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Deoria News: पीआईसीयू में कराना है इलाज तो घर से लाएं पंखा
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मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड में भर्ती मरीज के तीमारदारों को घर से लाना पडता है पंखा।संवाद
- उमस भरी गर्मी से मरीज व तीमारदार परेशान
- राहत पाने के लिए बच्चे को लेकर टहल रहे बाहर, इंफेक्शन का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पीआईसीयू में भर्ती छोटे बच्चों और उनके साथ आए तीमारदारों को गर्मी व उमस से परेशानी हो रही है। एसी खराब हाेने से बेड पर नहीं रह पा रहे हैं। घर से पंखा मंगाकर काम चलाया जा रहा है, तो कुछ लोगों को राहत के लिए मरीज को लेकर बाहर टहलना पड़ रहा है। हर तरफ से बंद वार्ड में वेंटिलेशन भी नहीं होता है, जबकि डाॅक्टर भी परेशान हैं।
चिल्ड्रन वार्ड में पंखे की हवा काम नहीं कर रही है। हाथ का पंखा झलना पड़ रहा है, जिससे इंफेक्शन बढ़ने का भी खतरा रहता है। गर्मी और उमस से हर कोई परेशान है। रविवार को पारा 33 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन 42 डिग्री सेल्सियस की गर्मी महसूस हो रही थी। मौसम में बदलाव से वायरस, बैक्टीरिया का प्रकोप होता है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने, दूषित खानपान, पानी के सेवन और सफाई पर ध्यान नहीं देने से बच्चे चपेट में आ रहे हैं। मच्छरों के काटने से भी बीमार हो जा रहे हैं। इन दिनों मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है।
ओपीडी में सामान्य मरीजों काे दवा व सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, लेकिन गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसके लिए पंद्रह बेड के पीआईसीयू की सुविधा है, जिसमें दस व पांच बेड का वार्ड है, जबकि बीस बेड का चिल्ड्रन वार्ड है। पीआईसीयू एयर डाइट है, इसमें मरीजों के लिए एसी लगाई है, ताकि गर्मी से निजात मिले व संक्रमण न फैले, जिससे वह जल्द स्वस्थ हो सकें, लेकिन यहां लगी एसी मरम्मत के कुछ दिन बाद ही काम करना बंद कर देती है, जिससे बनने कम से कम एक माह का समय लग जाता है।
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इधर करीब दस दिन से पांच बेड के वार्ड में लगी दोनों एसी व दोनों वालफैन खराब है। यहां मरीज व तीमारदार गर्मी से बेहाल हैं। उन्हें घर से टेबल व पेडेस्टियल फैन लगाकर काम चलाना पड़ता है। रविवार को यहां भर्ती सुरौली थाना क्षेत्र के बांसपार बैदा के अक्षांश 14 व उसकी बहन अक्षिता 5 का इलाज चल रहा था। अक्षांश शनिवार तो उसकी बहन तीन दिन से भर्ती थी। एसी, पंखा खराब होने से परेशान थे। बताया कि गर्मी से यहां दिक्कत हो रही है। इसलिए घर से पंखा मंगाकर राहत पाने का प्रयास किया जा रहा है। पिंडी की प्रतिमा अपने तीन माह के बेटे को लेकर तीन दिन से भर्ती थी। बताया कि गर्मी से परेशानी हो रही है। अंदर बच्चा रो रहा है। इसलिए उसे बाहर लेकर टहलना पड़ रहा है। दस बेड के वार्ड में तीन काम कर रही है, जिससे थोड़ी राहत है। पीआईसीयू में सुबह 20 मरीज भर्ती थे। इसमें बुखार के करीब 14, उल्टी-दस्त के तीन, पेट दर्द व सांस के चार व अन्य मरीज हैं। मरीज के उल्टी-दस्त होने से संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहता है, जबकि बुखार से आराम मिलने में समय लगता है।
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चिल्ड्रन वार्ड में भी गर्मी से मरीज परेशान
मेडिकल कॉलेज में बच्चों के इलाज के लिए बीस बेड का चिल्ड्रन वार्ड में गर्मी से मरीज परेशान हैं। पंखा की हवा से राहत नहीं पा रही है।यहां करीब 17 बच्चों का इलाज चल रहा था। इसमें सबसे अधिक बुखार के दस, उल्टी-दस्त के पांच, पेट दर्द व सांस के एक-एक मरीज थे। गर्मी से इन हाल बेहाल था। कुछ तीमारदार हाथ पंखा झलकर मरीज को गर्मी से निजात दिलाने में जुटे थे।
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एसी खराब, डॉक्टर भी परेशान
पीआईसीयू में भर्ती बच्चों के इलाज के लिए चौबीस घंटे डॉक्टर तैनात रहते हैं। इनके लिए अलग कक्ष है। वहां लगी एसी भी दस दिन से खराब है, जिससे डॉक्टर को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दिन तो किसी तरह बीत जा रहा है, लेकिन गर्मी व उमस में रात की ड्यूटी भारी पड़ रही है। उन्हें किसी तरह समय गुजारना पड़ता है। यहां लगे दो वालफैन से राहत नहीं मिल पा रही है। पिकू वार्ड में लगे एसी की हाल में ही मरम्मत हुई थी, उसके कुछ ही दिन बाद खराबी आ गई। यह सिलसिला गर्मी शुरू होने के बाद से ही चल रहा है।
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पीआईसीयू वार्ड में मरीजों और डॉक्टर कक्ष में एसी लगाई गई है। उसमें आई खराबी को दूर करने के लिए मैकेनिक को निर्देश दिए गए हैं। जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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- राहत पाने के लिए बच्चे को लेकर टहल रहे बाहर, इंफेक्शन का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पीआईसीयू में भर्ती छोटे बच्चों और उनके साथ आए तीमारदारों को गर्मी व उमस से परेशानी हो रही है। एसी खराब हाेने से बेड पर नहीं रह पा रहे हैं। घर से पंखा मंगाकर काम चलाया जा रहा है, तो कुछ लोगों को राहत के लिए मरीज को लेकर बाहर टहलना पड़ रहा है। हर तरफ से बंद वार्ड में वेंटिलेशन भी नहीं होता है, जबकि डाॅक्टर भी परेशान हैं।
चिल्ड्रन वार्ड में पंखे की हवा काम नहीं कर रही है। हाथ का पंखा झलना पड़ रहा है, जिससे इंफेक्शन बढ़ने का भी खतरा रहता है। गर्मी और उमस से हर कोई परेशान है। रविवार को पारा 33 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन 42 डिग्री सेल्सियस की गर्मी महसूस हो रही थी। मौसम में बदलाव से वायरस, बैक्टीरिया का प्रकोप होता है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने, दूषित खानपान, पानी के सेवन और सफाई पर ध्यान नहीं देने से बच्चे चपेट में आ रहे हैं। मच्छरों के काटने से भी बीमार हो जा रहे हैं। इन दिनों मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है।
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ओपीडी में सामान्य मरीजों काे दवा व सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, लेकिन गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसके लिए पंद्रह बेड के पीआईसीयू की सुविधा है, जिसमें दस व पांच बेड का वार्ड है, जबकि बीस बेड का चिल्ड्रन वार्ड है। पीआईसीयू एयर डाइट है, इसमें मरीजों के लिए एसी लगाई है, ताकि गर्मी से निजात मिले व संक्रमण न फैले, जिससे वह जल्द स्वस्थ हो सकें, लेकिन यहां लगी एसी मरम्मत के कुछ दिन बाद ही काम करना बंद कर देती है, जिससे बनने कम से कम एक माह का समय लग जाता है।
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इधर करीब दस दिन से पांच बेड के वार्ड में लगी दोनों एसी व दोनों वालफैन खराब है। यहां मरीज व तीमारदार गर्मी से बेहाल हैं। उन्हें घर से टेबल व पेडेस्टियल फैन लगाकर काम चलाना पड़ता है। रविवार को यहां भर्ती सुरौली थाना क्षेत्र के बांसपार बैदा के अक्षांश 14 व उसकी बहन अक्षिता 5 का इलाज चल रहा था। अक्षांश शनिवार तो उसकी बहन तीन दिन से भर्ती थी। एसी, पंखा खराब होने से परेशान थे। बताया कि गर्मी से यहां दिक्कत हो रही है। इसलिए घर से पंखा मंगाकर राहत पाने का प्रयास किया जा रहा है। पिंडी की प्रतिमा अपने तीन माह के बेटे को लेकर तीन दिन से भर्ती थी। बताया कि गर्मी से परेशानी हो रही है। अंदर बच्चा रो रहा है। इसलिए उसे बाहर लेकर टहलना पड़ रहा है। दस बेड के वार्ड में तीन काम कर रही है, जिससे थोड़ी राहत है। पीआईसीयू में सुबह 20 मरीज भर्ती थे। इसमें बुखार के करीब 14, उल्टी-दस्त के तीन, पेट दर्द व सांस के चार व अन्य मरीज हैं। मरीज के उल्टी-दस्त होने से संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहता है, जबकि बुखार से आराम मिलने में समय लगता है।
चिल्ड्रन वार्ड में भी गर्मी से मरीज परेशान
मेडिकल कॉलेज में बच्चों के इलाज के लिए बीस बेड का चिल्ड्रन वार्ड में गर्मी से मरीज परेशान हैं। पंखा की हवा से राहत नहीं पा रही है।यहां करीब 17 बच्चों का इलाज चल रहा था। इसमें सबसे अधिक बुखार के दस, उल्टी-दस्त के पांच, पेट दर्द व सांस के एक-एक मरीज थे। गर्मी से इन हाल बेहाल था। कुछ तीमारदार हाथ पंखा झलकर मरीज को गर्मी से निजात दिलाने में जुटे थे।
एसी खराब, डॉक्टर भी परेशान
पीआईसीयू में भर्ती बच्चों के इलाज के लिए चौबीस घंटे डॉक्टर तैनात रहते हैं। इनके लिए अलग कक्ष है। वहां लगी एसी भी दस दिन से खराब है, जिससे डॉक्टर को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दिन तो किसी तरह बीत जा रहा है, लेकिन गर्मी व उमस में रात की ड्यूटी भारी पड़ रही है। उन्हें किसी तरह समय गुजारना पड़ता है। यहां लगे दो वालफैन से राहत नहीं मिल पा रही है। पिकू वार्ड में लगे एसी की हाल में ही मरम्मत हुई थी, उसके कुछ ही दिन बाद खराबी आ गई। यह सिलसिला गर्मी शुरू होने के बाद से ही चल रहा है।
पीआईसीयू वार्ड में मरीजों और डॉक्टर कक्ष में एसी लगाई गई है। उसमें आई खराबी को दूर करने के लिए मैकेनिक को निर्देश दिए गए हैं। जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस