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Deoria News: बदहाल है महादेवा ताल, प्रवासी पक्षियों की थमी चहचहाहट

Thu, 01 Feb 2024 03:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 01 Feb 2024 03:08 AM IST
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mahadewa tal in bad confition
बरहज के गड़ेर ​स्थित बदहाल महादेवा ताल   संवाद
फोटो समाचार-30डीईओ 131, 132, 133, 134, 135
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साइबेरियन पक्षियों का उतरता था झुंड, प्रदूषण और विकास न होने से आई इनमें कमी

संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। क्षेत्र के गड़ेर स्थित महादेवा ताल बदहाल है। ताल में कभी साइबेरियन पक्षियों का झुंड उतरता था। इनकी चहचहाहट से ताल गुलजार रहता था। ताल में प्रवासी पक्षियों के न उतरने का कारण लोग प्रदूषण और अव्यवस्था को बता रहे हैं। हालांकि, महादेवा ताल का नाम राष्ट्रीय आर्द्र सूची में दर्ज है।
तत्कालीन डीएम अमित किशोर की देखरेख में ताल के सुंदरीकरण का कार्य शुरू कराया गया था। इससे लोगों में पर्यटन स्थल बनने की उम्मीद जगी थी। लेकिन, योजना के ठंडे बस्ते में चले जाने से ताल का हाल जस का तस है। गड़ेर गांव के पश्चिम महादेवा ताल करीब 70-75 एकड़ में फैला हुआ है। तीन वर्ष पूर्व पर्यटन और वन विभाग की ओर से महादेवा ताल के विकास के लिए कवायद की गई गई थी। कुछ कार्य भी कराया गया था। ताल के किनारे-किनारे पेड़-पौधे, बैठने के लिए बेंच, दुधिया प्रकाश, पर्यटकों के विहार करने के लिए नाव आदि का इंतजाम किया जाना था।
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परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। साफ-सफाई और समुचित प्रबंध न होने से महादेवा ताल का पानी प्रदूषित हो गया है। छठ पर्व पर पूजा-अर्चन के लिए गईं कुछ महिलाएं ताल में जमी जलकुंभी में फंसकर पानी में गिर गई थीं। ग्रामीणों के अनुसार, ताल के अगल-बगल खुदाई करने पर नाव आदि के टूटे अवशेष मिलते हैं। गहराई से सफेद बालू निकलता है।
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लोगों का यह भी कहना है कि यह क्षेत्र नदी क्षेत्र रहा है। सोनूघाट, रानी घाट, बैरियाघाट आदि जगह इसकी पुष्टि भी करते हैं। इंसेट -
ताल के प्रदूषित होने के कारण उतरने से कतरा रहे प्रवासी पक्षी
बरहज। गड़ेर गांव के पश्चिम करीब 70-75 एकड़ में फैला महादेवा ताल कभी प्रवासी पक्षियों के लिए महफूज स्थली था। पक्षियों की चहचहाहट लोगों को खूब भाती थी। प्रवासी पक्षियों को देखने और उनका कलरव सुनने दूर-दराज के लोग आते थे। लोगों का कहना है कि ताल का पानी प्रदूषित होने से प्रवासी पक्षी ताल में उतरने से कतरा रहे हैं। गड़ेर गांव के घूरा निषाद, राजेंद्र वर्मा, दरब टोला के अशोक यादव आदि का कहना है कि ताल में चीन-तिब्बत से आने वाले साइबेरियन पक्षियों का झुंड, जबकि सारस की चहलकदमी देखने को मिलता था। यह नजारा दुर्लभ हो गया है। स्पीक अप-
महादेवा ताल में शीतकालीन मौसम में विदेशी पक्षियों का जमावड़ा होता था। उन्हें देखने के लिए ताल पर लोगों की भीड़ उमड़ती थी। करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम अमित किशोर के नेतृत्व में पर्यटन और वन विभाग की ओर से विकास कार्य कराए जाने की कवायद शुरू की गई थी। इससे ताल के दिन बहुरने की उम्मीद जगी थी। लेकिन ताल जस का तस रह गया है।

-दीनानाथ दूबे, ग्रामीण गड़ेर गड़ेर क्षेत्र में कभी नदी बहा करती थी। गांवों के नाम घाट के रूप में होने से इसकी पुष्टि होती है। महादेवा ताल में आज भी खुदाई करने पर नीचे नावाें आदि के अवशेष और सफेद बालू निकलता है। इसकी साफ-सफाई नहीं किए जाने से ताल का पानी प्रदूषित हो गया है। इससे ताल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
-रमाकांत यादव, ग्रामीण गड़ेर
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