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बच्चों को हो बुखार तो तत्काल ले जाएं अस्पताल
Tue, 18 Jun 2019 11:50 PM IST
राकेश पांडेय
deoria
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Tue, 18 Jun 2019 11:50 PM IST
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जिला अस्पताल में भर्ती बच्चे।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। मुजफ्फरपुर में जेई/एईएस से मासूमों की मौत से हर कोई सहमा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग भले ही खुद के सतर्क होने का दावा कर रहा है, लेकिन उसे यह चिंता भी है कि कहीं जानकारी के अभाव में लोग बीमारी के गलत उपचार में न फंस जाए। लिहाजा, वह तेज बुखार होने की स्थिति में शिथिलता न बरतते हुए तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह लापरवाही घातक हो सकती है।
जिले में एक जनवरी से अब तक 507 हाई ग्रेड फीवर से पीड़ित बच्चे भर्ती किए गए हैं। इसमें 15 इंसेफेलाइटिस से प्रभावित हैं। एक एईएस और एक जेई से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। बाकी बच्चों में सामान्य बुखार पाया गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जेई पर लगभग नियंत्रण कर लिया गया है। सिर्फ एईएस के मरीज मिल रहे हैं, इनकी भी संख्या पहले से काफी कम है। जिला अस्पताल में 20 से अधिक बच्चे चिल्ड्रेन वार्ड और पांच बच्चे पीआईसीयू वार्ड में भर्ती हैं। बिहार की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग जरूर अलर्ट है, लेकिन आम लोगों में जानलेवा बुखार की जानकारी न होने से चिंता बनी हुई है। छोलाछाप या घरेलू इलाज कर वह बच्चों की जिंदगी जोखिम में डाल सकते हैं। 2018 में जिले में 1005 हाईग्रेड फीवर, 271 एईएस के मरीज मिले थे, जिसमें 20 की एईएस से मौत हुई थी। इस बाबत सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह एक जुलाई से मनाया जाएगा। इसके तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा। तेज बुखार के मरीजों की मॉनिटरिंग की जा रही है।
बच्चों का ऐसे करें बचाव...
बच्चों को गंदे पानी के संपर्क में न आने दें।
मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी न जमा होने दें।
तेज धूप में बच्चों को बाहर नहीं निकलने दें।
बच्चे में तेज बुखार (चमकी) होते ही नजदीकी पीएचसी लेकर पहुंचे।
अपने मन से और गांव के कथित डॉक्टरों से इलाज नहीं कराएं।
पीएचसी, आशा, सेविका को जानकारी देने पर एंबुलेंस की सुविधा मिलेगी।
एंबुलेंस से बच्चे को एसकेएमीएच में इलाज के लिए लाने में कोई परेशानी नहीं होगी।
चमकी व तेज बुखार बीमारी है यह देवता व भूत प्रेत का लक्षण नहीं है।
ओझा से झाड़फूंक करवाने की जगह सरकारी अस्पताल लेकर बच्चे को आएं।
ये हैं जेई/एईएस के लक्षण
तेज बुखार, सिर दर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी होना, सुस्ती, भूख कम लगना आदि इसके लक्षण होते हैं। इसकी अनदेखी करने से बीमारी से अचानक अटैक होता है। और अस्पताल आते-आते बच्चा काफी गंभीर हो जाता है। अगर ऐसे में जान बचती भी है तो कई तरह के शारीरिक विकार होने का खतरा अधिक रहता है। कार्यशाला का आयोजन कर सीएचसी व पीएचसी के प्रभारी, स्टाफ नर्सों को इलाज के लिए टिप्स दिए गए हैं।
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन ठप
देवरिया। तीन दिनों से जिला अस्पताल में मरीजों का सीटी स्कैन नहीं हो रहा है। इसके चलते मरीजों को निजी जांच घरों में जाना पड़ रहा है। इसकी वजह मशीन का उपकरण जलना बताई जा रही है। इसे ठीक होने में अभी दो दिन और लग सकते हैं।
जिला अस्पताल में सुचारु रूप से बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण मरीजों को जहां गर्मी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, जांच घरों में लगे उपकरण भी नहीं चल रहे हैं। जिला अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन का उपकरण तीन दिन पूर्व अचानक जल गया और जांच ठप हो गया। मरीज इसकी शिकायत सीएमएस और सीएमओ के पास लेकर पहुंच रहे हैं। सीटी स्कैन कराने के लिए डॉक्टर एक चिह्नित जांच घर में भेज रहे हैं। इसके एवज में एक हजार से 1500 रुपये मरीजों को देना पड़ रहा है। इसके अलावा पैथॉलाजी में लगीं मशीनें भी गर्मी के कारण नहीं चल पा रही हैं। इसकी वजह से जांच प्रभावित हो रही है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि जिला अस्पताल की बिजली जुगाड़ से चल रही है। इसके चलते मशीनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। सीटी स्कैन मशीन दो दिन के अंदर ठीक हो जाएगी।
एक माह से कैल्शियम और ऑयरन की गोली खत्म
देवरिया। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को कैल्शियम और ऑयरन की गोली नहीं मिल रही है। एक माह से दवा अस्पताल में खत्म है। जिला अस्पताल में डिमांड के अनुसार लखनऊ से दवा खरीदकर भेजी जा रही है। हड्डी रोग विभाग में इलाज के लिए आने वाले मरीज बाहर से कैल्शियम की दवा लिखने पर डॉक्टर से तकरार कर रहे हैं। इसे लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है। एक माह बीतने के बाद भी ऑयरन और कैल्शियम की दवाएं जिला अस्पताल में नहीं पहुंची। तीन बार स्टोर इंचार्ज दवा के लिए लखनऊ डिमांड भेज चुके हैं। इस बाबत सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि पहले लोकल स्तर पर दवाओं की खरीद की जाती थी, अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। डिमांड के अनुसार लखनऊ से दवा खरीदकर भेजी जा रही है जो समय से नहीं पहुंच रही है।
पीएचसी में तोड़फोड़ करने वालों पर केस
रामपुर कारखाना। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी पर रविवार को देर रात हुई तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. तैयब अली की तहरीर पर 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। तहरीर में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. तैयब अली ने आरोप लगाया है कि 16 जून की रात में पौने नौ बजे के लगभग डुमरी निवासी गुड्डू गौड़ मरीज को दिखाने के बहाने 15-20 असामाजिक तत्वों के साथ अस्पताल परिसर में घुस गए। एंबुलेंस, बाइक, स्कूटी को क्षतिग्रस्त कर दिया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी से भी मारपीट की। इसमें चौकीदार गोपीचंद, वार्ड ब्वॉय सच्चिदानंद गिरी गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ में अस्पताल के उपकरण कुर्सी, वैक्सीन कैरियर, फार्मासिस्ट कक्ष का दरवाजा तोड़कर दवा लूटने का भी प्रयास किया। पुलिस ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की तहरीर पर गुड्डू समेत 20 लोगों के विरुद्ध बलवा, मारपीट, तोड़फोड़, सरकारी काम में बाधा सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
जेडी के निरीक्षण नदारद रहे डॉक्टर-कर्मचारी
सलेमपुर। इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) का औचक निरीक्षण मंगलवार को जेडी डॉ. गयासुद्दीन खान और सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार ने किया। सफाई व्यवस्था बेहतर करने और दवाओं की उपलब्धता की बात कही। निरीक्षण के दौरान एसीएमओ व प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ. सुरेंद्र सिंह समेत कई कर्मचारी ड्यूटी से लापता मिले।
सलेमपुर सीएचसी पर तैनात कर्मचारी और डॉक्टर अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। काफी दिनों से तैनात लोकल के रहने वाले प्रभावशाली कर्मचारी अपने हिसाब से यहां पर ड्यूटी बजाते हैं। सुबह 8:30 बजे जेडी और सीएमओ पहुंचे तो अधिकांश डॉक्टर और कर्मचारी लापता थे, ईटीसी वार्ड में स्टाफ नर्स मौजूद मिली। उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो डॉ. राजेश कुमार, फार्मासिस्ट सुरेश चन्द्र यादव, लैब टेक्नीशियन उमेश तिवारी, ओमप्रकाश गौड़, एसटीएस संजय यादव ड्यूटी पर मौजूद रहे। सीएचसी के प्रभारी व एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. वीके मिश्रा दो दिन से लापता रहे। जितेंद्र मिश्र व सुमन मौर्या, चीफ फार्मासिस्ट एसएन यादव, डॉ. सुमन गुप्ता अस्पताल नहीं पहुंचे थे। डॉ. वीके मिश्रा की भी ड्यूटी से नदारद रहकर देवरिया में दाल मिल के पास प्राइवेट प्रैक्टिस करने की उपस्थित लोगों ने शिकायत की। सीएमओ ने बताया कि गैरहाजिर कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ईटीसी वार्ड को बेहतर तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में एक जनवरी से अब तक 507 हाई ग्रेड फीवर से पीड़ित बच्चे भर्ती किए गए हैं। इसमें 15 इंसेफेलाइटिस से प्रभावित हैं। एक एईएस और एक जेई से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। बाकी बच्चों में सामान्य बुखार पाया गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जेई पर लगभग नियंत्रण कर लिया गया है। सिर्फ एईएस के मरीज मिल रहे हैं, इनकी भी संख्या पहले से काफी कम है। जिला अस्पताल में 20 से अधिक बच्चे चिल्ड्रेन वार्ड और पांच बच्चे पीआईसीयू वार्ड में भर्ती हैं। बिहार की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग जरूर अलर्ट है, लेकिन आम लोगों में जानलेवा बुखार की जानकारी न होने से चिंता बनी हुई है। छोलाछाप या घरेलू इलाज कर वह बच्चों की जिंदगी जोखिम में डाल सकते हैं। 2018 में जिले में 1005 हाईग्रेड फीवर, 271 एईएस के मरीज मिले थे, जिसमें 20 की एईएस से मौत हुई थी। इस बाबत सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह एक जुलाई से मनाया जाएगा। इसके तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा। तेज बुखार के मरीजों की मॉनिटरिंग की जा रही है।
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बच्चों का ऐसे करें बचाव...
बच्चों को गंदे पानी के संपर्क में न आने दें।
मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी न जमा होने दें।
तेज धूप में बच्चों को बाहर नहीं निकलने दें।
बच्चे में तेज बुखार (चमकी) होते ही नजदीकी पीएचसी लेकर पहुंचे।
अपने मन से और गांव के कथित डॉक्टरों से इलाज नहीं कराएं।
पीएचसी, आशा, सेविका को जानकारी देने पर एंबुलेंस की सुविधा मिलेगी।
एंबुलेंस से बच्चे को एसकेएमीएच में इलाज के लिए लाने में कोई परेशानी नहीं होगी।
चमकी व तेज बुखार बीमारी है यह देवता व भूत प्रेत का लक्षण नहीं है।
ओझा से झाड़फूंक करवाने की जगह सरकारी अस्पताल लेकर बच्चे को आएं।
ये हैं जेई/एईएस के लक्षण
तेज बुखार, सिर दर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी होना, सुस्ती, भूख कम लगना आदि इसके लक्षण होते हैं। इसकी अनदेखी करने से बीमारी से अचानक अटैक होता है। और अस्पताल आते-आते बच्चा काफी गंभीर हो जाता है। अगर ऐसे में जान बचती भी है तो कई तरह के शारीरिक विकार होने का खतरा अधिक रहता है। कार्यशाला का आयोजन कर सीएचसी व पीएचसी के प्रभारी, स्टाफ नर्सों को इलाज के लिए टिप्स दिए गए हैं।
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन ठप
देवरिया। तीन दिनों से जिला अस्पताल में मरीजों का सीटी स्कैन नहीं हो रहा है। इसके चलते मरीजों को निजी जांच घरों में जाना पड़ रहा है। इसकी वजह मशीन का उपकरण जलना बताई जा रही है। इसे ठीक होने में अभी दो दिन और लग सकते हैं।
जिला अस्पताल में सुचारु रूप से बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण मरीजों को जहां गर्मी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, जांच घरों में लगे उपकरण भी नहीं चल रहे हैं। जिला अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन का उपकरण तीन दिन पूर्व अचानक जल गया और जांच ठप हो गया। मरीज इसकी शिकायत सीएमएस और सीएमओ के पास लेकर पहुंच रहे हैं। सीटी स्कैन कराने के लिए डॉक्टर एक चिह्नित जांच घर में भेज रहे हैं। इसके एवज में एक हजार से 1500 रुपये मरीजों को देना पड़ रहा है। इसके अलावा पैथॉलाजी में लगीं मशीनें भी गर्मी के कारण नहीं चल पा रही हैं। इसकी वजह से जांच प्रभावित हो रही है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि जिला अस्पताल की बिजली जुगाड़ से चल रही है। इसके चलते मशीनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। सीटी स्कैन मशीन दो दिन के अंदर ठीक हो जाएगी।
एक माह से कैल्शियम और ऑयरन की गोली खत्म
देवरिया। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को कैल्शियम और ऑयरन की गोली नहीं मिल रही है। एक माह से दवा अस्पताल में खत्म है। जिला अस्पताल में डिमांड के अनुसार लखनऊ से दवा खरीदकर भेजी जा रही है। हड्डी रोग विभाग में इलाज के लिए आने वाले मरीज बाहर से कैल्शियम की दवा लिखने पर डॉक्टर से तकरार कर रहे हैं। इसे लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है। एक माह बीतने के बाद भी ऑयरन और कैल्शियम की दवाएं जिला अस्पताल में नहीं पहुंची। तीन बार स्टोर इंचार्ज दवा के लिए लखनऊ डिमांड भेज चुके हैं। इस बाबत सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि पहले लोकल स्तर पर दवाओं की खरीद की जाती थी, अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। डिमांड के अनुसार लखनऊ से दवा खरीदकर भेजी जा रही है जो समय से नहीं पहुंच रही है।
पीएचसी में तोड़फोड़ करने वालों पर केस
रामपुर कारखाना। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी पर रविवार को देर रात हुई तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. तैयब अली की तहरीर पर 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। तहरीर में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. तैयब अली ने आरोप लगाया है कि 16 जून की रात में पौने नौ बजे के लगभग डुमरी निवासी गुड्डू गौड़ मरीज को दिखाने के बहाने 15-20 असामाजिक तत्वों के साथ अस्पताल परिसर में घुस गए। एंबुलेंस, बाइक, स्कूटी को क्षतिग्रस्त कर दिया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी से भी मारपीट की। इसमें चौकीदार गोपीचंद, वार्ड ब्वॉय सच्चिदानंद गिरी गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ में अस्पताल के उपकरण कुर्सी, वैक्सीन कैरियर, फार्मासिस्ट कक्ष का दरवाजा तोड़कर दवा लूटने का भी प्रयास किया। पुलिस ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की तहरीर पर गुड्डू समेत 20 लोगों के विरुद्ध बलवा, मारपीट, तोड़फोड़, सरकारी काम में बाधा सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
जेडी के निरीक्षण नदारद रहे डॉक्टर-कर्मचारी
सलेमपुर। इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) का औचक निरीक्षण मंगलवार को जेडी डॉ. गयासुद्दीन खान और सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार ने किया। सफाई व्यवस्था बेहतर करने और दवाओं की उपलब्धता की बात कही। निरीक्षण के दौरान एसीएमओ व प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ. सुरेंद्र सिंह समेत कई कर्मचारी ड्यूटी से लापता मिले।
सलेमपुर सीएचसी पर तैनात कर्मचारी और डॉक्टर अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। काफी दिनों से तैनात लोकल के रहने वाले प्रभावशाली कर्मचारी अपने हिसाब से यहां पर ड्यूटी बजाते हैं। सुबह 8:30 बजे जेडी और सीएमओ पहुंचे तो अधिकांश डॉक्टर और कर्मचारी लापता थे, ईटीसी वार्ड में स्टाफ नर्स मौजूद मिली। उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो डॉ. राजेश कुमार, फार्मासिस्ट सुरेश चन्द्र यादव, लैब टेक्नीशियन उमेश तिवारी, ओमप्रकाश गौड़, एसटीएस संजय यादव ड्यूटी पर मौजूद रहे। सीएचसी के प्रभारी व एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. वीके मिश्रा दो दिन से लापता रहे। जितेंद्र मिश्र व सुमन मौर्या, चीफ फार्मासिस्ट एसएन यादव, डॉ. सुमन गुप्ता अस्पताल नहीं पहुंचे थे। डॉ. वीके मिश्रा की भी ड्यूटी से नदारद रहकर देवरिया में दाल मिल के पास प्राइवेट प्रैक्टिस करने की उपस्थित लोगों ने शिकायत की। सीएमओ ने बताया कि गैरहाजिर कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ईटीसी वार्ड को बेहतर तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।