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Deoria News: रंग-बिरंगा दिखने लगा होली का बाजार, चहके दुकानदार
Sun, 05 Mar 2023 11:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 05 Mar 2023 11:24 PM IST
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छहमुखी चौराहा, तिलक रोड, अर्जुन रोड पर दिख रही रौनक, घरों में गुझिया, नमकीन, पापड़ बनाने की तैयारियां तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जैसे-जैसे होली का पर्व नजदीक आ रहा है। वैसे ही शहर के प्रमुख बाजारों में रौनक बढ़ रही है। पर्व मनाने के लिए सामान की सूची के साथ लोग दुकानों पर पहुंचने लगे हैं। दुकानदार भी एक-एक कर उन्हें निकलवाने में लगे हैं। भीड़ के चलते कहीं दो से तीन घंटे तो कहीं पूरा दिन लग जा रहा है। उधर, पिचकारी, रंग, गुलाल, मेवा की दुकानों पर इस समय सबसे ज्यादा ग्राहक आ रहे हैं।
शहर के तिलक रोड, छहमुखी चौराहा, अर्जुन रोड, सुर्तीहट्टा रोड, अंसारी रोड, हनुमान मंदिर रोड पर पर्व का उत्साह दिख रहा है। इन जगहों पर तरह-तरह की परंपरागत व आधुनिक पिचकारियां, रंग, अबीर-गुलाल की दुकानें सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
तिलक रोड के दुकानदार संतोष चौरसिया ने बताया कि आरारोट से बना लाल, हरा, पीला, नीला, आसमानी अबीर 80 रुपये किलो बिक रहा है। कई ग्राहक हर्बल रंग, अबीर-गुलाल की भी मांग कर रहे हैं जो आरारोट से बने अबीर से महंगा है। पिचकारी की दुकानों पर पहुंचने वालों में बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।
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तेल के दाम गिरने से राहत तो गरी में आया उछाल
मालवीय रोड के किराना दुकानदार अरुण बरनवाल ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार सरसों तेल, रिफाइन के दाम गिरे हैं। वहीं, मैदा व गरी के मूल्य में तेजी है। गरी 320 रुपये किलो, वहीं, मैदा 35 रुपये किलो अभी बिक रहा है।
घरों में पकवान बनाने की चल रहीं तैयारियां
इधर, घरों में महिलाएं पर्व की तैयारियों के तहत सामान की सूची बनाने, आने पर उन्हें सहेज कर रखने में लगी हैं। जहां सामान दुकान से आ चुके हैं, वहां गुझिया, मठरी, खस्ता, नमकीन, पापड़, गुलाब जामुन बनाने की तैयारी हो रही है। बच्चे भी बता रहे हैं कि उनकी पसंद का क्या बनेगा। ऐसे में आम से लेकर खास तक सभी लोगों के यहां पर्व की खुशी नजर आने लगी है।
होलिकादहन समितियों ने भी तैयारियों को दिया अंतिम रूप
शहर में मालवीय रोड पुल के नीचे, कस्तूरबा राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, खरजरवा, सोमनाथ मंदिर के पास, हनुमान मंदिर रोड में प्रमुख होलिकादहन की समितियां कार्यरत हैं। निर्धारित स्थलों पर सूखी लकड़ी, कंडा, पुआल आदि जुटाने का कार्य तेजी से चल रहा है।
आज रात्रि में 12:23 से 1:35 बजे तक होलिकादहन का शुुुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार छह मार्च की देर रात में ही होलिकादहन के शुभ मुहूर्त है। पवहारी संस्कृत महाविद्यालय बैकुंठपुर के ज्योतिषाचार्य पं. विवेक उपाध्याय व रीलीजियस स्काॅलर्स सोसायटी के अध्यक्ष पं. शरद चंद मिश्र बताते हैं कि इस वर्ष छह मार्च को भद्रा सायंकाल 3:56 बजे से सात मार्च को प्रात:काल 4:48 बजे तक होने से होलिकादहन भ्रदा के पुंछ भाग में होगा। ऐसे में छह मार्च की रात में 12:23 से 1:35 बजे के बीच ही होलिकादहन किया जाएगा।
स्पीकअप
होली पर्व को लेकर घरों में तो तैयारियां चल ही रहीं हैं। सोमवार को स्कूल में बच्चों के बीच पर्व पर आधारित पोस्टर, कविता-कहानी की प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। बच्चे भी इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं।
-क्षितिज सिंह, सहायक अध्यापक पगरा
अभी घर की साफ-सफाई चल रही है। सामान की सूची दुकान पर पहुंच गई है। आने पर परंपरागत पकवान बनाएंगे। होली के दिन अबीर-गुलाल लगाकर मेहमानों का स्वागत करने की तैयारी चल रही है।
-शांति देवी, गृहिणी पुरवा चौराहा
एक नजर
1185 ग्राम पंचायतों में 1495 जगहों पर होलिकादहन
पांच जोन में बंटा जनपद, सुपर जोनल मजिस्ट्रेट की तैनाती
1905 सफाई कर्मियों की ड्यूटी
विकास भवन में कंट्रोल रूम स्थापित
पानी से जुड़ी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 18001801382
बिजली समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 8004930620
पुलिस के लिए 112, एंबुलेंस के लिए 108
लंबी दूरी के मार्गों पर बढ़ाई गईं बसें
गोरखपुर-सलेमपुर, बरहज रूट पर कम रहे यात्री, रविवार का भी दिखा असर
....फोटो समाचार
- - अधिकारियों को उम्मीद पर्व के और नजदीक आने पर बढ़ेगी संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। होली पर्व को देखते हुए डिपो ने दिल्ली, लखनऊ, कानपुर रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई है। हालांकि, लोकल यात्रियों की संख्या कम हो गई है। सामान्य दिनों में जहां 35 से 36 हजार यात्री प्रतिदिन निकल रहे थे। इस समय 32 हजार यात्री ही डिपो की बसों से यात्रा कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि पर्व के नजदीक आने पर यात्रियों की संख्या और बढ़ेगी।
देवरिया डिपो में वर्तमान में निगम की 65 एवं अनुबंधित 112 बसों का संचालन हो रहा है। होली पर्व को देखते हुए मुख्यालय के निर्देश पर लंबी दूरी वाले मार्गों पर बसों की संख्या बढ़ाई गई है। सामान्य दिनों में देवरिया से दिल्ली रूट पर तीन, कानपुर पर पांच एवं लखनऊ के लिए दो बसें प्रतिदिन चलती हैं।
इधर, पर्व मनाने के लिए बाहर से आने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। ऐसे में दिल्ली के लिए छह, कानपुर सात और लखनऊ रूट पर पांच बसों को लगाया गया है। इधर, लोकल रूटों पर रविवार को यात्रियों की संख्या बेहद कम रही। आलम यह रहा कि दोपहर एक बजे तक डिपो में गोरखपुर जाने के लिए 12 से अधिक बसें यात्रियों के इंतजार में खड़ी रहीं। विभाग की ओर से इधर क्रम से ही बसों को गोरखपुर व सलेमपुर-लार रूट पर भेजा जा रहा है।
कोट
होली के मद्देनजर लंबी दूरी पर बसों की संख्या बढ़ाई गई है। लोकल रूटों पर संचालन अनुबंधित बसों के सहारे है। इधर, डिपो की बसों में यात्रा करने वालों की संख्या घटी है। रविवार को अवकाश होने के चलते लोकल रूटों की बसों में अन्य दिनों की अपेक्षा यात्री कम रहे। त्योहार मनाने बाहर से जो भी यात्री डिपो में उतर रहे हैं, उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
-राकेश पति त्रिपाठी, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी
भटनी बाजार में नहीं मनाया जाता है होलिका दहन
फोटो समाचार 05 डीईओ 151,152,153,154
अनहोनी के डर से शुरू नहीं हो पाती यह परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
भटनी। बुराई को जलाकर अच्छाई के संकल्प के साथ होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है। होली से पूर्व सनातन धर्म से जुड़े लोग होलिका दहन धूमधाम मनाते हैं। इसके इतर भटनी बाजार में इस परंपरा को नहीं मनाया जाता। बीते कुछ सालों से लोग इसकी शुरुआत करना चाहते हैं, लेकिन अनहोनी के चलते ऐसा करने से डरते हैं। वे लोग नगर के अन्य वार्डों में जाकर होलिका दहन में हिस्सा लेते हैं।
नगरवासी बोले...
यहां शुरू से ही होलिका दहन का कार्यक्रम नहीं हुआ। पिछले कुछ सालों में चारों तरफ यह देखने के बाद नगर में भी होलिका जलाने की इच्छा हुई, लेकिन किसी आशंका के चलते उसे क्रियान्वित नहीं किया जा सका।
-विजय शंकर मद्धेशिया, गांधी चौक
बुराई जलाने की प्रतीक और अच्छाई की विजय वाली ये परंपरा न निभा पाने का हम सभी को बहुत मलाल है। पर आम सहमति नहीं बन पाने की वजह से इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है।
-नवीन कुमार गुप्त, चिउरा गली
यहां पूरे नगर में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। बाजार में होलिका दहन कभी नहीं होता। आसपास के वार्डों में जाकर हिस्सा ले लिया जाता है। इसे शुरू करने के लिए पहल करनी होगी।
-हरिंद्र कुमार वर्मा, हरिकीर्तन मोहल्ला
बचपन में माता-पिता से होलिका दहन क्यों मनाया जाता है, इसकी कहानी सुनते रहे हैं। पर विडंबना है कि यहां होलिका कभी नहीं जलाई गई। इसके लिए हमें अन्य जगहों पर जाना पड़ता है।
-विजय कुमार वर्मा, मेन रोड
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जैसे-जैसे होली का पर्व नजदीक आ रहा है। वैसे ही शहर के प्रमुख बाजारों में रौनक बढ़ रही है। पर्व मनाने के लिए सामान की सूची के साथ लोग दुकानों पर पहुंचने लगे हैं। दुकानदार भी एक-एक कर उन्हें निकलवाने में लगे हैं। भीड़ के चलते कहीं दो से तीन घंटे तो कहीं पूरा दिन लग जा रहा है। उधर, पिचकारी, रंग, गुलाल, मेवा की दुकानों पर इस समय सबसे ज्यादा ग्राहक आ रहे हैं।
शहर के तिलक रोड, छहमुखी चौराहा, अर्जुन रोड, सुर्तीहट्टा रोड, अंसारी रोड, हनुमान मंदिर रोड पर पर्व का उत्साह दिख रहा है। इन जगहों पर तरह-तरह की परंपरागत व आधुनिक पिचकारियां, रंग, अबीर-गुलाल की दुकानें सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
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तिलक रोड के दुकानदार संतोष चौरसिया ने बताया कि आरारोट से बना लाल, हरा, पीला, नीला, आसमानी अबीर 80 रुपये किलो बिक रहा है। कई ग्राहक हर्बल रंग, अबीर-गुलाल की भी मांग कर रहे हैं जो आरारोट से बने अबीर से महंगा है। पिचकारी की दुकानों पर पहुंचने वालों में बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।
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तेल के दाम गिरने से राहत तो गरी में आया उछाल
मालवीय रोड के किराना दुकानदार अरुण बरनवाल ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार सरसों तेल, रिफाइन के दाम गिरे हैं। वहीं, मैदा व गरी के मूल्य में तेजी है। गरी 320 रुपये किलो, वहीं, मैदा 35 रुपये किलो अभी बिक रहा है।
घरों में पकवान बनाने की चल रहीं तैयारियां
इधर, घरों में महिलाएं पर्व की तैयारियों के तहत सामान की सूची बनाने, आने पर उन्हें सहेज कर रखने में लगी हैं। जहां सामान दुकान से आ चुके हैं, वहां गुझिया, मठरी, खस्ता, नमकीन, पापड़, गुलाब जामुन बनाने की तैयारी हो रही है। बच्चे भी बता रहे हैं कि उनकी पसंद का क्या बनेगा। ऐसे में आम से लेकर खास तक सभी लोगों के यहां पर्व की खुशी नजर आने लगी है।
होलिकादहन समितियों ने भी तैयारियों को दिया अंतिम रूप
शहर में मालवीय रोड पुल के नीचे, कस्तूरबा राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, खरजरवा, सोमनाथ मंदिर के पास, हनुमान मंदिर रोड में प्रमुख होलिकादहन की समितियां कार्यरत हैं। निर्धारित स्थलों पर सूखी लकड़ी, कंडा, पुआल आदि जुटाने का कार्य तेजी से चल रहा है।
आज रात्रि में 12:23 से 1:35 बजे तक होलिकादहन का शुुुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार छह मार्च की देर रात में ही होलिकादहन के शुभ मुहूर्त है। पवहारी संस्कृत महाविद्यालय बैकुंठपुर के ज्योतिषाचार्य पं. विवेक उपाध्याय व रीलीजियस स्काॅलर्स सोसायटी के अध्यक्ष पं. शरद चंद मिश्र बताते हैं कि इस वर्ष छह मार्च को भद्रा सायंकाल 3:56 बजे से सात मार्च को प्रात:काल 4:48 बजे तक होने से होलिकादहन भ्रदा के पुंछ भाग में होगा। ऐसे में छह मार्च की रात में 12:23 से 1:35 बजे के बीच ही होलिकादहन किया जाएगा।
स्पीकअप
होली पर्व को लेकर घरों में तो तैयारियां चल ही रहीं हैं। सोमवार को स्कूल में बच्चों के बीच पर्व पर आधारित पोस्टर, कविता-कहानी की प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। बच्चे भी इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं।
-क्षितिज सिंह, सहायक अध्यापक पगरा
अभी घर की साफ-सफाई चल रही है। सामान की सूची दुकान पर पहुंच गई है। आने पर परंपरागत पकवान बनाएंगे। होली के दिन अबीर-गुलाल लगाकर मेहमानों का स्वागत करने की तैयारी चल रही है।
-शांति देवी, गृहिणी पुरवा चौराहा
एक नजर
1185 ग्राम पंचायतों में 1495 जगहों पर होलिकादहन
पांच जोन में बंटा जनपद, सुपर जोनल मजिस्ट्रेट की तैनाती
1905 सफाई कर्मियों की ड्यूटी
विकास भवन में कंट्रोल रूम स्थापित
पानी से जुड़ी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 18001801382
बिजली समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 8004930620
पुलिस के लिए 112, एंबुलेंस के लिए 108
लंबी दूरी के मार्गों पर बढ़ाई गईं बसें
गोरखपुर-सलेमपुर, बरहज रूट पर कम रहे यात्री, रविवार का भी दिखा असर
....फोटो समाचार
- - अधिकारियों को उम्मीद पर्व के और नजदीक आने पर बढ़ेगी संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। होली पर्व को देखते हुए डिपो ने दिल्ली, लखनऊ, कानपुर रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई है। हालांकि, लोकल यात्रियों की संख्या कम हो गई है। सामान्य दिनों में जहां 35 से 36 हजार यात्री प्रतिदिन निकल रहे थे। इस समय 32 हजार यात्री ही डिपो की बसों से यात्रा कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि पर्व के नजदीक आने पर यात्रियों की संख्या और बढ़ेगी।
देवरिया डिपो में वर्तमान में निगम की 65 एवं अनुबंधित 112 बसों का संचालन हो रहा है। होली पर्व को देखते हुए मुख्यालय के निर्देश पर लंबी दूरी वाले मार्गों पर बसों की संख्या बढ़ाई गई है। सामान्य दिनों में देवरिया से दिल्ली रूट पर तीन, कानपुर पर पांच एवं लखनऊ के लिए दो बसें प्रतिदिन चलती हैं।
इधर, पर्व मनाने के लिए बाहर से आने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। ऐसे में दिल्ली के लिए छह, कानपुर सात और लखनऊ रूट पर पांच बसों को लगाया गया है। इधर, लोकल रूटों पर रविवार को यात्रियों की संख्या बेहद कम रही। आलम यह रहा कि दोपहर एक बजे तक डिपो में गोरखपुर जाने के लिए 12 से अधिक बसें यात्रियों के इंतजार में खड़ी रहीं। विभाग की ओर से इधर क्रम से ही बसों को गोरखपुर व सलेमपुर-लार रूट पर भेजा जा रहा है।
कोट
होली के मद्देनजर लंबी दूरी पर बसों की संख्या बढ़ाई गई है। लोकल रूटों पर संचालन अनुबंधित बसों के सहारे है। इधर, डिपो की बसों में यात्रा करने वालों की संख्या घटी है। रविवार को अवकाश होने के चलते लोकल रूटों की बसों में अन्य दिनों की अपेक्षा यात्री कम रहे। त्योहार मनाने बाहर से जो भी यात्री डिपो में उतर रहे हैं, उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
-राकेश पति त्रिपाठी, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी
भटनी बाजार में नहीं मनाया जाता है होलिका दहन
फोटो समाचार 05 डीईओ 151,152,153,154
अनहोनी के डर से शुरू नहीं हो पाती यह परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
भटनी। बुराई को जलाकर अच्छाई के संकल्प के साथ होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है। होली से पूर्व सनातन धर्म से जुड़े लोग होलिका दहन धूमधाम मनाते हैं। इसके इतर भटनी बाजार में इस परंपरा को नहीं मनाया जाता। बीते कुछ सालों से लोग इसकी शुरुआत करना चाहते हैं, लेकिन अनहोनी के चलते ऐसा करने से डरते हैं। वे लोग नगर के अन्य वार्डों में जाकर होलिका दहन में हिस्सा लेते हैं।
नगरवासी बोले...
यहां शुरू से ही होलिका दहन का कार्यक्रम नहीं हुआ। पिछले कुछ सालों में चारों तरफ यह देखने के बाद नगर में भी होलिका जलाने की इच्छा हुई, लेकिन किसी आशंका के चलते उसे क्रियान्वित नहीं किया जा सका।
-विजय शंकर मद्धेशिया, गांधी चौक
बुराई जलाने की प्रतीक और अच्छाई की विजय वाली ये परंपरा न निभा पाने का हम सभी को बहुत मलाल है। पर आम सहमति नहीं बन पाने की वजह से इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है।
-नवीन कुमार गुप्त, चिउरा गली
यहां पूरे नगर में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। बाजार में होलिका दहन कभी नहीं होता। आसपास के वार्डों में जाकर हिस्सा ले लिया जाता है। इसे शुरू करने के लिए पहल करनी होगी।
-हरिंद्र कुमार वर्मा, हरिकीर्तन मोहल्ला
बचपन में माता-पिता से होलिका दहन क्यों मनाया जाता है, इसकी कहानी सुनते रहे हैं। पर विडंबना है कि यहां होलिका कभी नहीं जलाई गई। इसके लिए हमें अन्य जगहों पर जाना पड़ता है।
-विजय कुमार वर्मा, मेन रोड