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ऑक्सीजन की कमी से नहीं टूटेगी जिंदगी की डोर
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ऑक्सीजन की कमी से नहीं टूटेगी जिंदगी की डोर
मेडिकल कॉलेज में बनेगा 20 हजार लीटर का लिक्विड प्लांट
ओपीडी के समीप स्थापित होगा प्लांट, तीन माह बाद करने लगेगा काम
बिजली न रहने पर भी पर्याप्त मात्रा में होगी सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में बीस हजार लीटर की क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होगा। इसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी चल रही है। तकरीबन एक करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट के तीन माह बाद कार्य करने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके शुरू होने से बिजली न रहने पर भी ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। वहीं बिल की बचत होगी और यह सस्ता भी पड़ेगा।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के नए भवन में ओपीडी शुरू होने के बाद अब वहां वार्डों को शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी गई है। यहां स्थापित वार्डों के करीब दो सौ बेडों पर ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेगी। ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
इसके मद्देनजर ओपीडी के समीप तथा इमरजेंसी के पीछे तीन हजार स्क्वायर फीट में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट बनाया जाएगा। इसके फाउंडेशन के लिए पैसा भी अवमुक्त हो गया है। यह तीन माह में बनकर तैयार हो जाएगा। यहां लिक्विड ऑक्सीजन के लिए टैंक स्थापित किए जाएंगे। इनकी क्षमता बीस हजार लीटर होगी। प्लांट से टैंकर से लाकर ऑक्सीजन भरा जाएगा। इसके बाद वार्डों में सप्लाई की जाएगी।
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अभी तक पीएसए प्लांट (प्रेशर स्विंग आपरेटस प्लांट) से आपूर्ति की जाती है। इसके रख-रखाव तथा बिजली बिल में अधिक धन खर्च होता है, वहीं इसके चलने पर आवाज होती है। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट (एलएमओ) लगने से हर समय बैकअप रहेगा। दिन में पीएसए तथा रात शोर न हो इसलिए एलएमओ प्लांट से सप्लाई करने की योजना है। साथ ही पीएसए प्लांट के बंद होने पर इससे ऑक्सीजन की सप्लाई निर्बाध रूप से होती रहेगी।
इस प्लांट के साथ ही मेडिकल गैस ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए भी पीएसए प्लांट बन रहा है। इसके कुछ उपकरण लगा दिए गए हैं। पाइप लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। यह मरीजों को ऑक्सीजन के साथ हवा देने तथा सेक्शन मशीन का प्रयोग करने में जरूरत होती है।
इमरजेंसी व एमसीएच विंग में भी होगी आपूर्ति
देवरिया। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट से नई ओपीडी के अलावा इमरजेंसी तथा एमसीएच विंग में भी ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी। इन दोनों स्थानों पर पहले से बिछी लाइन के मेन फोर्ट को खोल दिया गया है। उसमें इन लाइन को भी कनेक्ट कर दिया जाएगा।
इस समय चार हैं पीएसए प्लांट
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में इस समय चार पीएसए प्लांट हैं। इनमें एमसीएच विंग में एक-एक हजार लीटर प्रति मिनट के दो, महिला अस्पताल में एक तथा टीबी क्लीनिक के पास पांच सौ लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक शामिल है, जबकि 85 लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक प्लांट अक्रियाशील है।
कोट
अस्पताल में बीस हजार लीटर क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होगा। तकरीबन एक करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए धन अवमुक्त हो गया है। संभावना है कि यह तीन माह में शुरू हो जाएगा। इसके रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया गया है। प्लांट से ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेगा।
-डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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मेडिकल कॉलेज में बनेगा 20 हजार लीटर का लिक्विड प्लांट
ओपीडी के समीप स्थापित होगा प्लांट, तीन माह बाद करने लगेगा काम
बिजली न रहने पर भी पर्याप्त मात्रा में होगी सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में बीस हजार लीटर की क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होगा। इसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी चल रही है। तकरीबन एक करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट के तीन माह बाद कार्य करने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके शुरू होने से बिजली न रहने पर भी ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। वहीं बिल की बचत होगी और यह सस्ता भी पड़ेगा।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के नए भवन में ओपीडी शुरू होने के बाद अब वहां वार्डों को शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी गई है। यहां स्थापित वार्डों के करीब दो सौ बेडों पर ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेगी। ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
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इसके मद्देनजर ओपीडी के समीप तथा इमरजेंसी के पीछे तीन हजार स्क्वायर फीट में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट बनाया जाएगा। इसके फाउंडेशन के लिए पैसा भी अवमुक्त हो गया है। यह तीन माह में बनकर तैयार हो जाएगा। यहां लिक्विड ऑक्सीजन के लिए टैंक स्थापित किए जाएंगे। इनकी क्षमता बीस हजार लीटर होगी। प्लांट से टैंकर से लाकर ऑक्सीजन भरा जाएगा। इसके बाद वार्डों में सप्लाई की जाएगी।
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अभी तक पीएसए प्लांट (प्रेशर स्विंग आपरेटस प्लांट) से आपूर्ति की जाती है। इसके रख-रखाव तथा बिजली बिल में अधिक धन खर्च होता है, वहीं इसके चलने पर आवाज होती है। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट (एलएमओ) लगने से हर समय बैकअप रहेगा। दिन में पीएसए तथा रात शोर न हो इसलिए एलएमओ प्लांट से सप्लाई करने की योजना है। साथ ही पीएसए प्लांट के बंद होने पर इससे ऑक्सीजन की सप्लाई निर्बाध रूप से होती रहेगी।
इस प्लांट के साथ ही मेडिकल गैस ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए भी पीएसए प्लांट बन रहा है। इसके कुछ उपकरण लगा दिए गए हैं। पाइप लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। यह मरीजों को ऑक्सीजन के साथ हवा देने तथा सेक्शन मशीन का प्रयोग करने में जरूरत होती है।
इमरजेंसी व एमसीएच विंग में भी होगी आपूर्ति
देवरिया। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट से नई ओपीडी के अलावा इमरजेंसी तथा एमसीएच विंग में भी ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी। इन दोनों स्थानों पर पहले से बिछी लाइन के मेन फोर्ट को खोल दिया गया है। उसमें इन लाइन को भी कनेक्ट कर दिया जाएगा।
इस समय चार हैं पीएसए प्लांट
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में इस समय चार पीएसए प्लांट हैं। इनमें एमसीएच विंग में एक-एक हजार लीटर प्रति मिनट के दो, महिला अस्पताल में एक तथा टीबी क्लीनिक के पास पांच सौ लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक शामिल है, जबकि 85 लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक प्लांट अक्रियाशील है।
कोट
अस्पताल में बीस हजार लीटर क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होगा। तकरीबन एक करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए धन अवमुक्त हो गया है। संभावना है कि यह तीन माह में शुरू हो जाएगा। इसके रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया गया है। प्लांट से ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेगा।
-डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक