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जीवित्पुत्रिका : पुत्र की लंबी आयु के लिए माताओं ने रखा निर्जला व्रत
Sun, 14 Sep 2025 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 14 Sep 2025 11:44 PM IST
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शहर के हनुमान मंदिर पर जीवित्पुत्रिका व्रत पर उमड़ी व्रतियों की भीड़,
संवाद न्यूज एजेंसी,
देवरिया। पुत्र की दीर्घायु के लिए रविवार को श्रद्धालु महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। शाम से ही महिलाएं आकर्षक परिधानों में सज-धज कर कथा और पूजा के लिए मंदिर पहुचने लगीं। मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद महिलाओं ने चील और सियारिन की कथा सुनीं और भगवान से अपने पुत्रों के लिए दीर्घायु होने का वरदान मांगा। जीउत्पुत्रिका व्रत पर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं पूजा कर भगवान से वर मांगती हैं कि उन्होंने जिस प्रकार नाग वंश की रक्षा की थी ठीक उसी प्रकार हमारे पुत्रों की भी रक्षा करें ताकि वे निरोगी और सुखी जीवन जी सकें और जीवन की प्रत्येक कठिनाइयों से भगवान उनकी रक्षा करें। दिन भर बादल और मौसम ठंठा रहने के कारण व्रती महिलाओं को थोड़ी राहत मिली।
व्रती महिलाएं सोमवार की सुबह आठ बजे स्नान कर पूजा-पाठ करने के बाद शुभ मुहूर्त में अपना व्रत खोलेंगी। भागलपुर संवाद के अनुसार, संतान की लंब उम्र के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत की व्रती महिलाएं शाम को भागलपुर के सरयू नदी घाट पहुंची और स्नान करने के बाद पुजा अर्चना की उसके बाद समूह में बैठकर व्रत से सम्बंधित कथा सुनी ।इस दौरान पुलिस के साथ मछुआरे नाव से निगरानी में लगे रहे। सरयू नदी में स्नान करने के बाद दान पुण्य, पूजा-अर्चना की और समूह में बैठकर जिउतिया व्रत से संबंधित कथा सुनी। बरहज संवाद के अनुसार, रविवार को सरयू नदी तट पर महिलाओं ने स्नान-दान किया। वहीं जीमूतवाहन, सूर्यदेव और कुलदेवताओं का पूजा-अर्चन करते हुए कथा श्रवण किया। जबकि दान-पुण्य भी किया। दोपहर बाद नगर में स्नान के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
नगर सहित भलुअनी, मगहरा, सोनाड़ी, करुअना, गड़ेर, कपरवार, पैना, बरांव, देवपार आदि क्षेत्रों से आई महिलाओं ने स्नान-दान किया।
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देवरिया। पुत्र की दीर्घायु के लिए रविवार को श्रद्धालु महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। शाम से ही महिलाएं आकर्षक परिधानों में सज-धज कर कथा और पूजा के लिए मंदिर पहुचने लगीं। मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद महिलाओं ने चील और सियारिन की कथा सुनीं और भगवान से अपने पुत्रों के लिए दीर्घायु होने का वरदान मांगा। जीउत्पुत्रिका व्रत पर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं पूजा कर भगवान से वर मांगती हैं कि उन्होंने जिस प्रकार नाग वंश की रक्षा की थी ठीक उसी प्रकार हमारे पुत्रों की भी रक्षा करें ताकि वे निरोगी और सुखी जीवन जी सकें और जीवन की प्रत्येक कठिनाइयों से भगवान उनकी रक्षा करें। दिन भर बादल और मौसम ठंठा रहने के कारण व्रती महिलाओं को थोड़ी राहत मिली।
व्रती महिलाएं सोमवार की सुबह आठ बजे स्नान कर पूजा-पाठ करने के बाद शुभ मुहूर्त में अपना व्रत खोलेंगी। भागलपुर संवाद के अनुसार, संतान की लंब उम्र के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत की व्रती महिलाएं शाम को भागलपुर के सरयू नदी घाट पहुंची और स्नान करने के बाद पुजा अर्चना की उसके बाद समूह में बैठकर व्रत से सम्बंधित कथा सुनी ।इस दौरान पुलिस के साथ मछुआरे नाव से निगरानी में लगे रहे। सरयू नदी में स्नान करने के बाद दान पुण्य, पूजा-अर्चना की और समूह में बैठकर जिउतिया व्रत से संबंधित कथा सुनी। बरहज संवाद के अनुसार, रविवार को सरयू नदी तट पर महिलाओं ने स्नान-दान किया। वहीं जीमूतवाहन, सूर्यदेव और कुलदेवताओं का पूजा-अर्चन करते हुए कथा श्रवण किया। जबकि दान-पुण्य भी किया। दोपहर बाद नगर में स्नान के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
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नगर सहित भलुअनी, मगहरा, सोनाड़ी, करुअना, गड़ेर, कपरवार, पैना, बरांव, देवपार आदि क्षेत्रों से आई महिलाओं ने स्नान-दान किया।