{"_id":"694599b299dff1085303e368","slug":"laddoo-peda-are-also-adulteratedeat-them-with-caution-deoria-news-c-208-1-sgkp1012-170449-2025-12-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: लड्डू-पेड़ा भी मिलावटी..खाइए जरा संभलकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: लड्डू-पेड़ा भी मिलावटी..खाइए जरा संभलकर
Sat, 20 Dec 2025 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 20 Dec 2025 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मईल। स्थानीय चौराहे पर शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी नेहा त्रिपाठी की अगुवाई में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक किया। इस दौरान विभिन्न दुकानों से खाने-पीने के 25 नमूने लेकर त्वरित जांच की गई। इसमें से पेड़ा व लड्डू का एक-एक नमूना प्रारंभिक जांच में फेल हो गया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दुकानदारों को केमिकल युक्त व मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं करने का निर्देश देते हुए कहा कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि मिलावटी खाद्य सामग्री को न खाएं। उन्होंने बताया कि 25 नमूने लिए गए, जिसे तत्काल वाहन लैब में चेक किया गया। इसमें दो दुकानों से लिए लड्डू और पेड़ा के नमूने में मिलावट मिली। शेष 23 नमूने लगभग ठीक पाए गए। मिलावट करने वाले दुकानदारों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। इस दौरान राम सिंह यादव, करण चौरसिया आदि उपस्थित रहे।
गांव की दुकानों पर भी पहुंचा मिलावटी लड्डू-पेड़ा
मईल। स्थानीय चौराहे समेत आसपास के अन्य चौराहों पर भी अब लड्डू-पेड़ा बाहर से बनकर आने लगे हैं। दुकानदार कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमाने की लालच में उसे खरीदकर ग्राहकों को परोस दे रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि जो सामान वह दूसरों को बेच रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है।
विज्ञापन
शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मोबाइल वैन लाकर खाद्य सामग्री की जांच की। इस दौरान एक दुकान से लड्डू व दूसरी दुकान से लिए गए पेड़ा का नमूना फेल हो गया। दुकानदारों ने बताया कि बड़े कस्बों से डिब्बाबंद मिठाई छोटे चौराहों पर आ रही हैं। उसी मिठाई को दुकानदार अपना बताकर बेच रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि इन मिठाइयों को कब और कहां बनाया गया है, इसकी जानकारी खुद दुकानदारों को भी नहीं है। जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग का नियम है कि मिठाई के ट्रे पर निर्माण व नष्ट करने की तिथि लिखना अनिवार्य है। दुकानदारों को यह मिठाई काफी सस्ते रेट पर मिल रही है, इसलिए वे बस मुनाफा कमाने के लिए बेच रहे हैं। चर्चा है कि दुकानों पर कई दिन की बची रह गई मिठाई को ही फिर से नए सिरे से तैयार कर इसे ग्रामीण दुकानों पर भेजा जा रहा है।
सेहत के लिए नुकसानदेह है ऐसी मिठाई
मिठाई में अगर किसी प्रकार का केमिकल मिला है या फिर एक्सपायर होने के बाद उसे दुबारा बनाया गया है तो ऐसी मिठाई फूड प्वाइजनिंग का कारण बन सकती है। इसके अलावा इससे लिवर को भी नुकसान पहुंचता है। लड्डू को रंगीन बनाने के लिए उसमें जो सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है, वह नुकसानदेह होता है।
डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस-मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दुकानदारों को केमिकल युक्त व मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं करने का निर्देश देते हुए कहा कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि मिलावटी खाद्य सामग्री को न खाएं। उन्होंने बताया कि 25 नमूने लिए गए, जिसे तत्काल वाहन लैब में चेक किया गया। इसमें दो दुकानों से लिए लड्डू और पेड़ा के नमूने में मिलावट मिली। शेष 23 नमूने लगभग ठीक पाए गए। मिलावट करने वाले दुकानदारों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। इस दौरान राम सिंह यादव, करण चौरसिया आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
गांव की दुकानों पर भी पहुंचा मिलावटी लड्डू-पेड़ा
मईल। स्थानीय चौराहे समेत आसपास के अन्य चौराहों पर भी अब लड्डू-पेड़ा बाहर से बनकर आने लगे हैं। दुकानदार कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमाने की लालच में उसे खरीदकर ग्राहकों को परोस दे रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि जो सामान वह दूसरों को बेच रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है।
विज्ञापन
शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मोबाइल वैन लाकर खाद्य सामग्री की जांच की। इस दौरान एक दुकान से लड्डू व दूसरी दुकान से लिए गए पेड़ा का नमूना फेल हो गया। दुकानदारों ने बताया कि बड़े कस्बों से डिब्बाबंद मिठाई छोटे चौराहों पर आ रही हैं। उसी मिठाई को दुकानदार अपना बताकर बेच रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि इन मिठाइयों को कब और कहां बनाया गया है, इसकी जानकारी खुद दुकानदारों को भी नहीं है। जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग का नियम है कि मिठाई के ट्रे पर निर्माण व नष्ट करने की तिथि लिखना अनिवार्य है। दुकानदारों को यह मिठाई काफी सस्ते रेट पर मिल रही है, इसलिए वे बस मुनाफा कमाने के लिए बेच रहे हैं। चर्चा है कि दुकानों पर कई दिन की बची रह गई मिठाई को ही फिर से नए सिरे से तैयार कर इसे ग्रामीण दुकानों पर भेजा जा रहा है।
सेहत के लिए नुकसानदेह है ऐसी मिठाई
मिठाई में अगर किसी प्रकार का केमिकल मिला है या फिर एक्सपायर होने के बाद उसे दुबारा बनाया गया है तो ऐसी मिठाई फूड प्वाइजनिंग का कारण बन सकती है। इसके अलावा इससे लिवर को भी नुकसान पहुंचता है। लड्डू को रंगीन बनाने के लिए उसमें जो सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है, वह नुकसानदेह होता है।
डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस-मेडिकल कॉलेज