आजादी महोत्सव: कन्हई सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत की हिला दी थी जड़, तिरंगा फहराने में थी अहम भूमिका
आजादी के 25वें वर्ष पूरे होने पर स्व. कन्हई सिंह को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। 25 नवंबर 1975 को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद की ओर से परिचय पत्र प्राप्त हुआ और उनकी पेंशन जारी हुई।
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19 वर्ष की अवस्था में कन्हई सिंह पढ़ाई छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूद गए। देवरिया में 1929 में महात्मा गांधी की सभा में शामिल होने के बाद उनके अंदर देश प्रेम का लहू दौड़ पड़ा। कन्हई सिंह ने शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के हुजूम में शामिल होकर अंग्रेजी हुकूमत के मजिस्ट्रेट के ऑफिस में लगे यूनियन जैक को उतारकर तिरंगा फ़हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विकास खंड देवरिया सदर के सोनूघाट निवासी सदल सिंह की इकलौती संतान कन्हई सिंह का देश की आजादी में बड़ा योगदान रहा। जब 1929 में गांधीजी देवरिया आए तो उस समय उनके भाषण से प्रभावित हो वह पढ़ाई छोड़ माता-पिता को बिना बताए घर छोड़ कर उनके साथ हो लिए।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनका खून खौल रहा था। देवरिया पहुंचकर रामचंद्र विद्यार्थी के साथ उनके जत्थे में शामिल हुए जुलूस में तिरंगा लेकर आगे-आगे चल पड़े। ज्योंहि जत्था अंग्रेज मजिस्ट्रेट कार्यालय पर पहुंचा रामचंद्र विद्यार्थी ने आगे बढ़कर भवन पर लगे यूनियन जैक को उतार कर तिरंगा फहराया।
उस समय ब्रिटिश हुकूमत के सैनिकों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इसमें रामचंद्र विद्यार्थी, गोपी मिश्र, शिवराज व घिनहू शहीद हो गए। जबकि अजीज, अवध बिहारी पांडेय, घिनहू, अगनू, गोपाल, गणेश, चंद्रिका लाल के साथ कन्हई सिंह भारत माता की जय के नारे लगाते हुए ब्रिटिश सैनिकों से भिड़ गए।
स्वतंत्रता संग्राम में अपनी बहादुरी का परचम लहराने वाले कन्हई सिंह की मूर्ति सोनूघाट चौराहे आज तक नहीं लग पाई, केवल शिलापट लगा कर छोड़ दिया गया। स्व. कन्हई सिंह की पत्नी शिव कुमारी ने बताया कि मेरे पति ने देश की खातिर अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया, लेकिन उनकी याद में मूर्ति नहीं लगाई गई। मेरे जीते जी मूर्ति लग जाती तो मुझे कोई कसक नहीं रहती।
कहा कि आजादी के 25वें वर्ष पूरे होने पर स्व. कन्हई सिंह को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। 25 नवंबर 1975 को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद की ओर से परिचय पत्र प्राप्त हुआ और उनकी पेंशन जारी हुई।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. कन्हई सिंह के दो पुत्र श्रवण कुमार व नंदलाल थे। इसमें नंदलाल की मृत्यु हो चुकी है। श्रवण कुमार ने बताया कि माता शिव कुमारी को पेंशन, उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के किच्छा तहसील में 15 एकड़ भूमि और रेलवे द्वारा ऑल इंडिया पास मिला है।