्ड बन सका है। 4172 श्रमिक मनरेगा से नहीं जुड़ पाए हैं। कोरोना महामारी के बीच शहरों से काम धंधा छोड़कर आए मजदूरों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जो बचत के रुपये पैसे थे उससे उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपना पेट पाला। जब जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं बची तो वह जहां थे वहीं से पैदल व साइकिल से अपने गांव को चल दिए। उन्हें लगा कि गांव पहुंचकर वह मनरेगा में काम करके अपना और परिवार का पेट पाल लेंगे। लेकिन यहां खोखले सरकारी दावों के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हो रहा। कोरोना से जान बचाकर शहर से भागे मजदूर गांव आकर भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। जॉबकार्ड नहीं होने के चलते इन्हें मनरेगा में काम नहीं मिल रहा।
इनसेट
सेटिंग के अभाव में नहीं मिल रहा काम
मनरेगा में काम कराने की सरकारी गाइडलाइन जो भी सही मायने में रोजगार सेटिंग वालों को ही मिलती है। पोखरी खोदाई से लगायत कृषि कार्य के लिए कराए जाने वाले संपर्क मार्गों के निर्माण में मशीनों का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। जो मजदूर खाते से रुपये निकालकर ग्राम प्रधान व मनरेगा कर्मियों को देते हैं, उन्हीं के खाते में मजदूरी भुगतान किया जाता है। इसका ताजा उदाहरण रामपुर कारखाना ब्लॉक के डीहा बसंत में देखने को मिला था। तालमेल का यही अभाव प्रवासी मजदूरों के रोजगार में रोड़ा बन रहा है।
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मनरेगा में रोजगार की स्थिति
1189 में से 1022 ग्राम पंचायतों में चल रहा काम।
नए सत्र में बने हैं 5460 जॉबकार्ड।
अबतक 10537 परिवारों को मिला है रोजगार।
जिले में एक लाख 16 हजार 977 एक्टिव जॉबकार्ड हैं।
जिले में 5468 प्रवासी मजदूर आए हैं।
1296 प्रवासी मजदूरों का जॉबकार्ड बन पाया है।
वर्जन
प्रवासी मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। जॉबकार्ड बनवाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 9452313135 जारी किया गया है। श्रमिक काम के लिए सीधे रोजगार सेवक से संपर्क करें।
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- गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा।