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Deoria News: पैकौली पवहारी महाराज मंदिर में राजा के रूप में होती है प्रभु श्रीराम की पूजा
Fri, 19 Jan 2024 02:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 19 Jan 2024 02:18 AM IST
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देवरिया व बलिया जिले के गांवों में 100 बीघा में फैला है डेरा
पैकौली। अयोध्या में रामलला की पूजा होती है, वहीं मध्य प्रदेश के अलावा जिले में वैष्णो पीठ के पैकौली पवहारी महाराज कुटी के मंदिर में भगवान श्रीराम की पूजा राजा के रूप में होती है। यह मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है। यहां भगवान श्रीराम के साथ ही माता सीता और लक्ष्मण जी की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित है। यहां प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा बिहार के भी श्रद्धालु आते हैं।
अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा से कुटी से जुड़े लोग उत्साहित हैं। कुटी की साफ-सफाई के साथ रंगाई-पुताई की जा रही है। अयोध्या की तरह ही कुटी में 15 जनवरी से लगातार अनुष्ठान चल रहा है।
पवहारी महाराज की कुटी करीब सौ बीघा में है। इसमें बगीचा, पोखरा भी है। प्रथम पवहारी महाराज लक्ष्मी नारायण दास ने मंदिर की स्थापना की थी। इस कुटी से संबंधित एक दर्जन से अधिक कुटी हैं। इसमें एक कुटी अयोध्या के मणि पर्वत स्थान पर स्थित है, जहां अवध बिहारी जी की पूजा की जाती है। पैकौली कुटी की जमात साल के 365 दिन भ्रमण करती है। देवरिया से बलिया तक गांव-गांव जमात का डेरा पड़ता है, जहां ठाकुर जी की पूजा श्रद्धालु करते हैं।
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पवहारी महाराज वर्ष में दो बार रामनवमी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को पैकौली में पधारते हैं। उस दिन मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। मंदिर में भजन-कीर्तन होता है। भगवान श्रीराम की विशेष पूजा पवहारी महाराज द्वारा की जाती है। मंदिर परिसर में मेला लगता है। यहां वर्ष भर भंडारा चलता है। कुटी परिसर में पोखरा है, जिसके घाट सुर्खी, चूना और गुड़ के रस से बनाए गए हैं। यहां साल में दो बार कार्तिका और माघ पूर्णिमा को मेला लगता है और श्रद्धालु पोखरा में स्नान कर दान व पूजन-अर्चन करते हैं।
पैकौली कुटी में चल रहा अनुष्ठान
अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पैकौली कुटी में भी तैयारी की जा रही है। सातवें पवहारी महाराज के कृपापात्र कौशलेंद्र दास 20 जनवरी को कुटी पर पधारेंगे और 22 जनवरी तक रहेंगे। यहां 15 से अनुष्ठान चल रहा है। बृहस्पतिवार को विष्णु सहस्रनाम पाठ किया गया। शुक्रवार को रुद्राभिषेक, शनिवार को सुंदरकांड, रविवार को रामायण पाठ, सोमवार को समापन, प्रसाद वितरण तथा शाम को दीपदान का आयोजन होगा।
बिहार और प्रदेश के कई जिलों में हैं अनुयायी
पैकौली कुटी से संबंधित कुटी प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित बिहार में भी है। पवहारी महाराज की जमात जिस गांव में डेरा डालती है, वहां क्षेत्र, जवार के अनुयायी पहुंचते हैं और ठाकुर की पूजा कर आशीर्वाद लेते हैं।
पैकौली में है हस्तलिखित रामचरित मानस
प्रथम पवहारी महाराज लक्ष्णीनारायण दास ने रामचरित मानस को अपने हस्तलेख में लिखकर उसे एक पुस्तक के रूप में संग्रहित किया, जो हिन्दी-अवधी भाषा में लिखी गई। यह रामचरित मानस दो सौ साल बाद भी एक धरोधर के रूप में जमात में चलती है और इसकी दूसरी प्रति पैकौली में है।
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पैकौली। अयोध्या में रामलला की पूजा होती है, वहीं मध्य प्रदेश के अलावा जिले में वैष्णो पीठ के पैकौली पवहारी महाराज कुटी के मंदिर में भगवान श्रीराम की पूजा राजा के रूप में होती है। यह मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है। यहां भगवान श्रीराम के साथ ही माता सीता और लक्ष्मण जी की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित है। यहां प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा बिहार के भी श्रद्धालु आते हैं।
अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा से कुटी से जुड़े लोग उत्साहित हैं। कुटी की साफ-सफाई के साथ रंगाई-पुताई की जा रही है। अयोध्या की तरह ही कुटी में 15 जनवरी से लगातार अनुष्ठान चल रहा है।
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पवहारी महाराज की कुटी करीब सौ बीघा में है। इसमें बगीचा, पोखरा भी है। प्रथम पवहारी महाराज लक्ष्मी नारायण दास ने मंदिर की स्थापना की थी। इस कुटी से संबंधित एक दर्जन से अधिक कुटी हैं। इसमें एक कुटी अयोध्या के मणि पर्वत स्थान पर स्थित है, जहां अवध बिहारी जी की पूजा की जाती है। पैकौली कुटी की जमात साल के 365 दिन भ्रमण करती है। देवरिया से बलिया तक गांव-गांव जमात का डेरा पड़ता है, जहां ठाकुर जी की पूजा श्रद्धालु करते हैं।
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पवहारी महाराज वर्ष में दो बार रामनवमी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को पैकौली में पधारते हैं। उस दिन मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। मंदिर में भजन-कीर्तन होता है। भगवान श्रीराम की विशेष पूजा पवहारी महाराज द्वारा की जाती है। मंदिर परिसर में मेला लगता है। यहां वर्ष भर भंडारा चलता है। कुटी परिसर में पोखरा है, जिसके घाट सुर्खी, चूना और गुड़ के रस से बनाए गए हैं। यहां साल में दो बार कार्तिका और माघ पूर्णिमा को मेला लगता है और श्रद्धालु पोखरा में स्नान कर दान व पूजन-अर्चन करते हैं।
पैकौली कुटी में चल रहा अनुष्ठान
अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पैकौली कुटी में भी तैयारी की जा रही है। सातवें पवहारी महाराज के कृपापात्र कौशलेंद्र दास 20 जनवरी को कुटी पर पधारेंगे और 22 जनवरी तक रहेंगे। यहां 15 से अनुष्ठान चल रहा है। बृहस्पतिवार को विष्णु सहस्रनाम पाठ किया गया। शुक्रवार को रुद्राभिषेक, शनिवार को सुंदरकांड, रविवार को रामायण पाठ, सोमवार को समापन, प्रसाद वितरण तथा शाम को दीपदान का आयोजन होगा।
बिहार और प्रदेश के कई जिलों में हैं अनुयायी
पैकौली कुटी से संबंधित कुटी प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित बिहार में भी है। पवहारी महाराज की जमात जिस गांव में डेरा डालती है, वहां क्षेत्र, जवार के अनुयायी पहुंचते हैं और ठाकुर की पूजा कर आशीर्वाद लेते हैं।
पैकौली में है हस्तलिखित रामचरित मानस
प्रथम पवहारी महाराज लक्ष्णीनारायण दास ने रामचरित मानस को अपने हस्तलेख में लिखकर उसे एक पुस्तक के रूप में संग्रहित किया, जो हिन्दी-अवधी भाषा में लिखी गई। यह रामचरित मानस दो सौ साल बाद भी एक धरोधर के रूप में जमात में चलती है और इसकी दूसरी प्रति पैकौली में है।